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श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में NEP-2020 की छठवीं वर्षगांठ पर जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम, गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा का संदेश


      मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की छठवीं वर्षगांठ एवं गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में बुधवार को NEP-2020 जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों, प्रावधानों एवं भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के मूल्यों के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के दिशा-निर्देशन में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं गुरु परंपरा के प्रतीक गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

इस अवसर पर महाविद्यालय के कला, विज्ञान, वाणिज्य, बीबीए, बीसीए एवं शिक्षक-शिक्षा विभागों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी ज्ञान क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं से विद्यार्थियों को परिचित कराना और उनकी समझ को मजबूत करना था।

इसके बाद महाविद्यालय के एकलव्य सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उप-प्राचार्या एवं IQAC समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने वाली परिवर्तनकारी नीति है। उन्होंने विद्यार्थियों से नई शिक्षा नीति के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

गुरु पूर्णिमा के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों का मार्गदर्शक माना गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों के प्रति सम्मान, अनुशासन, कृतज्ञता और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कला विभागाध्यक्ष डॉ. देवानन्द सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. निशा शर्मा, डॉ. राजीव (पिंटू),  अमित नागर, डॉ. अजमत आरा एवं डॉ. सूर्य प्रताप राघव सहित कई शिक्षकों ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति और गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर डॉ. प्रीति रानी सैन, श्रीमती शशी नागर, डॉ. रश्मि जहाँ, श्री इन्द्रजीत सिंह, डॉ. कोकिल, डॉ. नाज़ परवीन, डॉ. संगीता रावल, श्रीमती प्रीति शर्मा, डॉ. ज्योति प्रसाद यादव, डॉ. रेशा, श्री महीपाल सिंह, कु. चारू सिंह, कु. काजल कपासिया, श्री अखिल कुमार, श्रीमती हनी शर्मा, कु. रुचि शर्मा सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को व्यवहार में उतारते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, नवाचार और नैतिक मूल्यों से समृद्ध बनाया जाएगा तथा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाएगा। यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।

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