BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

दादरी-62 में कांग्रेस की टिकट की दौड़ में हेमचंद नागर ने ठोकी ताल, दो दशक से ज्यादा का संगठनात्मक अनुभव बना दावा

स्पेशल पॉलिटिकल स्टोरी:-- वैदपुरा की माटी से निकले किसान-मजदूर नेता की नजर 2027 पर, बोले—दादरी मेरी पहली पसंद, समीकरण बदले तो जेवर से भी आजमाएंगे किस्मत
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी विधानसभा-62
 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच गौतमबुद्ध नगर की राजनीति में भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। जिले की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों—नोएडा, दादरी और जेवर—पर राजनीतिक दलों के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। इसी क्रम में दादरी विधानसभा में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दीपक भाटी "चोटीवाला" समेत के लोगों के नाम चर्चा में है। फिलहाल बात करते हैं कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष और वर्तमान में सोशल मीडिया सेल के जिला अध्यक्ष हेमचंद नागर की।
 दादरी विधानसभा-62 से कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता और किसान-मजदूर मुद्दों से जुड़े नेता हेमचंद नागर ने अपनी दावेदारी खुलकर सामने रख दी है।
करीब ढाई दशक से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हेमचंद नागर का कहना है कि उन्होंने संगठन में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाई हैं और लगातार क्षेत्र के लोगों के बीच रहकर काम किया है। ऐसे में यदि पार्टी उन्हें दादरी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारती है तो वह संगठन और जनता के बीच अपने लंबे अनुभव के आधार पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
हालांकि 2027 के चुनाव में अभी अंतिम तस्वीर सामने आना बाकी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दादरी के साथ-साथ जेवर सीट को लेकर भी राजनीतिक दावेदारों की नजरें बनी हुई हैं।
वैदपुरा की माटी में पले-बढ़े हेमचंद नागर
हेमचंद नागर का जन्म 7 जुलाई 1980 को गौतमबुद्ध नगर के ग्राम वैदपुरा में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री बाबूलाल नागर थे। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े हेमचंद नागर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय स्तर से की और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी जगह बनाई।
वैदपुरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में किसान, मजदूर, जमीन, रोजगार तथा ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे लंबे समय से स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। हेमचंद नागर की राजनीति में भी इन मुद्दों की प्रमुख भूमिका रही है।
उनकी राजनीतिक सक्रियता को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं माना जाता। संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने किसान और मजदूर संगठनों के माध्यम से भी विभिन्न मुद्दों को उठाने का प्रयास किया है।
2000 से शुरू हुआ कांग्रेस का सफर
हेमचंद नागर का कांग्रेस से संगठनात्मक जुड़ाव करीब दो दशक से अधिक पुराना है। वर्ष 2000 में उन्होंने ब्लॉक कांग्रेस के उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद वर्ष 2002 में उन्हें दादरी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करने के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाई।
वर्ष 2004 में जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गए। संगठन में सक्रिय भूमिका के चलते वर्ष 2007 में जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री की जिम्मेदारी मिली।
इसके बाद वर्ष 2010 में जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बने। संगठन में अलग-अलग पदों पर काम करने के बाद उन्होंने जिला कांग्रेस पार्टी, गौतमबुद्ध नगर के कोषाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।
यानी उनकी राजनीतिक यात्रा सीधे चुनावी राजनीति से शुरू नहीं हुई, बल्कि ब्लॉक स्तर से लेकर जिला संगठन तक विभिन्न जिम्मेदारियों के बीच आगे बढ़ी है।
सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी
बदलते राजनीतिक दौर में सोशल मीडिया चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हथियार बन चुका है। इसी को देखते हुए हेमचंद नागर को वर्तमान में कांग्रेस सोशल मीडिया, गौतमबुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है।
सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों और स्थानीय मुद्दों को जनता तक पहुंचाना आज राजनीतिक संगठनों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की चुनौती भी उनके सामने रहेगी।
किसान और मजदूर राजनीति से भी गहरा जुड़ाव
हेमचंद नागर की राजनीतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका किसान और मजदूर संगठनों से जुड़ाव भी है।
वह भारतीय किसान यूनियन कृषक शक्ति के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं राजस्थान-हरियाणा प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह वर्तमान में भारतीय किसान जवान मजदूर विकास संगठन के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान-हरियाणा प्रभारी के रूप में भी जुड़े हुए हैं।
औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मजदूरों के मुद्दों को लेकर वे हौंडा मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वैदपुरा ग्रामीण संघर्ष समिति के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने काम किया है।
उनकी दावेदारी का एक आधार यही किसान-मजदूर और ग्रामीण पृष्ठभूमि भी है। दादरी विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण आबादी के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्र भी हैं। ऐसे में किसान और मजदूर दोनों वर्गों से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दादरी विधानसभा पर पहली नजर
हेमचंद नागर ने अपनी राजनीतिक प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा है कि दादरी विधानसभा उनकी पहली पसंद है।
उनकी दावेदारी ऐसे समय सामने आई है जब दादरी विधानसभा क्षेत्र में 2027 को लेकर संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है।
दादरी विधानसभा का राजनीतिक महत्व गौतमबुद्ध नगर जिले में काफी अधिक है। यह क्षेत्र एक तरफ तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में गांव और किसान परिवार भी इसकी राजनीतिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यही कारण है कि यहां चुनावी मुकाबला केवल शहरी बनाम ग्रामीण मुद्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसान, युवा, रोजगार, विकास, जमीन, औद्योगिक क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे कई मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बनते हैं।
हेमचंद नागर का दावा है कि लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण वह इन स्थानीय मुद्दों को नजदीक से समझते हैं।
सपा-कांग्रेस सीट बंटवारा बनेगा बड़ा फैक्टर
दादरी विधानसभा से हेमचंद नागर की दावेदारी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल विपक्षी गठबंधन के सीट बंटवारे का भी है।
गौतमबुद्ध नगर जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं—
नोएडा विधानसभा
दादरी विधानसभा
जेवर विधानसभा
यदि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा होता है, तो जिले की तीनों सीटों में किस सीट पर कौन सा दल चुनाव लड़ेगा, यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।
यही वजह है कि कांग्रेस के संभावित दावेदारों की नजर पार्टी हाईकमान के साथ-साथ गठबंधन के राजनीतिक समीकरणों पर भी है।
हेमचंद नागर ने भी अपनी रणनीति को लेकर संकेत दिया है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता दादरी विधानसभा है।
लेकिन यदि गठबंधन के समीकरणों में दादरी सीट समाजवादी पार्टी के खाते में चली जाती है और जेवर विधानसभा सीट कांग्रेस के हिस्से में आती है, तो वह जेवर से भी कांग्रेस टिकट की दावेदारी पेश करने के लिए तैयार हैं।
इस बयान से यह भी स्पष्ट है कि वह अपनी दावेदारी को किसी एक सीट तक सीमित रखने के बजाय पार्टी के अंतिम निर्णय और गठबंधन के समीकरणों के अनुसार राजनीतिक विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
दादरी में कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
दादरी विधानसभा में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगी।
कांग्रेस लंबे समय से जिले की राजनीति में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 2027 का चुनाव पार्टी के लिए संगठनात्मक पुनर्गठन और जमीनी सक्रियता को परखने का अवसर भी होगा।
हेमचंद नागर के पास संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है। ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न पदों पर काम करने के कारण पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की उन्हें जानकारी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह अपने व्यक्तिगत राजनीतिक संपर्कों और संगठनात्मक अनुभव को किस तरह विधानसभा स्तर की चुनावी रणनीति में बदलते हैं।
किसान, युवा और मजदूर बन सकते हैं चुनावी मुद्दे
दादरी विधानसभा की बदलती जनसांख्यिकी और तेजी से हो रहे विकास के बीच यहां कई ऐसे मुद्दे हैं जो आने वाले विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
किसानों के मुद्दे
जमीन, मुआवजा, विकास परियोजनाओं से जुड़े सवाल और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रहे हैं।
युवाओं के मुद्दे
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं।
मजदूरों के मुद्दे
ग्रेटर नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार रहते हैं। मजदूरों की सुविधाएं, वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकते हैं।
ग्रामीण विकास
सड़क, नाली, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और गांवों के विकास से जुड़े मुद्दे भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हेमचंद नागर की राजनीतिक पृष्ठभूमि इन सभी वर्गों से जुड़ी हुई दिखाई देती है। यही उनके टिकट दावे का एक प्रमुख आधार बन सकता है।
दादरी में मुकाबला आसान नहीं होगा
हालांकि कांग्रेस से दावेदारी पेश करना और पार्टी का टिकट हासिल करना दो अलग-अलग राजनीतिक चरण हैं।
दादरी विधानसभा में भाजपा का मजबूत संगठनात्मक आधार है और पार्टी लगातार क्षेत्र में सक्रिय है। ऐसे में कांग्रेस को यहां चुनावी मुकाबले में मजबूती से उतरने के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना होगा।
यदि विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है तो वोटों के बंटवारे को रोकना भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती होगी।
ऐसे में कांग्रेस का उम्मीदवार केवल पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर नहीं रह सकता। उसे किसान, युवा, मजदूर, व्यापारी, ग्रामीण और नए शहरी मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी।
क्या संगठनात्मक अनुभव बनेगा टिकट का आधार?
हेमचंद नागर की दावेदारी का सबसे मजबूत पक्ष उनका लंबा राजनीतिक अनुभव है।
वर्ष 2000 से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहने वाले हेमचंद नागर ने करीब 25 वर्षों के राजनीतिक सफर में ब्लॉक और जिला संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं।
कांग्रेस में टिकट वितरण के दौरान संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं के अनुभव, स्थानीय जनाधार, चुनावी क्षमता, सामाजिक समीकरण और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाता है।
ऐसे में हेमचंद नागर की कोशिश होगी कि अपने संगठनात्मक अनुभव को पार्टी नेतृत्व के सामने मजबूत दावे के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
जेवर का विकल्प भी खुला
राजनीतिक परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। यही कारण है कि हेमचंद नागर ने दादरी के साथ जेवर का विकल्प भी खुला रखा है।
उनका कहना है कि यदि दादरी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के खाते में जाती है और जेवर कांग्रेस के हिस्से में आती है, तो वह जेवर से भी टिकट की दावेदारी पेश कर सकते हैं।
जेवर विधानसभा क्षेत्र भी 2027 में बेहद महत्वपूर्ण सीट रहने वाला है। क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास, जेवर एयरपोर्ट, औद्योगिक परियोजनाओं और उससे जुड़े रोजगार एवं विस्थापन जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे में यदि कांग्रेस जेवर से चुनाव लड़ती है तो वहां भी संभावित दावेदारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
हेमचंद नागर के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां
राजनीतिक तौर पर देखें तो हेमचंद नागर की दावेदारी के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होंगी।
पहली चुनौती—कांग्रेस का टिकट हासिल करना।
पार्टी में अन्य संभावित दावेदार भी अपनी राजनीतिक सक्रियता के आधार पर टिकट मांग सकते हैं।
दूसरी चुनौती—गठबंधन का सीट बंटवारा।
यदि कांग्रेस और सपा के बीच सीटों का समझौता होता है तो दादरी और जेवर में से किस सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी, यह अहम होगा।
तीसरी चुनौती—जमीनी संगठन को चुनावी ताकत में बदलना।
लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद विधानसभा चुनाव में व्यक्तिगत जनसंपर्क, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता निर्णायक साबित होती है।
दावेदारी से चुनावी मैदान तक कितना लंबा सफर?
फिलहाल हेमचंद नागर ने दादरी विधानसभा से अपनी दावेदारी सार्वजनिक कर दी है। लेकिन विधानसभा चुनाव में टिकट का अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है।
आने वाले समय में पार्टी के सर्वे, स्थानीय संगठन की रिपोर्ट, संभावित गठबंधन और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
यदि कांग्रेस दादरी से चुनाव लड़ती है और हेमचंद नागर को टिकट मिलता है, तो उनके सामने लंबे समय से सत्ता में मजबूत पकड़ रखने वाली राजनीतिक ताकत के खिलाफ सीधा मुकाबला होगा।
वहीं यदि दादरी सीट सपा के खाते में जाती है और जेवर कांग्रेस के हिस्से में आता है, तो हेमचंद नागर की नजर जेवर पर जा सकती है।
अब निगाह कांग्रेस हाईकमान पर
कुल मिलाकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गौतमबुद्ध नगर में राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। दावेदार अपने-अपने राजनीतिक अनुभव, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर पार्टी नेतृत्व के सामने अपना दावा मजबूत करने में जुटे हैं।
हेमचंद नागर ने भी अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है—दादरी उनकी पहली पसंद है और परिस्थितियों के अनुसार जेवर विकल्प हो सकता है।
करीब ढाई दशक का कांग्रेस संगठनात्मक अनुभव, किसान और मजदूर संगठनों से जुड़ाव तथा ग्रामीण क्षेत्र में सक्रियता उनके दावे के प्रमुख आधार हैं।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व दादरी विधानसभा-62 में हेमचंद नागर के लंबे राजनीतिक अनुभव पर भरोसा जताएगा?
या फिर गठबंधन के सीट बंटवारे में दादरी की सीट समाजवादी पार्टी के खाते में चली जाएगी?
और यदि ऐसा हुआ तो क्या जेवर विधानसभा से हेमचंद नागर कांग्रेस का चेहरा बनने के लिए आगे आएंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में कांग्रेस की रणनीति और विपक्षी गठबंधन के सीट बंटवारे के साथ सामने आएंगे।
फिलहाल इतना जरूर है कि दादरी विधानसभा-62 की चुनावी दौड़ में हेमचंद नागर ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है और 2027 की सियासी पिच पर अपनी दावेदारी का पहला बड़ा संकेत दे दिया है।


.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }