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बडी खबर:--- मोनिका नागर चर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपी अनुज चौहान की जमानत अर्जी खारिज

स्पेशल न्यूज़ रिपोर्ट:--मोनिका नागर चर्चित मौत प्रकरण: मुख्य आरोपी अनुज चौहान की जमानत अर्जी खारिज, अदालत ने मामले की गंभीरता को माना अहम

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर के चर्चित मोनिका नागर मौत प्रकरण में मुख्य आरोपी अनुज चौहान को जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, गौतमबुद्धनगर ने 15 जुलाई 2026 को पारित आदेश में आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, गवाहों के बयानों तथा मामले की प्रकृति और गंभीरता पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया।
क्या है मामला
अदालती आदेश के अनुसार थाना दादरी में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 202/2026 में अनुज चौहान सहित उसके परिवार के अन्य सदस्यों के विरुद्ध मोनिका नागर की मृत्यु से संबंधित गंभीर आरोप दर्ज हैं।
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता रेनू नागर ने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन उनकी बेटी मोनिका ने फोन कर बताया था कि उसके पति और ससुराल पक्ष के लोग उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि जब परिजन मौके पर पहुंचे तो उन्होंने मोनिका को मृत अवस्था में वाहन से ले जाते हुए देखा तथा बाद में उसके शव को जलाने का प्रयास किया गया। मामले में दहेज प्रताड़ना और विवाह के कुछ समय बाद हुई अप्राकृतिक मृत्यु से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं।
बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि अनुज चौहान और मोनिका की प्रेम विवाह (लव मैरिज) हुई थी। दहेज मांगने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा गया कि आरोपी ने मृतका और उसके परिवार की आर्थिक सहायता की थी। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मृतका का एक वीडियो उपलब्ध है, जिसमें वह कथित रूप से स्वयं अपनी इच्छा से आत्महत्या करने की बात कह रही है तथा आरोपी और उसके परिवार को जिम्मेदार नहीं ठहरा रही। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है।
अभियोजन पक्ष का विरोध
सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। अभियोजन के अनुसार, मृतका की मृत्यु विवाह के सात वर्ष के भीतर अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई है तथा केस डायरी, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध प्रथम दृष्टया गंभीर आरोपों की पुष्टि करते हैं।
अदालत ने क्या कहा
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामजद है। न्यायालय ने वादी के बयान, गवाहों के कथन, अभियोजन अभिलेख तथा मामले की गंभीरता पर विचार करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने के पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं हैं।
इन्हीं कारणों से अदालत ने अनुज चौहान की जमानत याचिका निरस्त कर दी।
वादी पक्ष के अधिवक्ता का बयान
वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजेंद्र भाटी ने बताया कि न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों, अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों, गवाहों के बयानों और मामले के तथ्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद जमानत याचिका को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार किया है। अधिवक्ता ने बताया कि अब मुकदमे की सुनवाई विधिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी और वादी पक्ष न्यायालय के समक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगा।
आगे क्या
जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब इस चर्चित मामले की सुनवाई जिला अदालत में विधिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी। अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य एवं तर्क प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय दिया जाएगा।
कानूनी अस्वीकरण
यह समाचार 15 जुलाई 2026 को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, गौतमबुद्धनगर द्वारा पारित जमानत आदेश पर आधारित है। जमानत आवेदन निरस्त किया जाना किसी भी आरोपी के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। किसी भी अभियुक्त की दोषसिद्धि अथवा निर्दोषता का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा मुकदमे की सुनवाई पूर्ण होने के बाद ही किया जाएगा। सभी पक्षों को भारतीय कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।


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