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“जहां बुजुर्गों का सम्मान, वहीं संस्कारों की पहचान—दादा-दादी के स्नेह से खिलता है बचपन”




जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ समारोह ने सजाई रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर, ‘Rooted in Love, Growing with Joy’ की थीम ने दिया पीढ़ियों के जुड़ाव का संदेश
नन्हे-मुन्नों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, दादा-दादी ने खेलों में लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा; प्रेम, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से सराबोर रहा पूरा समारोह
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
आज के तेजी से बदलते दौर में जहां जीवनशैली लगातार आधुनिक होती जा रही है, वहीं परिवार के बुजुर्गों से जुड़ाव और उनके अनुभवों से सीखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। दादा-दादी का रिश्ता बच्चों के जीवन में केवल स्नेह और दुलार का रिश्ता नहीं, बल्कि अनुभव, संस्कार, परंपरा और जीवन-मूल्यों की विरासत का रिश्ता भी है। इसी खूबसूरत भाव को केंद्र में रखते हुए जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल, स्वर्ण नगरी, ग्रेटर नोएडा में 12 सितंबर 2026 को प्री-नर्सरी से कक्षा द्वितीय तक के विद्यार्थियों एवं उनके दादा-दादी के लिए ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की थीम ‘Rooted in Love, Growing with Joy’ रही, जिसका भावार्थ बच्चों को प्रेम और पारिवारिक जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें खुशियों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना रहा। समारोह ने विद्यालय परिसर को भावनाओं, उल्लास, संगीत, नृत्य और पीढ़ियों के बीच आत्मीय संवाद से भर दिया।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ, अतिथियों का हुआ आत्मीय स्वागत

समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों और ग्रैंडपेरेंट्स का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती भावना शर्मा उपस्थित रहीं।

विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रेनू सहगल ने स्वागत संबोधन के माध्यम से सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं दादा-दादी का अभिनंदन किया। उन्होंने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार और विशेष रूप से ग्रैंडपेरेंट्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबों से ज्ञान जरूर मिलता है, लेकिन दादा-दादी के अनुभवों से उन्हें जीवन जीने की समझ, रिश्तों की अहमियत और संस्कारों की सीख मिलती है।

नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से जीता सबका दिल

समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यालय के नन्हे विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। बच्चों ने नृत्य, गायन, क़व्वाली एवं नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

मंच पर बच्चों की मासूमियत, आत्मविश्वास और उत्साह देखते ही बन रहा था। जैसे ही नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दादा-दादी अपने पोते-पोतियों की प्रस्तुतियों को देखकर भावुक भी हुए और गर्व से भर उठे।

कई क्षण ऐसे रहे जब बच्चों की प्रस्तुति और ग्रैंडपेरेंट्स की प्रतिक्रियाओं ने समारोह को एक भावनात्मक रंग दे दिया।

जब ग्रैंडपेरेंट्स भी बने कार्यक्रम का हिस्सा

ग्रैंडपेरेंट्स डे को केवल बच्चों की प्रस्तुतियों तक सीमित न रखते हुए विद्यालय की ओर से दादा-दादी के लिए मनोरंजक खेलों और गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।

इन गतिविधियों में ग्रैंडपेरेंट्स ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों ने भी अपने दादा-दादी को खेलते और मुस्कुराते हुए देखकर जमकर आनंद लिया। इस दौरान विद्यालय परिसर में कई ऐसे खुशनुमा पल देखने को मिले, जिन्होंने कार्यक्रम की थीम ‘Rooted in Love, Growing with Joy’ को वास्तविक अर्थों में जीवंत कर दिया।

दादा-दादी—बच्चों के लिए संस्कारों की जीवंत पाठशाला

समारोह का मूल संदेश यही रहा कि दादा-दादी परिवार की वह मजबूत कड़ी हैं, जो बच्चों को अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ती है। उनके अनुभव बच्चों को जीवन की चुनौतियों को समझने और सही दिशा चुनने में मदद करते हैं।

आज जब संयुक्त परिवारों की अवधारणा कई कारणों से बदल रही है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बुजुर्ग परिवार का बोझ नहीं, बल्कि परिवार की सबसे मूल्यवान धरोहर होते हैं।

मुख्य अतिथि ने बताया ग्रैंडपेरेंट्स के स्नेह का महत्व

मुख्य अतिथि श्रीमती भावना शर्मा ने अपने संबोधन में दादा-दादी के स्नेह, अनुभव एवं संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ अधिक समय बिताने और उनके अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को बच्चों और बुजुर्गों के बीच भावनात्मक संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

—क्या बोलीं,  डॉ. रेनू सहगल प्रधानाचार्या?

समारोह के दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रेनू सहगल ने ग्रैंडपेरेंट्स डे के उद्देश्य, बच्चों के जीवन में दादा-दादी की भूमिका, पारिवारिक संस्कारों और संयुक्त परिवार की संस्कृति को लेकर अपने विचार साझा किए।

प्रेम, संस्कार और पीढ़ियों के जुड़ाव का संदेश

जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल में आयोजित यह समारोह महज एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि रिश्तों को महसूस करने और पीढ़ियों को करीब लाने का एक खूबसूरत अवसर बनकर सामने आया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को परिवार, संस्कार, सम्मान और रिश्तों की अहमियत समझाना भी उतना ही आवश्यक है। दादा-दादी का स्नेह बच्चों के बचपन को जिस तरह सुरक्षा और अपनापन देता है, वह किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं सिखाया जा सकता।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समारोह का समापन

भावनाओं और उल्लास से भरे इस कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं जलपान के साथ हुआ। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि, ग्रैंडपेरेंट्स, अभिभावकों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कुल मिलाकर, जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल का ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ समारोह प्रेम, सम्मान, संस्कार और पारिवारिक एकजुटता का ऐसा सुंदर उत्सव बनकर सामने आया, जिसने एक बार फिर याद दिलाया—

**“बचपन को खुशियों की जरूरत होती है और खुशियों को जड़ों की;

जहां दादा-दादी का आशीर्वाद होता है, वहां संस्कारों की नींव मजबूत होती है।”**



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