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आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ, सतत भविष्य के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंट सिस्टम्स पर मंथन

पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय एफडीपी में देशभर के शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं उद्योग विशेषज्ञ ले रहे हिस्सा; क्वांटम कंप्यूटिंग और मैग्नेटिक मेमोरी जैसे उभरते क्षेत्रों पर हुई गहन चर्चा
विशेष स्टोरी | Vision Live News
रिपोर्ट:- मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"
ग्रेटर नोएडा। आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के मूलभूत अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विभाग (पूर्व में एप्लाइड साइंसेज़ एंड ह्यूमैनिटीज़ विभाग) द्वारा “ग्रीन टेक्नोलॉजीज़ एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स फॉर ए सस्टेनेबल फ्यूचर” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का ऑनलाइन माध्यम से भव्य शुभारंभ हुआ।
सतत विकास, हरित प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बुद्धिमान प्रणालियों से जुड़े उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित इस एफडीपी को शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच ज्ञान-विनिमय, शोध सहयोग और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
देशभर के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पी. सी. झा एवं डॉ. सचिन कुमार ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पांच दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। एफडीपी में देश के विभिन्न शिक्षण एवं शोध संस्थानों से जुड़े शिक्षाविद्, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान सतत विकास के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा दक्षता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत सामग्री, इंटेलिजेंट सिस्टम्स और अन्य नवीन तकनीकी क्षेत्रों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं विचार-विमर्श किया जा रहा है।
अंतर्विषयक अनुसंधान पर दिया गया विशेष जोर
उद्घाटन सत्र में आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रो. (डॉ.) मयंक गर्ग, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) विष्णु शर्मा तथा मूलभूत अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ओ. पी. चौधरी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट, संसाधनों के बढ़ते दबाव और तेजी से बदलती तकनीकी आवश्यकताओं जैसी अनेक वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान केवल किसी एक विषय तक सीमित रहकर संभव नहीं है, बल्कि अंतर्विषयक अनुसंधान और नवाचार-आधारित तकनीकों की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से एफडीपी को केवल व्याख्यानों तक सीमित न रखते हुए इसे ज्ञान-साझाकरण, शोध सहयोग, विचारों के आदान-प्रदान और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
क्वांटम कंप्यूटिंग पर विशेषज्ञ व्याख्यान
तकनीकी सत्रों की शुरुआत आईआईएलएम विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन डॉ. अमित अग्रवाल के व्याख्यान से हुई। उन्होंने “क्वांटम कंप्यूटिंग: एन इमर्जिंग पैराडाइम इन टेक्नोलॉजी” विषय पर विस्तार से जानकारी साझा की।
उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग की मूल अवधारणाओं को समझाते हुए बताया कि यह तकनीक भविष्य में पारंपरिक कंप्यूटिंग की सीमाओं को चुनौती देने की क्षमता रखती है। अपने व्याख्यान में उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ऑप्टिमाइजेशन और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञ व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों को इस तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी क्षेत्र के वर्तमान परिदृश्य और संभावित शोध दिशाओं की जानकारी मिली।
मैग्नेटिक मेमोरी की अगली पीढ़ी पर चर्चा
एफडीपी के दूसरे तकनीकी सत्र में आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज के मूलभूत अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमानी खंडूरी ने “मैग्नेटिक मेमोरी में परपेन्डिकुलर मैग्नेटिक एनीसोट्रॉपी का महत्व” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया।
उन्होंने अगली पीढ़ी की मैग्नेटिक मेमोरी तकनीकों में परपेन्डिकुलर मैग्नेटिक एनीसोट्रॉपी (PMA) की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उच्च भंडारण क्षमता, ऊर्जा दक्षता और उपकरणों की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं रखती है।
डॉ. खंडूरी ने इस क्षेत्र में चल रहे नवीनतम अनुसंधानों के साथ-साथ इसके संभावित औद्योगिक अनुप्रयोगों पर भी प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
संवादात्मक सत्र में शोध अवसरों पर मंथन
दोनों तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेषज्ञों के व्याख्यान के बाद आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने तकनीकी विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों और संभावित शोध अवसरों को लेकर विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की।
प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने सत्रों को और अधिक ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक बनाया। इस दौरान शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में नवीन तकनीकों को जोड़ने और भविष्य के शोध की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर मिला।
आने वाले सत्रों में विशेषज्ञों की श्रृंखला
आयोजकों के अनुसार, पांच दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय एफडीपी के आगामी सत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान देंगे। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत सामग्री, इंटेलिजेंट सिस्टम्स और सतत प्रौद्योगिकी जैसे समसामयिक एवं भविष्य-उन्मुख विषय प्रमुख रहेंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को बदलती तकनीकी दुनिया के साथ अपडेट करना, नवीनतम शोध प्रवृत्तियों से जोड़ना और सतत विकास के लिए तकनीकी समाधानों की दिशा में अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
सतत भविष्य की दिशा में अकादमिक पहल
आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज का यह एफडीपी ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब दुनिया भर में ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिस्टम्स को भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों द्वारा उभरती तकनीकों पर संवाद और शोध को बढ़ावा देना विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
यह पांच दिवसीय कार्यक्रम न केवल प्रतिभागियों को नई तकनीकों से परिचित कराने का प्रयास है, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से एक अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा में सामूहिक सोच विकसित करने की पहल भी है।


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