BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

दीर्घकालिक साहित्य साधना के लिए गीतकार विनोद भृंग को मिला ‘गायत्री सम्मान’


रेणुकाजी तीर्थ में साहित्यिक सेवाओं के लिए हुआ सम्मान, साहित्य-जगत में उपलब्धि पर शुभकामनाओं का दौर

 Vision Live / सहारनपुर / रेणुकाजी (हिमाचल प्रदेश)
साहित्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं निरंतर रचनात्मक साधना के लिए सहारनपुर की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘समन्वय’ के उपाध्यक्ष एवं गीतकार विनोद भृंग को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले स्थित प्रसिद्ध रेणुकाजी तीर्थ में ‘गायत्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उन्हें ऋषि पंचमी के अवसर पर रेणुकाजी तीर्थ स्थित गायत्री मंदिर के 42वें स्थापना दिवस समारोह में प्रदान किया गया। गायत्री आश्रम के संचालक महामंडलेश्वर परमहंस ब्रह्मर्षि स्वामी दयानंद भारती महाराज ने अनेक संत-महापुरुषों की उपस्थिति में गीतकार विनोद भृंग को उनकी दीर्घकालिक साहित्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया।

सम्मान समारोह के दौरान उन्हें मणिमुक्त माला, शॉल, सम्मानपत्र एवं ट्रॉफी भेंट की गई। समारोह का गरिमामय संचालन राजेश वशिष्ठ ने किया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच साहित्य साधना के सम्मान का यह अवसर उपस्थित लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

साहित्य साधना में दर्ज हैं कई महत्वपूर्ण कृतियां

गीतकार विनोद भृंग लंबे समय से साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा में अध्यात्म, बाल साहित्य, कविता और साहित्यिक इतिहास से जुड़े विविध आयाम दिखाई देते हैं।

उनकी प्रकाशित कृतियों में ‘जय रघुनंदन जय सियाराम’ (अध्यात्म-काव्य), ‘जादूगर बादल’ (बाल कविता-संग्रह), ‘उड़ान जारी है’ (कविता-संग्रह) तथा ‘गंध तुम्हारी छंद तुम्हारे’ (सहारनपुर की काव्य-यात्रा) प्रमुख हैं। इन कृतियों को साहित्यिक जगत में सराहना मिली है।

विनोद भृंग की साहित्यिक सक्रियता केवल लेखन तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे साहित्यिक गतिविधियों और संस्थागत आयोजनों के माध्यम से भी साहित्य की निरंतर सेवा से जुड़े रहे हैं। उनकी दीर्घकालिक साहित्यिक सेवाओं के लिए देश की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं द्वारा उन्हें पूर्व में भी सम्मानित किया जा चुका है।

साहित्य साधना के सम्मान का गौरवपूर्ण अवसर

‘गायत्री सम्मान’ मिलने के बाद साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने विनोद भृंग को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साहित्य प्रेमियों का कहना है कि निरंतर रचनात्मक साधना और साहित्य के प्रति समर्पण को इस प्रकार के सम्मान से नई ऊर्जा मिलती है।

रेणुकाजी तीर्थ में आयोजित समारोह ने साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा के बीच एक सुंदर सेतु का रूप प्रस्तुत किया, जहां लंबे समय से साहित्य साधना में सक्रिय एक रचनाकार को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।


.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }