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श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में चंद्रशेखर आज़ाद एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
श्री द्रोणाचार्य स्नातकोत्तर (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में गुरुवार को महान क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आज़ाद तथा राष्ट्रवादी विचारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति के वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने दोनों महापुरुषों के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का जीवन देशभक्ति, त्याग, साहस और राष्ट्रसेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर डॉ. नाज़ परवीन ने दोनों महान विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी ओजस्वी प्रस्तुति के माध्यम से देशभक्ति की भावना को प्रबल करते हुए पंक्तियाँ— "जब कोई होता है नूरानी, वीर पैदा चमन दीदार" — प्रस्तुत कीं, जिसे उपस्थित छात्र-छात्राओं ने खूब सराहा।
इसके बाद डॉ. राजीव पांडे (पिंटू) ने चंद्रशेखर आज़ाद के क्रांतिकारी जीवन, उनके अदम्य साहस तथा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रवादी विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन दोनों महापुरुषों का जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
महाविद्यालय की उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि चंद्रशेखर तिवारी को न्यायालय में निर्भीक उत्तर देने के कारण "आज़ाद" नाम मिला, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के ऐतिहासिक उद्घोष "स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उनके प्रसिद्ध ग्रंथ "गीता रहस्य" की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों की देशभक्ति, त्याग और संघर्ष ने भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता की अलख जगाई, जिसने देश के आज़ादी आंदोलन को नई दिशा और गति प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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