BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

IEA ने औद्योगिक समस्याओं को लेकर अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार एवं UPSIDA CEO बलकार सिंह से की मुलाकात


2,000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ई-ऑक्शन के बजाय ड्रॉ से करने सहित उद्यमियों की कई प्रमुख मांगें उठाईं
मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ लखनऊ
इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष संजीव शर्मा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, MSME श्री आलोक कुमार, आईएएस तथा UPSIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री बलकार सिंह से मुलाकात कर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर गौतमबुद्ध नगर, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों की विभिन्न गंभीर समस्याओं एवं उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की।
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया को MSME के अनुकूल बनाना जरूरी है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने तथा प्राधिकरणों की प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध किए जाने की आवश्यकता है।
2,000 वर्गमीटर तक के भूखंड ड्रॉ से आवंटित करने की मांग
अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार के समक्ष IEA ने मांग रखी कि 2,000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ई-ऑक्शन के बजाय ड्रॉ/लॉटरी के माध्यम से किया जाए। संस्था का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया में छोटे एवं सूक्ष्म उद्यमियों के लिए भूखंड प्राप्त करना बेहद कठिन हो जाता है। साथ ही ऐसे उद्योग जो पांच वर्ष से अधिक समय से किराये के परिसरों में संचालित हो रहे हैं, उन्हें भूखंड आवंटन की ड्रॉ प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाए।
IEA ने यह भी सुझाव दिया कि जिस प्रकार पूर्व में नोएडा प्राधिकरण द्वारा उद्यमियों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराए गए थे, उसी तर्ज पर ग्रेटर नोएडा, यमुना औद्योगिक क्षेत्र तथा प्रस्तावित न्यू नोएडा क्षेत्र में भी उद्यमियों के लिए आवासीय भूखंडों की व्यवस्था पर विचार किया जाए।
बिना जल कनेक्शन के भेजे जा रहे बिलों का मामला उठाया
GNIDA क्षेत्र में अनेक औद्योगिक इकाइयों को जल कनेक्शन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद जल बिल भेजे जाने का मुद्दा भी प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुखता से उठाया। IEA ने मांग की कि जहां जल लाइन अथवा कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, वहां भेजे जा रहे ऐसे बिलों के निस्तारण के लिए कम से कम एक माह का विशेष कैंप लगाया जाए और पात्र मामलों में बिल तत्काल निरस्त किए जाएं।
LT विद्युत कनेक्शन की सीमा 100 KW करने की मांग
MSME इकाइयों के लिए LT श्रेणी में विद्युत कनेक्शन की सीमा को 50 KW से बढ़ाकर 100 KW किए जाने की मांग रखी गई। संस्था के अनुसार इससे छोटे एवं मध्यम उद्यमों को अतिरिक्त लागत और जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी तथा उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
YEIDA में Functional Certificate की शर्त व्यावहारिक बनाने की मांग
यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में औद्योगिक शेड के लिए Functional Certificate जारी करने में आ रही समस्याओं को भी प्रतिनिधिमंडल ने उठाया। IEA ने कहा कि वर्तमान में 50 प्रतिशत RCC निर्माण की शर्त कई छोटे एवं मध्यम उद्यमियों के लिए आर्थिक एवं व्यावहारिक कठिनाई पैदा करती है। उद्योग की प्रकृति और उत्पाद की आवश्यकता के अनुसार इस शर्त में आवश्यक संशोधन अथवा व्यावहारिक छूट दिए जाने की मांग की गई।
इसके साथ ही यमुना औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, बिजली और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं को शीघ्र विकसित करने तथा औद्योगिक इकाइयों की कार्यशीलता की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की गई, ताकि उद्यमियों पर अनावश्यक आर्थिक दंड का भार न पड़े।
प्रत्येक औद्योगिक सेक्टर में आवश्यकतानुसार फायर स्टेशन की मांग
IEA ने औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रत्येक औद्योगिक सेक्टर में आवश्यकता के अनुसार Fire Station, पर्याप्त अग्निशमन संसाधन और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की। संस्था ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में आग की घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत फायर इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है।
गौतमबुद्ध नगर में Export Promotion Centre स्थापित करने की मांग
जनपद गौतमबुद्ध नगर में Export Promotion Centre स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया। IEA के अनुसार यहां निर्यातकों को दस्तावेजी सहायता, बाजार संबंधी जानकारी, मार्गदर्शन और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से जनपद के निर्यात को और गति मिल सकती है।
लंबित MSME Subsidy के शीघ्र भुगतान की मांग
IEA ने लंबित MSME Subsidy एवं प्रोत्साहन राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने तथा लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की। साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार की MSME योजनाओं की जानकारी उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों और प्राधिकरण कार्यालयों में Scheme Display Boards लगाए जाने तथा नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया।
GNIDA की पुरानी देनदारियों के समाधान के लिए OTS की मांग
GNIDA क्षेत्र में पुरानी देनदारियों और ब्याज से जुड़े मामलों को भी प्रतिनिधिमंडल ने उठाया। IEA ने कहा कि पूर्व में कई कार्य ऑनलाइन न होने तथा देयताओं की समय पर जानकारी नहीं मिल पाने के कारण अनेक उद्यमियों पर ब्याज और ब्याज पर ब्याज के कारण बड़ी देनदारी बन गई है। ऐसे मामलों के समाधान के लिए One Time Settlement (OTS) योजना लागू किए जाने की मांग की गई।
UPSIDA CEO के समक्ष भी रखे गए महत्वपूर्ण मुद्दे
UPSIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी  बलकार सिंह के समक्ष IEA ने औद्योगिक भूखंडों एवं UPSIDA क्षेत्रों से संबंधित कई महत्वपूर्ण समस्याएं रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
2,000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ड्रॉ/लॉटरी के माध्यम से करना।
भूखंड का पूर्ण भुगतान होने के बाद रजिस्ट्री से संबंधित आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराना।
Rent Permission तथा 1,000 वर्गमीटर तक के भूखंडों के Transfer की अनुमति Regional Office स्तर पर देने की व्यवस्था करना।
गौतमबुद्ध नगर में औद्योगिक भूमि की लागत को देखते हुए FAR एवं Ground Coverage बढ़ाना।
सभी UPSIDA औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित Water Supply एवं Sewer Line सुनिश्चित करना।
औद्योगिक क्षेत्रों में Centralized ETP स्थापित करना।
UPSIDA एवं GNIDA क्षेत्रों में ड्रेनेज सफाई और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना।
UPSIDA क्षेत्रों में Product Display Centre स्थापित करना।
बैंक बदलने अथवा ऋण लेने के लिए आवश्यक PTM/Mortgage Permission की ऑनलाइन प्रक्रिया अधिकतम सात दिन में पूरी करना तथा किसी प्रकार की देयता नहीं होने की स्थिति में Deemed Approval के आधार पर तत्काल अनुमति प्रदान करना।
उद्योगों के विकास और रोजगार से सीधे जुड़े हैं ये मुद्दे: संजीव शर्मा
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे सीधे तौर पर उद्योगों की स्थापना, निवेश, उत्पादन और रोजगार सृजन से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, “उद्योगों को सुविधाजनक एवं समयबद्ध प्रशासनिक व्यवस्था के साथ मजबूत आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, तभी उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को और गति मिलेगी। छोटे एवं मध्यम उद्यम प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं, इसलिए उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।”
IEA ने दोनों अधिकारियों से सभी समस्याओं पर सकारात्मक एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की तथा प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए शासन और प्राधिकरणों को उद्यमियों की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में पी.के. तिवारी, एम.पी. शुक्ला, विवेक चौहान, लक्ष्मण प्रसाद एवं महिपाल सिंह चौहान सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }