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दादरी में भाजपा टिकट की दौड़ में नया नाम, सूरजपुर से लक्ष्मण सिंघल ने ठोकी ताल


वैश्य समाज से आने वाले लक्ष्मण सिंघल की दावेदारी से बदले सियासी समीकरण, संगठन और सामाजिक क्षेत्र में लंबा अनुभव
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी विधानसभा-62
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर दादरी विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के टिकट की दावेदारी लगातार दिलचस्प होती जा रही है। भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले दादरी विधानसभा क्षेत्र में एक के बाद एक नए चेहरे टिकट की दौड़ में सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब सूरजपुर निवासी और भाजपा के पुराने कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंघल ने भी दादरी विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी मजबूती के साथ पेश कर दी है।
दादरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों की संख्या करीब तीन दर्जन तक पहुंच चुकी है। ऐसे में प्रत्येक दावेदार अपने सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में जुटा है। इस बीच लक्ष्मण सिंघल की दावेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह वैश्य समाज से आते हैं और अब तक सामने आए प्रमुख दावेदारों में वैश्य समाज से उनकी दावेदारी अलग पहचान बनाती है।
सूरजपुर भाजपा का मजबूत आधार, यहीं से उठी लक्ष्मण सिंघल की आवाज
सूरजपुर गौतमबुद्ध नगर जिले का एक महत्वपूर्ण कस्बा है। जिला मुख्यालय स्थित सूरजपुर में बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक मतदाता रहते हैं। ऐसे में सूरजपुर से किसी मजबूत स्थानीय चेहरे की दावेदारी सामने आना भाजपा की अंदरूनी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूरजपुर के ग्राम प्रधान धर्मपाल भाटी खुलकर लक्ष्मण सिंघल के समर्थन में सामने आए हैं। उनका कहना है कि यदि भाजपा नेतृत्व लक्ष्मण सिंघल को दादरी विधानसभा से अपना प्रत्याशी तय करता है तो क्षेत्र के लोग पूरे समर्थन और मनोयोग से उनके साथ खड़े होकर चुनाव लड़वाने का काम करेंगे।
धर्मपाल भाटी का समर्थन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह स्वयं क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और सूरजपुर की सामाजिक राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
भाजपा संगठन में पुराना अनुभव, जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं
लक्ष्मण सिंघल को भाजपा का पुराना और सक्रिय कार्यकर्ता बताया जाता है। पार्टी संगठन में काम करने का उन्हें लंबा अनुभव रहा है और वह पूर्व में भाजपा के जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
यही वजह है कि उनकी दावेदारी को केवल चुनावी मौसम में सामने आया नया नाम नहीं माना जा रहा, बल्कि संगठनात्मक पृष्ठभूमि रखने वाले कार्यकर्ता के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दादरी जैसी सीट पर जहां भाजपा के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, वहां संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव किसी भी दावेदार के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व भी बन सकता है बड़ा मुद्दा
लक्ष्मण सिंघल की दावेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका वैश्य समाज से होना है। गौतमबुद्ध नगर जिले की तीनों विधानसभा सीटों—नोएडा, दादरी और जेवर—में वैश्य समाज की अच्छी-खासी आबादी मानी जाती है। भाजपा के संदर्भ में इस समाज को लंबे समय से पार्टी के परंपरागत समर्थक वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है।
राजनीतिक चर्चाओं में समय-समय पर यह मुद्दा भी उठता रहा है कि जिले की राजनीति में वैश्य समाज को उसकी जनसंख्या और राजनीतिक भागीदारी के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
जिले के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो कैप्टन विकास गुप्ता के अलावा वैश्य समाज से आने वाले नेताओं को विधानसभा स्तर पर अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाने की चर्चा समय-समय पर होती रही है। ऐसे में दादरी से लक्ष्मण सिंघल की दावेदारी वैश्य समाज के बीच भी राजनीतिक उम्मीदों को नया आधार दे सकती है।
हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ही करेगा, लेकिन टिकट की दौड़ में वैश्य समाज से किसी मजबूत दावेदार का सामने आना दादरी के सामाजिक समीकरणों को जरूर प्रभावित कर सकता है।
सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं में भी सक्रिय भूमिका
लक्ष्मण सिंघल की पहचान केवल भाजपा कार्यकर्ता के रूप में नहीं है। वह लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा में वैश्य सभा के अध्यक्ष के रूप में भी वह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके अलावा सूरजपुर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक बाराही मेले के भव्य आयोजन से जुड़ी शिव मंदिर सेवा समिति (पंजी.), सूरजपुर में वह कोषाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उनका समर्थन कर रहे सूरजपुर के ग्राम प्रधान धर्मपाल भाटी इसी शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष हैं। ऐसे में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से दोनों के बीच बनी निकटता भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन रही है।
रामलीला से लेकर व्यापार मंडल तक सक्रिय
लक्ष्मण सिंघल की सामाजिक सक्रियता का दायरा काफी व्यापक बताया जाता है। वह श्री आदर्श रामलीला कमेटी, सूरजपुर में प्रबंधक की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा वह सूरजपुर उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री भी हैं।
व्यापार मंडल के माध्यम से वह लंबे समय से स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। यही वजह है कि उनकी दावेदारी में सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी वर्ग—तीनों का संपर्क आधार दिखाई देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में टिकट के लिए केवल पार्टी संगठन का अनुभव ही पर्याप्त नहीं होता। उम्मीदवार की सामाजिक स्वीकार्यता, विभिन्न वर्गों में संपर्क और स्थानीय मुद्दों की समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस लिहाज से लक्ष्मण सिंघल अपने सामाजिक संपर्कों को अपनी दावेदारी का मजबूत आधार बना सकते हैं।
RSS से पुराने संबंध की भी चर्चा
लक्ष्मण सिंघल के राजनीतिक सफर को लेकर यह चर्चा भी सामने आती रही है कि उनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से पुराना रहा है। हालांकि उनकी दावेदारी का अंतिम आधार भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता और सामाजिक क्षेत्र में उनकी भूमिका ही है।
लक्ष्मण सिंघल स्वयं अपनी राजनीतिक दावेदारी को लेकर बेहद संयमित नजर आते हैं। उनका कहना है कि भाजपा संगठन का जो भी आदेश होगा, वह उनके लिए शिरोधार्य होगा।
उनका यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह टिकट की दौड़ में सक्रिय रहते हुए भी संगठन के निर्णय को सर्वोपरि मानने का संदेश दे रहे हैं।
सूरजपुर के विकास के मुद्दे को भी उठा सकते हैं
यदि लक्ष्मण सिंघल को दादरी विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलता है तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि सूरजपुर और आसपास के आबादी क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने की भी होगी।
सूरजपुर में ग्राम पंचायत व्यवस्था समाप्त होने के बाद विकास से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पास हैं। आबादी और कॉलोनियों का विस्तार लगातार हो रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर कई कॉलोनियों में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। बारिश के मौसम में जलभराव और बजबजाती नालियां स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती हैं। कई नई आबादी वाली कॉलोनियों में अभी भी व्यवस्थित रास्तों और जल निकासी की सुविधा का अभाव बताया जाता है।
यदि लक्ष्मण सिंघल चुनावी मैदान में उतरते हैं तो इन स्थानीय समस्याओं को वह अपने राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकते हैं।
दादरी में बढ़ती दावेदारों की फेहरिस्त, किसके सिर बंधेगा टिकट का सेहरा?
दादरी विधानसभा क्षेत्र भाजपा के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण सीट रही है। वर्तमान में भाजपा के मास्टर तेजपाल नागर लगातार दूसरी बार विधायक हैं और पार्टी ने पिछले चुनावों में यहां मजबूत प्रदर्शन किया है।
ऐसे में 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर टिकट की दावेदारी स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है। कई स्थानीय नेता और सामाजिक रूप से प्रभावशाली चेहरे अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं।
इसी दौड़ में अब सूरजपुर के लक्ष्मण सिंघल का नाम भी मजबूती से सामने आया है। उनके पक्ष में भाजपा संगठन का पुराना अनुभव, जिला महामंत्री की पूर्व जिम्मेदारी, वैश्य समाज में संपर्क, व्यापार मंडल की सक्रियता और धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव जैसे कई पहलू हैं।
हालांकि दादरी विधानसभा का टिकट किसे मिलेगा, इसका फैसला भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। लेकिन इतना जरूर है कि लक्ष्मण सिंघल की दावेदारी ने दादरी की टिकट की दौड़ में एक नया सामाजिक समीकरण जोड़ दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व दादरी सीट पर संगठनात्मक अनुभव, जातीय-सामाजिक समीकरण, स्थानीय स्वीकार्यता और चुनावी जीत की संभावना में से किन पहलुओं को सबसे अधिक महत्व देता है और करीब तीन दर्जन दावेदारों की लंबी फेहरिस्त में आखिर किस नाम पर अपनी मुहर लगाता है।
फिलहाल दादरी की सियासत में सवाल एक ही है—क्या सूरजपुर से उठी लक्ष्मण सिंघल की यह ताल भाजपा के टिकट की दौड़ में उन्हें आगे ले जा पाएगी?


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