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समान वेतन और समान अवसर की आवाज बना द्रोणाचार्य कॉलेज का नुक्कड़ नाटक


महिला समान वेतन दिवस पर नुक्कड़ नाटक, वाद-विवाद और पोस्टर प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों ने दिया लैंगिक समानता का संदेश

   रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’

Vision Live News /  दनकौर (गौतमबुद्धनगर)

महिला समान वेतन दिवस के अवसर पर श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में नुक्कड़ नाटक, वाद-विवाद एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज में लैंगिक समानता, महिला अधिकारों, समान अवसर और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। आयोजन के दौरान प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने लैंगिक भेदभाव और असमानता जैसे सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

‘तारा’ के जरिए लैंगिक असमानता पर किया प्रहार

बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वयंसेविकाओं माही नागर, प्रेरणा, खुशी नागर, नाजिश एवं शिवानी ने प्रसिद्ध नाटककार महेश दत्तानी द्वारा रचित नाटक ‘तारा’ के माध्यम से लैंगिक भेदभाव, लैंगिक असमानता और लैंगिक पहचान से जुड़े संवेदनशील विषयों को मंचित किया।

नाटक के माध्यम से छात्राओं ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी व्यक्ति के साथ केवल उसके लिंग के आधार पर अवसरों, अधिकारों और सम्मान में भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रस्तुति के दौरान महिला अधिकारों, सामाजिक भेदभाव और समान अवसरों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी संवाद एवं अभिनय के माध्यम से सामने रखा गया।

समानता को बताया प्रगतिशील समाज की आधारशिला

कार्यक्रम में उपप्राचार्य डॉ. रश्मि गुप्ता ने लैंगिक संवेदनशीलता और समान अवसरों को प्रगतिशील समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास तभी सार्थक माना जा सकता है, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों।

डॉ. अजमत आरा ने महिलाओं की शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक समानता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

“समान वेतन केवल कानून की मांग नहीं, नैतिक जिम्मेदारी भी”

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहां महिलाओं को कितने समान अवसर, सम्मान और अधिकार प्राप्त हैं।

उन्होंने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन केवल कानून की मांग नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। जब तक लैंगिक भेदभाव समाप्त नहीं होगा, तब तक समानता और समावेशी विकास का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक पहल के माध्यम से ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जहां महिला और पुरुष दोनों को अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।

वाद-विवाद और पोस्टर प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मकता

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने महिला समान वेतन, लैंगिक समानता और महिला अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। विद्यार्थियों ने सामाजिक असमानता के कारणों और समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर अपने तर्क प्रस्तुत किए।

वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से महिला सम्मान, समान वेतन, समान अधिकार और लैंगिक समानता का संदेश दिया। पोस्टरों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज को जागरूक करने और महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया।

सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मिला विस्तार

कार्यक्रम में महाविद्यालय के आचार्यगण की उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक मुद्दों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी परिचय दिया।

महिला समान वेतन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को समानता, सम्मान, सामाजिक न्याय और लैंगिक संवेदनशीलता जैसे मूल्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए जागरूक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश भी रेखांकित किया कि समान अवसर और समान सम्मान केवल किसी एक वर्ग का विषय नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण की साझा जिम्मेदारी है।


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