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Special Story | मानसून में बढ़ा वायरल संक्रमण का खतरा: रोजाना 30–40 मरीज पहुंच रहे अस्पताल, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ नोएडा (गौतमबुद्धनगर)
 मानसून की बारिश जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं बदलते मौसम ने वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी भी कर दी है। लगातार बारिश, हवा में बढ़ी नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और जलभराव जैसी परिस्थितियां वायरस के फैलाव के लिए अनुकूल माहौल बना रही हैं। इसका असर अब अस्पतालों की ओपीडी में साफ दिखाई देने लगा है, जहां वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं तथा मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं। इन वर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण संक्रमण जल्दी फैलता है और कई मामलों में जटिलताएं भी बढ़ सकती हैं।
20 से 30 प्रतिशत तक बढ़े वायरल संक्रमण के मामले
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-110, नोएडा के एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. प्रखर गर्ग ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में वायरल संक्रमण के मामलों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 मरीज वायरल संक्रमण के लक्षणों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक शिकायत तेज बुखार, सर्दी, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, बदन दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी की होती है।
डॉ. गर्ग के अनुसार, मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव के कारण शरीर को वातावरण के अनुरूप ढलने में समय लगता है। इसी दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने पर वायरस आसानी से शरीर को संक्रमित कर देते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती, जबकि बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। यही कारण है कि वायरल संक्रमण इन दोनों वर्गों को सबसे पहले प्रभावित करता है।
यदि पहले से किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी, फेफड़ों या हृदय संबंधी बीमारी है, तो वायरल संक्रमण उसके लिए अधिक गंभीर साबित हो सकता है।
ये हैं वायरल संक्रमण के सामान्य लक्षण
इस मौसम में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो सावधानी बरतनी चाहिए—
तेज या लगातार बुखार
सर्दी-जुकाम और नाक बहना
सूखी या बलगम वाली खांसी
गले में दर्द या खराश
सिरदर्द
शरीर और जोड़ों में दर्द
अत्यधिक कमजोरी और थकान
भूख कम लगना
कुछ मामलों में उल्टी या दस्त
बारिश के मौसम में क्यों बढ़ता है संक्रमण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे कई प्रकार के वायरस लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। वहीं जलभराव, गंदा पानी, दूषित भोजन, बंद कमरों में अधिक समय बिताना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संपर्क बढ़ना संक्रमण फैलने के प्रमुख कारण बनते हैं।
कैसे करें बचाव?
डॉ. प्रखर गर्ग का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर वायरल संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि—
पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिएं।
ताजा और पौष्टिक भोजन करें।
बाहर का खुला या बासी भोजन खाने से बचें।
हाथों को साबुन से बार-बार धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें।
बारिश में भीगने से बचें और भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवश्यकता अनुसार मास्क पहनें।
पर्याप्त नींद लें और शरीर को आराम दें।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें
डॉ. गर्ग ने स्पष्ट किया कि अधिकांश वायरल संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं और इनमें एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Antibiotic Resistance) बढ़ सकती है, जो भविष्य में गंभीर समस्या बन सकती है।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
यदि—
बुखार दो से तीन दिन से अधिक बना रहे,
सांस लेने में तकलीफ हो,
ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगे,
लगातार उल्टी या दस्त हो,
अत्यधिक कमजोरी महसूस हो,
छोटे बच्चों या बुजुर्गों की स्थिति बिगड़ने लगे,
तो बिना देर किए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। समय पर जांच, उचित इलाज और चिकित्सकीय सलाह का पालन करके अधिकांश मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं।
बदलते मौसम में व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और सतर्कता ही वायरल संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की सलाह का पालन कर लोग स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रख सकते हैं।


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