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आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के नवाचार इकोसिस्टम को मिली नई मजबूती, ICAR–CIRCOT के साथ रणनीतिक साझेदारी से एग्रीटेक स्टार्टअप्स को मिलेगा राष्ट्रीय मंच


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
उत्तर प्रदेश के अग्रणी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा ने नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान के इन्क्यूबेशन सेंटर नवरचना फाउंडेशन फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (NFED) ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिष्ठित संस्थान सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कॉटन टेक्नोलॉजी (CIRCOT), मुंबई के अंतर्गत संचालित एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर (ABIC) के साथ एक रणनीतिक सहयोग स्थापित किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीक आधारित उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
यह सहयोग विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स तथा कृषि आधारित उद्यमियों को फार्म मैकेनाइजेशन (कृषि यंत्रीकरण) और पोस्ट-हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी (कटाई के बाद की तकनीक) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी सहायता, इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप, उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन तथा व्यवसाय विकास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार आधारित तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा और शोध को व्यावसायिक उत्पादों एवं सेवाओं में बदलने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
'क्षितिज 2.0' से देशभर के नवप्रवर्तकों को मिलेगा मंच
इस रणनीतिक सहयोग के तहत दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से "क्षितिज 2.0" नामक दो माह का वर्चुअल इन्क्यूबेशन कार्यक्रम भी शुरू किया है। यह कार्यक्रम भारत के विभिन्न राज्यों से जुड़े विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए खुला है।
कार्यक्रम के अंतर्गत आइडिया स्टेज, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC), प्रोटोटाइप तथा मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) स्तर पर कार्य कर रही परियोजनाओं को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, तकनीकी परामर्श, व्यावसायिक रणनीति, नेटवर्किंग और निवेश के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को अपने विचारों को व्यवहारिक और व्यावसायिक मॉडल में विकसित करने में सहायता मिलेगी।
अनुसंधान को उद्योग से जोड़ने की पहल
आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज और ICAR–CIRCOT के बीच हुआ यह सहयोग केवल एक संस्थागत समझौता नहीं, बल्कि अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता के बीच मजबूत सेतु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दोनों संस्थानों का साझा उद्देश्य प्रयोगशालाओं में विकसित शोध और तकनीकों को समाज एवं उद्योग के उपयोग के लिए व्यावसायिक रूप देना है।
यह साझेदारी देश में एग्रीटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 जैसी राष्ट्रीय पहलों को भी गति प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क का होगा विस्तार
इस सहयोग के माध्यम से आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज अपने राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। संस्थान अब कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे विद्यार्थियों और स्टार्टअप्स को नवीन तकनीकों के विकास, परीक्षण और व्यवसायीकरण के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
संस्थान प्रबंधन ने जताई खुशी
संस्थान के निदेशक डॉ. मयंक गर्ग तथा इन्क्यूबेशन प्रमुख श्री सुधांशु रंजन ने इस रणनीतिक साझेदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में संस्थान के प्रयासों को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और नवप्रवर्तकों को ऐसा इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है, जहां उनके विचार सफल स्टार्टअप्स और प्रभावशाली उद्यमों का रूप ले सकें।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ICAR–CIRCOT के साथ यह साझेदारी कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित नवाचारों को बढ़ावा देगी, युवाओं को रोजगार सृजन के नए अवसर उपलब्ध कराएगी तथा भारत को कृषि नवाचार और एग्रीटेक उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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