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AI और ICT से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व शोध को नई दिशा, GNIOT–UGC MMTTC के छह दिवसीय FDP का समापन


24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 207 शहरों-जिलों से 524 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण, 36 घंटे के कार्यक्रम को मिला राष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता का व्यापक मंच
मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’/ ग्रेटर नोएडा
उच्च शिक्षा के बदलते तकनीकी परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट) द्वारा यूजीसी–मालवीय मिशन–टीचर ट्रेनिंग सेंटर (MM-TTC) के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। “ICT & Artificial Intelligence (AI) for Quality Teaching & Research” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने देशभर के शिक्षकों और शिक्षाविदों को तकनीक आधारित शिक्षण एवं शोध की नई संभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया।
17 से 23 सितंबर 2026 तक आयोजित इस FDP के अंतर्गत कुल 36 घंटे का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो 3 क्रेडिट के समकक्ष रहा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षकों एवं अकादमिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
राष्ट्रीय स्तर पर रही व्यापक सहभागिता
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी व्यापक राष्ट्रीय सहभागिता रही। FDP के लिए 24 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 207 शहरों एवं जिलों से कुल 524 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। इससे यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल संस्थान तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों के बीच तकनीकी एवं अकादमिक ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच बना।
शिक्षण से लेकर शोध तक AI और ICT के व्यावहारिक उपयोग पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा में ICT और AI के प्रभावी उपयोग के माध्यम से शिक्षण, अधिगम तथा शोध की गुणवत्ता को मजबूत करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तेजी से विकसित हो रही तकनीकों और AI आधारित शैक्षणिक उपकरणों की संभावनाओं से परिचित कराया गया।
विशेषज्ञों ने यह समझाने पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल डिजिटल माध्यम से पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत, संवादात्मक और प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही शोध कार्यों में तकनीकी उपकरणों के उपयोग, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता तथा AI-सक्षम शोध प्रक्रियाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञ सत्रों में समकालीन अकादमिक चुनौतियों पर संवाद
छह दिनों के दौरान आयोजित विभिन्न व्याख्यानों एवं संवादात्मक सत्रों में प्रतिभागियों को समकालीन उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। इनमें AI-सक्षम शोध, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियां, व्यक्तिगत एवं इंटरैक्टिव लर्निंग, डिजिटल शैक्षणिक संसाधन तथा शोध में तकनीकी उपकरणों का प्रभावी उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
इन सत्रों का उद्देश्य शिक्षकों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी तकनीकों और कार्यप्रणालियों से परिचित कराना रहा, जिनका उपयोग वे अपने संस्थानों में शिक्षण एवं शोध गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर सकें।
बदलते शैक्षणिक परिवेश के लिए शिक्षकों को तैयार करने की पहल
AI के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच उच्च शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका भी निरंतर बदल रही है। ऐसे समय में आयोजित यह FDP शिक्षकों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक करने और उनके व्यावहारिक उपयोग की समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल को अपने-अपने संस्थानों में नवीन शिक्षण पद्धतियों, AI एवं ICT के प्रभावी अनुप्रयोग तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पहलों के माध्यम से उपयोग में लाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
तकनीक-सक्षम उच्च शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
आयोजकों के अनुसार, छह दिवसीय FDP का उद्देश्य शिक्षकों को तेजी से बदल रहे तकनीकी एवं शैक्षणिक वातावरण के अनुरूप तैयार करना तथा उन्हें AI और ICT की संभावनाओं से जोड़ना रहा। राष्ट्रीय स्तर पर 524 प्रतिभागियों की सहभागिता ने कार्यक्रम के व्यापक अकादमिक प्रभाव और तकनीक आधारित उच्च शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस दिशा में एक प्रयास रहा कि शिक्षक नई तकनीकों को समझने के साथ-साथ उन्हें कक्षा शिक्षण, विद्यार्थियों के अधिगम अनुभव और शोध कार्यों में जिम्मेदारी एवं प्रभावी तरीके से उपयोग कर सकें।



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