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गुरु पूर्णिमा पर आर्या फैशन्स के लिए ऐतिहासिक दिन: EPCH के डायरेक्टर जनरल डॉ. राकेश कुमार ने किया निर्यात इकाई का दौरा



मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ग्रेटर नोएडा स्थित आर्या फैशन्स के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक और प्रेरणादायी साबित हुआ। देश के हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र में "आयरनमैन" के नाम से विख्यात डॉ. राकेश कुमार, जो एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH) के डायरेक्टर जनरल एवं चीफ मेंटर तथा इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट लिमिटेड (IEML) के चेयरमैन हैं, उन्होंने गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आर्या फैशन्स की निर्यात इकाई का दौरा किया। उनके आगमन से पूरे संस्थान में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
डॉ. राकेश कुमार का फैक्ट्री परिसर पहुंचने पर आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. खुशबू सिंह तथा पूरी टीम ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने उत्पादन इकाई का विस्तृत निरीक्षण किया और निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली, निर्यात मानकों, कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था तथा उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान डॉ. राकेश कुमार ने महिला कारीगरों, शिल्पकारों और कर्मचारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने उनके कार्य अनुभव, प्रशिक्षण, कौशल विकास और कार्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी लेते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भारत के हस्तशिल्प उद्योग की असली ताकत उसके कारीगर हैं, जिनकी मेहनत और रचनात्मकता भारतीय उत्पादों को विश्व बाजार में अलग पहचान दिलाती है।
उन्होंने आर्या फैशन्स की कार्य संस्कृति की विशेष सराहना करते हुए कहा कि संस्थान में गुणवत्ता, अनुशासन, समयबद्ध उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान देश के निर्यात क्षेत्र को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।
अपने संबोधन में डॉ. राकेश कुमार ने कहा,
"ये आपके हाथों का ही कमाल है। आपकी कला और हुनर की वजह से ही भारतीय हस्तशिल्प आज विश्व स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आर्या फैशन्स जैसी निर्यात इकाइयाँ इसी हुनर को गुणवत्ता के साथ दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचा रही हैं। भारत का हस्तशिल्प उद्योग लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है और इसमें महिला कारीगरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. खुशबू सिंह एक प्रथम पीढ़ी की महिला उद्यमी हैं, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम, दूरदर्शिता और समर्पण के बल पर आर्या फैशन्स को एक सफल निर्यात इकाई के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें तो वे किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।
इस अवसर पर आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे पावन पर्व पर डॉ. राकेश कुमार का संस्थान में आगमन उनके लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र के सबसे सम्मानित व्यक्तित्वों में शामिल डॉ. राकेश कुमार द्वारा आर्या फैशन्स के कार्यों की सराहना पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा,
"आज का दिन आर्या फैशन्स परिवार के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन है। डॉ. राकेश कुमार जी ने हमारी महिला कारीगरों, शिल्पकारों और कर्मचारियों का जिस प्रकार उत्साहवर्धन किया, उससे पूरे संस्थान को नई ऊर्जा और नई प्रेरणा मिली है। उनके मार्गदर्शन से हमें भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।"
डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि आर्या फैशन्स का उद्देश्य केवल हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात करना नहीं, बल्कि भारतीय कारीगरों की कला, संस्कृति और परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाना है। इसके साथ ही संस्थान महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कौशल विकास के माध्यम से सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राकेश कुमार ने कारीगरों के साथ समूह फोटो भी खिंचवाई और उन्हें गुणवत्ता, नवाचार तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप लगातार सीखते रहने का संदेश दिया। कारीगरों ने भी उनके अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त की और उन्हें अपने बीच पाकर प्रसन्नता व्यक्त की।
गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हुआ यह दौरा आर्या फैशन्स के लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्थान की उपलब्धियों, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। आर्या फैशन्स की पूरी टीम ने डॉ. राकेश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराया।
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