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सम्राट मिहिर भोज जयंती को राष्ट्रीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का आह्वान

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का देशव्यापी अभियान—महापुरुषों को जातीय सीमाओं से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय गौरव के रूप में याद करने की अपील
मौहम्मद इल्यास —“दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा
Vision Live News / Special Story 
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की जयंती को देशभर में व्यापक स्तर पर मनाने का आह्वान किया है। महासभा ने देश के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और विभिन्न वर्गों से अपील की है कि सम्राट मिहिर भोज की जयंती को केवल किसी एक जाति या समुदाय के कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय गौरव दिवस” की भावना के साथ मनाया जाए।
महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बच्चू सिंह बैंसला ने कहा कि भारत का इतिहास ऐसे वीर योद्धाओं, त्यागी महापुरुषों और महान व्यक्तित्वों से समृद्ध रहा है, जिन्होंने अपने निजी हितों से ऊपर उठकर देश, समाज, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। ऐसे महापुरुषों को किसी एक जाति की सीमा में बांधना उनके व्यापक योगदान को सीमित करना होगा।
सम्राट मिहिर भोज के योगदान को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखने की अपील
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने कहा कि सम्राट मिहिर भोज का नाम भारतीय इतिहास में एक शक्तिशाली शासक और राष्ट्ररक्षा से जुड़े व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया जाता है। महासभा के अनुसार, उनके शासनकाल और तत्कालीन परिस्थितियों को समझते हुए उनके योगदान को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और देश की सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
महासभा का कहना है कि इतिहास केवल राजाओं और युद्धों का विवरण नहीं है, बल्कि वह उन मूल्यों और संघर्षों की कहानी भी है, जिन्होंने भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान को आकार दिया। इसलिए सम्राट मिहिर भोज जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी देना आवश्यक है।
संगठन ने कहा कि जयंती समारोहों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे अवसरों के माध्यम से युवाओं को इतिहास, राष्ट्रभावना, सामाजिक जिम्मेदारी और अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ना भी होना चाहिए।
“महापुरुष किसी एक जाति के नहीं, पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं”
बच्चू सिंह बैंसला ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने जाति, क्षेत्र और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देश और समाज के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति के वीर धन सिंह कोतवाल ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष की प्रेरक गाथा के रूप में याद किया जाता है।
इसी क्रम में विजय सिंह पथिक के नेतृत्व में चले बिजौलिया किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए महासभा ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों, शोषण के विरोध और जनहित की आवाज से जुड़ा व्यापक संघर्ष था। ऐसे आंदोलनों को केवल किसी एक समुदाय तक सीमित करके देखना उनके व्यापक सामाजिक प्रभाव को कम करके आंकना होगा।
पन्नाधाय का त्याग—कर्तव्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण का उदाहरण
महासभा ने पन्नाधाय के बलिदान को भी भारतीय इतिहास की महान त्याग परंपरा का उदाहरण बताया।
संगठन के अनुसार, पन्नाधाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ के उत्तराधिकारी की रक्षा की। उनका त्याग भारतीय इतिहास में मातृभूमि, कर्तव्य और जिम्मेदारी के प्रति अद्वितीय समर्पण की मिसाल के रूप में स्मरण किया जाता है।
महासभा का कहना है कि ऐसे उदाहरणों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि युवा केवल इतिहास की तारीखें न जानें, बल्कि उन व्यक्तित्वों के त्याग, साहस और कर्तव्यबोध को भी समझें।
रामप्यारी गुर्जरी के संघर्ष को भी किया याद
महासभा ने वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी के नेतृत्व में तैमूर लंग के आक्रमण के विरुद्ध हुए संघर्ष का भी उल्लेख किया।
संगठन ने कहा कि आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष को केवल किसी एक परिवार अथवा जाति की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे संघर्षों में देश, समाज, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की भावना भी जुड़ी होती है।
महासभा ने कहा कि भारत का इतिहास विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के ऐसे अनेक संघर्षों से निर्मित हुआ है, जिन्हें व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।
जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय गौरव की भावना
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा कि “महापुरुष सम्पूर्ण समाज एवं राष्ट्र के होते हैं।”
संगठन के अनुसार, जिसने भी भारत की रक्षा, स्वतंत्रता, संस्कृति, सभ्यता, स्वाभिमान और समाज के लिए योगदान दिया, वह पूरे देश का गौरव है।
महासभा ने कहा कि किसी महापुरुष का सम्मान करने के लिए व्यक्ति की जाति, धर्म या क्षेत्र का समान होना आवश्यक नहीं है। महापुरुषों का जीवन और उनका योगदान समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकता है।
इसी विचार के आधार पर महासभा ने सम्राट मिहिर भोज जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने की अपील की है।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने की पहल
महासभा ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में नई पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है।
संगठन का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल युग में ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर विभिन्न प्रकार की सूचनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में युवाओं को इतिहास का अध्ययन करने, प्रामाणिक स्रोतों को समझने और महापुरुषों के योगदान को तथ्यात्मक रूप से जानने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
महासभा के अनुसार, जयंती और स्मृति दिवस केवल आयोजन की औपचारिकता न बनें, बल्कि इन अवसरों पर इतिहास चर्चा, युवा संवाद, विचार गोष्ठी, सामाजिक सेवा, शिक्षा संबंधी कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जानी चाहिए।
“राष्ट्रीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की अपील
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने देशवासियों से अपील की कि सम्राट मिहिर भोज जयंती को व्यापक राष्ट्रीय भावना के साथ मनाया जाए।
महासभा का संदेश है कि जिन नागरिकों को सम्राट मिहिर भोज के शौर्य, राष्ट्ररक्षा और ऐतिहासिक योगदान पर गर्व है, वे अपनी जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।
संगठन ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में है और देश के महान व्यक्तित्वों का सम्मान भी इसी व्यापक भावना के साथ किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी का विस्तार, दो पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी
सम्राट मिहिर भोज जयंती को लेकर आह्वान के साथ महासभा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का विस्तार भी किया।
संगठन की ओर से सुखवीर आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा संजय भैय्या को राष्ट्रीय मंत्री-सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई। दोनों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर संगठनात्मक दायित्व सौंपा गया।
महासभा ने उम्मीद जताई कि नवनियुक्त पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने, सामाजिक एकजुटता बढ़ाने और महापुरुषों के इतिहास एवं विचारों को समाज के बीच पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी.एन. सिंह, अनिल कसाना, राष्ट्रीय पदाधिकारी हरिओम बैंसला, डॉ. मनोज कटारिया, राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. बी.एस. रावत, उत्तर प्रदेश के चन्द्रवीर नागर, जिला अध्यक्ष कैप्टन पंचशील गुर्जर, प्रदेश संगठन महामंत्री अमरजीत, सुशील अवाना, रतिपाल नागर, हरिओम भाटी, चैनपाल प्रधान, देवेंद्र कसाना, बबलू गुर्जर, रवि रविंद भाटी, प्रदीप सरपंच सहित राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में संगठनात्मक गतिविधियों, सामाजिक एकजुटता तथा महापुरुषों की स्मृति को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
इतिहास से प्रेरणा लेकर भविष्य निर्माण का संदेश
महासभा ने अपने संदेश में कहा कि इतिहास का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा लेकर वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाना भी है।
सम्राट मिहिर भोज सहित देश के विभिन्न महापुरुषों के जीवन से साहस, त्याग, कर्तव्य, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों की प्रेरणा ली जा सकती है।
संगठन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की आवश्यकता है कि भारत का इतिहास केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि वह देश की वर्तमान सामाजिक चेतना और भविष्य की दिशा से भी जुड़ा हुआ है।
महासभा ने देशवासियों से आह्वान किया—
“आइए, अपने इतिहास को जानें, अपने महापुरुषों का सम्मान करें और उनके त्याग, शौर्य एवं राष्ट्रभावना से आने वाली पीढ़ी को परिचित कराएं।”
विशेष टिप्पणी
सम्राट मिहिर भोज जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की अपील के माध्यम से अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने महापुरुषों की स्मृति को जातीय सीमाओं से ऊपर उठाकर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का प्रयास किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक संगठन, युवा वर्ग और नागरिक इस आह्वान को किस रूप में आगे बढ़ाते हैं।



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