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माउंट यूनाम की 6,111 मीटर ऊंची चोटी पर लहराया तिरंगा और PDA का परचम


माउंट एवरेस्ट विजेता सागर कसाना के नेतृत्व में टीम ने रचा नया कीर्तिमान, पिता अजब सिंह कसाना की आंखों में छलका गर्व—“बेटे ने भारत मां का नाम रोशन कर दिया”
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
लाहौल-स्पीति | ग्रेटर नोएडा /15 अगस्त 2026 | विशेष रिपोर्ट — विजन लाइव न्यूज
देश जब 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगे की आन, बान और शान का उत्सव मना रहा था, उसी ऐतिहासिक दिन हिमालय की ऊंचाइयों पर भी भारत का तिरंगा एक नई गौरवगाथा लिख रहा था।
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में स्थित 6,111 मीटर ऊंचे माउंट यूनाम के शिखर पर जब माउंट एवरेस्ट विजेता सागर कसाना के नेतृत्व में पर्वतारोहियों की टीम ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ PDA का परचम फहराया, तो यह सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान की सफलता नहीं रही, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के युवाओं के साहस, संकल्प और सामर्थ्य का प्रतीक बन गई।
विपुल, हर्ष यादव और साहिल के साथ सागर कसाना ने कठिन परिस्थितियों के बीच माउंट यूनाम के शिखर तक पहुंचकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
सुबह करीब 6:40 बजे, लगभग सात घंटे के कठिन Summit Push के बाद जब टीम 6,111 मीटर की ऊंचाई पर पहुंची और वहां तिरंगा फहराया गया, तो उस पल की कल्पना उन परिवारों के लिए भी भावुक कर देने वाली थी, जिनके बेटे हजारों फीट की ऊंचाई पर देश का गौरव बढ़ा रहे थे।
इन्हीं गौरवान्वित परिवारों में शामिल हैं सागर कसाना के पिता अजब सिंह कसाना, जो वर्तमान में ग्रेटर नोएडा की एक सोसाइटी में रह रहे हैं।
बेटे ने भारत मां का नाम रोशन कर दिया”—पिता अजब सिंह कसाना
विजन लाइव न्यूज से खास बातचीत में सागर कसाना के पिता अजब सिंह कसाना ने अपने बेटे की उपलब्धि पर गर्व और खुशी व्यक्त की।
बेटे की सफलता का जिक्र करते हुए उनके चेहरे पर गर्व साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सागर ने जिस ऊंचाई को हासिल किया है, वह केवल परिवार के लिए खुशी का अवसर नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है।
उन्होंने कहा कि बेटे ने एक नया कीर्तिमान हासिल किया है और भारत मां का नाम रोशन किया है। स्वतंत्रता दिवस के दिन देश का तिरंगा माउंट यूनाम की 6,111 मीटर ऊंची चोटी पर फहराना पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है।
अजब सिंह कसाना ने कहा कि सागर की इस उपलब्धि से पूरा परिवार बेहद खुश है। परिवार के लिए यह क्षण लंबे समय तक यादगार रहेगा।
उन्होंने बताया कि परिवार लगातार सागर के अभियान और उसकी सफलता को लेकर उत्सुक था। कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के बावजूद सागर और उनकी टीम ने जिस तरह लक्ष्य हासिल किया, उससे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सागर जल्द ही ग्रेटर नोएडा लौटेगा, और परिवार बेसब्री से उसके वापस आने का इंतजार कर रहा है।
पिता के लिए यह सिर्फ बेटे के घर लौटने का इंतजार नहीं है, बल्कि उस बेटे को गले लगाने की प्रतीक्षा है, जिसने देश के तिरंगे को हिमालय की एक और ऊंचाई तक पहुंचाया है।
एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व क्या होगा?
सागर कसाना की सफलता को केवल आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता।
6,111 मीटर की ऊंचाई, करीब सात घंटे का Summit Push, रात 11:30 बजे शुरू हुआ अंतिम अभियान, कम ऑक्सीजन, जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं और कई स्थानों पर 75 डिग्री तक की खड़ी चढ़ाई।
इन तमाम परिस्थितियों के बीच एक बेटा जब देश का तिरंगा लेकर शिखर पर पहुंचता है, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी व्यक्तिगत मेहनत नहीं होती।
उसके पीछे परिवार का विश्वास, माता-पिता का आशीर्वाद, वर्षों का अभ्यास और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की मानसिक शक्ति भी होती है।
शायद यही वजह है कि सागर की सफलता पर उनके पिता अजब सिंह कसाना की खुशी केवल एक उपलब्धि की खुशी नहीं, बल्कि एक पिता के सपने के साकार होने की खुशी है।
8 अगस्त से शुरू हुआ था ऐतिहासिक सफर
‘PDA शिखर अभियान 2026’ की शुरुआत 8 अगस्त को हुई थी
माउंट एवरेस्ट विजेता सागर कसाना के नेतृत्व में टीम ने चरणबद्ध तरीके से ऊंचाई हासिल की। जैसे-जैसे टीम आगे बढ़ी, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां कठिन होती गईं।
ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और शारीरिक थकान चुनौती बनती गई। लेकिन टीम ने संयम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना जारी रखा।
अभियान का सबसे कठिन चरण 14 अगस्त की रात शुरू हुआ।
लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित Summit Camp से रात 11:30 बजे अंतिम Summit Push शुरू किया गया।
उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या की तैयारियों में व्यस्त थे, लेकिन हिमालय की ऊंचाइयों पर चार पर्वतारोही भारत के तिरंगे को एक नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए आगे बढ़ रहे थे।
सात घंटे बाद आया वह ऐतिहासिक क्षण
रात के अंधेरे में शुरू हुआ संघर्ष सुबह की पहली किरणों के साथ सफलता में बदल गया।
करीब सात घंटे तक लगातार कठिन चढ़ाई करने के बाद टीम सुबह 6:40 बजे माउंट यूनाम की 6,111 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंची।
शिखर पर पहुंचते ही राष्ट्रीय ध्वज और PDA का परचम फहराया गया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिमालय की चोटी पर लहराता तिरंगा इस अभियान का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था।
यह दृश्य उन सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक था, जो मानते हैं कि देशभक्ति केवल शब्दों और नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्म, साहस और उपलब्धियों के माध्यम से भी राष्ट्र के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सकता है।
बीमारी और दर्द भी नहीं रोक पाए कदम
माउंट यूनाम की चढ़ाई आसान नहीं थी।
अभियान के दौरान चारों पर्वतारोहियों को AMS (Acute Mountain Sickness) सहित सिरदर्द, बुखार, उल्टी और भोजन न पचने जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ा।
लेकिन टीम ने परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके।
कई दिनों तक कठिन उच्च हिमालयी परिस्थितियों में रहने के बाद भी पर्वतारोहियों ने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
अभियान के अंतिम हिस्से में कई स्थानों पर लगभग 75 डिग्री तक की खड़ी चढ़ाई ने चुनौती को और कठिन बना दिया।
इसके बावजूद सागर कसाना और उनकी टीम आगे बढ़ती रही।
सागर कसाना: पर्वत से युवाओं के लिए संदेश
सागर कसाना ने अभियान की सफलता के बाद कहा कि यह सिर्फ पर्वतारोहण अभियान नहीं था।
उनके शब्दों में, जब हौसले बुलंद हों तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।
उन्होंने इस अभियान को देश के युवाओं और खिलाड़ियों के सपनों को नई ऊंचाई देने का संकल्प बताया।
सागर का यह संदेश माउंट यूनाम की चोटी से हजारों युवाओं तक पहुंचा कि सपने बड़े हों तो संघर्ष भी बड़ा करना पड़ता है और मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने कदम रोकते नहीं हैं।
PDA का परचम भी बना अभियान की पहचान
माउंट यूनाम की चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ PDA का परचम फहराना अभियान के उद्देश्य को भी स्पष्ट करता है।
PDA — Play • Develop • Achieve का मूल संदेश युवाओं और खिलाड़ियों को खेलों के प्रति प्रेरित करना, उनकी प्रतिभा को अवसर देना और उन्हें विकास तथा उपलब्धि की दिशा में आगे बढ़ाना है।
माउंट यूनाम की चोटी पर फहराया गया PDA का परचम इसी सोच का प्रतीक बना।
खेल के मैदान से लेकर हिमालय की चोटी तक—हर क्षेत्र में मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति सफलता का रास्ता खोल सकती है।
पिता की खुशी से लेकर बेटे की वापसी तक
ग्रेटर नोएडा में बैठे सागर कसाना के पिता अजब सिंह कसाना के लिए 15 अगस्त का यह दिन शायद वर्षों तक याद रहेगा।
एक ओर देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं दूसरी ओर उनका बेटा हजारों किलोमीटर दूर हिमालय की चोटी पर तिरंगा फहरा रहा था।
पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण शायद ही कुछ और हो कि उनका बेटा अपने व्यक्तिगत लक्ष्य को राष्ट्र के गौरव से जोड़कर पूरा करे।
अब परिवार को इंतजार है सागर के ग्रेटर नोएडा लौटने का।
वह जब वापस आएगा तो सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान पूरा करके नहीं लौटेगा, बल्कि अपने साथ एक ऐसी कहानी लेकर लौटेगा जिसे परिवार, मित्र और क्षेत्र लंबे समय तक गर्व के साथ याद करेंगे।
एक ऐसी कहानी जिसमें एक बेटे का जुनून है, माता-पिता का विश्वास है, टीम का संघर्ष है, हिमालय की चुनौती है और सबसे ऊपर भारत के तिरंगे का गौरव है।
स्वतंत्रता दिवस पर हिमालय से देश को संदेश
माउंट यूनाम की 6,111 मीटर ऊंची चोटी से फहराया गया तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं था।
वह भारत के उस युवा सामर्थ्य का प्रतीक था, जो चुनौतियों को अवसर में बदलने का माद्दा रखता है।
वह संदेश था कि भारत का युवा यदि लक्ष्य निर्धारित कर ले, तो ऊंचाई चाहे 6,111 मीटर की हो या उससे भी अधिक—वह वहां तक पहुंचने का साहस रखता है।
और शायद यही इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
सागर कसाना और उनकी टीम ने माउंट यूनाम की चोटी पर केवल तिरंगा नहीं फहराया, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के दिन देश के करोड़ों युवाओं के सामने एक सवाल भी रखा—
“जब हमारे भीतर संकल्प और साहस हो, तो ऐसा कौन-सा शिखर है जिसे हम हासिल नहीं कर सकते?”
माउंट यूनाम की बर्फीली चोटी पर लहराता तिरंगा आज इसी विश्वास का प्रतीक है।
भारत का तिरंगा ऊंचाइयों पर था, PDA का परचम उसके साथ था और एक पिता का सीना गर्व से चौड़ा था।
विजन लाइव न्यूज से विशेष प्रस्तुति
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