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जिला कचहरी में जलभराव पर अर्चना सिंह की पहल रंग लाई, प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर शुरू किया समाधान का जायजा


बारिश में कीचड़, फिसलन और जलभराव से परेशान अधिवक्ताओं-वादकारियों की आवाज बनीं सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट अर्चना सिंह; जिला जज को पत्र के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण हरकत में

रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
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गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय, सूरजपुर परिसर और उसके आसपास बारिश के मौसम में लगातार उत्पन्न होने वाले जलभराव, कीचड़, फिसलन और असुरक्षित आवागमन की समस्या को लेकर सोशल एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता अर्चना सिंह (रुस्तमपुर) ने एक बार फिर जनहित से जुड़ा मुद्दा मजबूती से उठाया है। जिला न्यायालय में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाली अर्चना सिंह ने अधिवक्ताओं, वादकारियों, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों की परेशानी को देखते हुए पहले जनपद एवं सत्र न्यायाधीश, गौतमबुद्ध नगर के समक्ष विस्तृत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया और इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भी पत्र भेजकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।

मामले में महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न्यायालय परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में जलभराव एवं आवागमन की स्थिति का स्थलीय जायजा लिया।

बारिश आते ही मुश्किल बन जाता है कचहरी तक पहुंचना

जिला न्यायालय, सूरजपुर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिवक्ता, वादकारी, न्यायालय कर्मचारी और अन्य नागरिक पहुंचते हैं। लेकिन प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान परिसर के अंदर, मुख्य प्रवेश एवं निकास मार्गों तथा आसपास के रास्तों पर पानी जमा होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जलभराव के साथ कीचड़ और फिसलन की स्थिति लोगों के लिए दुर्घटना का कारण भी बन सकती है। कई स्थानों पर पर्याप्त सूखा और समतल रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरी में गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।

अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जलभराव वाले स्थानों पर जहरीले अथवा हानिकारक जीव-जंतुओं के आने की आशंका भी बनी रहती है।

सिर्फ पानी निकालना नहीं, स्थायी समाधान की मांग

अर्चना सिंह द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र में समस्या का केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।

प्रार्थना-पत्र में न्यायालय परिसर और उसके बाहर स्थलीय निरीक्षण, जल निकासी के लिए नालियों की सफाई एवं मरम्मत, आवश्यकतानुसार नई ड्रेनेज व्यवस्था, खराब एवं गड्ढायुक्त रास्तों पर भराव और समतलीकरण तथा जलभराव एवं फिसलन वाले स्थानों पर एंटी-स्किड/नॉन-स्लिप या इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाए जाने का सुझाव दिया गया है।

साथ ही स्थायी व्यवस्था होने तक लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए अस्थायी पैदल मार्ग और पानी निकासी के लिए पंप एवं मोटर की व्यवस्था किए जाने की मांग भी की गई है।

जिला जज को पत्र, फिर प्राधिकरण तक पहुंचा मामला

अधिवक्ताओं की ओर से यह मुद्दा 3 अगस्त 2026 को जनपद एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष उठाया गया था। इसके बाद जिला न्यायालय की ओर से पत्रांक 3569/XV/डी.जे. जीबी नगर/नजारत, दिनांक 12 अगस्त 2026 के माध्यम से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया।

इसके बाद अधिवक्ताओं ने प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भी पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि हर वर्ष बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्या का समाधान केवल अस्थायी रूप से पानी निकलवाने से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए प्रभावी जल निकासी और सड़क सुधार की स्थायी व्यवस्था आवश्यक है।

प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचे

मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीनियर मैनेजर राजेश निम समेत संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जिला न्यायालय परिसर और आसपास के उन स्थानों का निरीक्षण किया, जहां बारिश के दौरान जलभराव, कीचड़ और फिसलन की समस्या उत्पन्न होती है।

अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से अधिवक्ताओं और वादकारियों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का अब स्थायी समाधान निकलेगा।

पहले भी जनहित के मुद्दों को लेकर बुलंद कर चुकी हैं आवाज

सोशल एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता अर्चना सिंह इससे पहले भी क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे प्रशासन और विकास प्राधिकरणों के समक्ष उठा चुकी हैं।

ग्रेटर नोएडा से जेवर की ओर जाने वाली 60 मीटर यमुना सिटी रोड की खराब स्थिति और गहरे गड्ढों को लेकर भी उन्होंने आवाज उठाई थी। लगातार मुद्दा उठाए जाने के बाद संबंधित प्राधिकरण द्वारा सड़क को गड्ढामुक्त कराया गया।

इसके अलावा रुस्तमपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के तालाब की साफ-सफाई तथा श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण जैसे स्थानीय जनहित के मुद्दों को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद इन सुविधाओं को लेकर संबंधित स्तर पर कार्रवाई हुई।

बुनियादी सुविधाएं मांगना अधिकार है, एहसान नहीं”

अर्चना सिंह का कहना है कि न्यायालय परिसर जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित और सम्मानजनक आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए। अधिवक्ता, वादकारी, कर्मचारी, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन किसी भी मौसम में असुरक्षित रास्तों से गुजरने के लिए मजबूर न हों, यह प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।

उनका कहना है कि बारिश हर वर्ष आती है, इसलिए जलभराव की समस्या का समाधान भी हर वर्ष अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि स्थायी रूप से किया जाना चाहिए।

अब निगाहें स्थायी कार्रवाई पर

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने के बाद अब अधिवक्ताओं और वादकारियों की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर है। यदि जल निकासी, समतलीकरण, सड़क सुधार और एंटी-स्किड टाइल्स जैसी व्यवस्थाएं धरातल पर लागू होती हैं, तो इससे न केवल बारिश के दिनों में होने वाली परेशानी कम होगी, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

एक अधिवक्ता की पहल से शुरू हुआ यह मुद्दा अब प्रशासन और प्राधिकरण के संज्ञान में पहुंच चुका है। ऐसे में देखना होगा कि निरीक्षण के बाद जिला न्यायालय परिसर और उसके आसपास जलभराव की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान कब तक धरातल पर उतरता है।


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