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दादरी विधानसभा में भाजपा टिकट की जंग हुई दिलचस्प: शहीद राव उमराव सिंह के वंशज, पूर्व बार अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील भाटी ने पेश किया मजबूत दावा



मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी विधानसभा-62  
 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई हैं, लेकिन गौतम बुद्ध नगर जनपद की सबसे चर्चित सीटों में शामिल दादरी विधानसभा (62) में भारतीय जनता पार्टी के टिकट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। संगठन से जुड़े नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के प्रभावशाली चेहरों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में पूर्व बार अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा के सक्रिय सदस्य सुशील भाटी एडवोकेट ने भी दादरी विधानसभा से भाजपा टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूती से सामने रख दी है।
सुशील भाटी स्वयं को केवल एक राजनीतिक दावेदार के रूप में नहीं, बल्कि कानून, समाजसेवा, शिक्षा, संगठन और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े ऐसे चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनका सार्वजनिक जीवन तीन दशकों से अधिक समय से विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। उनके समर्थकों का मानना है कि न्यायिक अनुभव, सामाजिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक सक्रियता उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान देती है।
कानून के क्षेत्र में मजबूत पहचान
सुशील भाटी पिछले लगभग 26 वर्षों से जनपद न्यायालय सूरजपुर में अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने न केवल न्यायालय में सक्रिय वकालत की, बल्कि अधिवक्ताओं के अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार नेतृत्व किया।
वर्ष 1999-2000 में वह बार एसोसिएशन के सह-सचिव चुने गए। इसके बाद 2002-03 में महामंत्री बने और वर्ष 2022-23 में जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। बार अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल अधिवक्ताओं के हितों, न्यायालय की व्यवस्थाओं और संगठनात्मक मजबूती के लिए जाना जाता है।
राजनीति में लंबा अनुभव
सुशील भाटी का राजनीतिक जीवन वर्ष 1999 से शुरू हुआ। प्रारंभिक दौर में वह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और दादरी विधानसभा अध्यक्ष सहित कई जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2002 में उन्हें गौतम बुद्ध नगर में गुर्जर समाज का जिला प्रभारी बनाया गया।
बाद के वर्षों में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और वर्तमान में भाजपा के सक्रिय सदस्य के रूप में संगठनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनकी सक्रियता पिछले कुछ वर्षों में और बढ़ी है।
संघ और वैचारिक पृष्ठभूमि
सुशील भाटी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी हैं। उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग विशेष-2024 का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा वर्तमान में शाखा पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, बीटा-1 ग्रेटर नोएडा में गठनायक का दायित्व निभा रहे हैं।
वह स्वयं को लगभग 45 वर्षों से संघ की विचारधारा से जुड़ा बताते हैं। उनका प्रारंभिक शिक्षण सरस्वती शिशु मंदिर, दादरी में हुआ, जहां से वैचारिक संस्कार प्राप्त करने की बात भी उनके परिचय में प्रमुखता से दर्ज है।
ऐतिहासिक विरासत भी बनी पहचान
सुशील भाटी की दावेदारी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष उनकी ऐतिहासिक पारिवारिक पृष्ठभूमि है। वह स्वयं को 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद एवं दादरी रियासत के राजा राव उमराव सिंह के वंशज बताते हैं।
राव उमराव सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष किया। दादरी क्षेत्र में उनकी शहादत आज भी सम्मान के साथ याद की जाती है। दादरी कोतवाली के सामने स्थापित उनकी प्रतिमा स्थानीय लोगों की ऐतिहासिक स्मृतियों का प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।
सुशील भाटी का मानना है कि यह विरासत उन्हें समाज और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रही है।
2004 का आंदोलन बना सार्वजनिक जीवन का बड़ा अध्याय
वर्ष 2004 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा गौतम बुद्ध नगर जनपद को समाप्त किए जाने के निर्णय के खिलाफ पूरे जिले में बड़ा आंदोलन हुआ था। अधिवक्ता समुदाय इस आंदोलन की अगुवाई कर रहा था।
सुशील भाटी उस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। आंदोलन के दौरान आत्मदाह के प्रयास में वह गंभीर रूप से झुलस गए थे और लगभग तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनके समर्थक इसे उनके संघर्षशील सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान
राजनीति और वकालत के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका लंबा जुड़ाव रहा है।
उन्होंने विभिन्न समय पर मिहिर भोज जूनियर हाईस्कूल, मिहिर भोज बालिका विद्यालय, मिहिर भोज इंटर कॉलेज, नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज साकीपुर, गांधी इंटर कॉलेज दुजाना तथा स्वामी अन्तानन्द इंटर कॉलेज भराना सहित कई शिक्षण संस्थानों की प्रबंध समितियों में उपाध्यक्ष, सदस्य और कोषाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां निभाई हैं।
मिहिर भोज इंटर कॉलेज में कोषाध्यक्ष के रूप में उन्होंने लगभग सौ वर्ष पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार का कार्य भी आगे बढ़ाया।
समाज सेवा को बनाया प्राथमिकता
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने गरीब परिवारों, श्रमिकों और मलिन बस्तियों में भोजन तथा मास्क वितरण जैसे राहत कार्य किए। सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से भी वह विभिन्न जनहित कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं।
उनके अनुसार राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा पहुंचाना है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक पूंजी
सुशील भाटी का परिवार लंबे समय से राष्ट्रवादी और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
उनके पिता सुरेशचंद भाटी भारतीय सेना में सेवाएं देने के बाद भारतीय रेलवे में कार्यरत रहे।
परिवार के अन्य सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा, शिक्षा संस्थानों और स्थानीय निकायों से जुड़े रहे हैं। उनकी पत्नी रितु सिंह भी भाजपा की सक्रिय सदस्य हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक भूमिकाओं में सक्रिय हैं।
दादरी सीट पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
दादरी विधानसभा भाजपा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। औद्योगिक विकास, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बढ़ते शहरी विस्तार, किसानों के मुद्दे, भूमि अधिग्रहण, रोजगार, कानून व्यवस्था और ग्रामीण-शहरी संतुलन जैसे विषय इस सीट की राजनीति को प्रभावित करते हैं।
ऐसे में पार्टी ऐसे उम्मीदवार की तलाश करेगी जो संगठन, सामाजिक समीकरण, जनस्वीकार्यता और चुनावी जीत की संभावना के मानकों पर खरा उतर सके।
सुशील भाटी की दावेदारी ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि टिकट की प्रतिस्पर्धा इस बार काफी दिलचस्प रहने वाली है। आने वाले महीनों में दावेदारों की सक्रियता और तेज होगी तथा अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व संगठनात्मक रिपोर्ट, जनाधार, सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए करेगा।

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