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आईआईएलएम विश्वविद्यालय की वार्षिक पुस्तक प्रदर्शनी बनी ज्ञान और अनुसंधान का महाकुंभ, शिक्षकों-शोधार्थियों को मिले नवीनतम शैक्षणिक संसाधन

स्पेशल स्टोरी | Vision Live News
अग्रणी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने प्रस्तुत किए नवीनतम प्रकाशन, पुस्तकालय संग्रह को और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"
Vision Live News | ग्रेटर नोएडा
 डिजिटल युग में जहां ज्ञान के स्रोत लगातार बदल रहे हैं, वहीं उच्च शिक्षा संस्थानों में पुस्तकालयों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसी सोच को साकार करते हुए आईआईएलएम विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के नॉलेज रिसोर्स सेंटर (KRC) द्वारा आयोजित "वार्षिक पुस्तक प्रदर्शनी–2026–27" ने शिक्षकों, शोधार्थियों और अकादमिक समुदाय को नवीनतम ज्ञान संसाधनों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया।
एसवीएच ब्लॉक परिसर में आयोजित इस भव्य पुस्तक प्रदर्शनी का उद्देश्य विश्वविद्यालय पुस्तकालय के संग्रह को और अधिक समृद्ध, समकालीन तथा शोधोन्मुख बनाना था, ताकि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नवीनतम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों तक सहज पहुंच उपलब्ध हो सके।
ज्ञान और नवाचार का केंद्र है पुस्तकालय : कुलपति
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जयशंकर वरियर तथा प्रो-वाइस चांसलर डॉ. निहार अमोनकर ने दीप प्रज्ज्वलन एवं पुस्तक प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ किया।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. जयशंकर वरियर ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक विकास का केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तक प्रदर्शनी जैसे आयोजन शिक्षकों और शोधार्थियों को नवीनतम शैक्षणिक साहित्य से जोड़ते हैं तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और प्रकाशन जगत के बीच इस प्रकार का संवाद नई शोध संभावनाओं को प्रोत्साहित करता है और अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा प्रदान करता है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अद्यतन ज्ञान संसाधन जरूरी : प्रो-वाइस चांसलर
प्रो-वाइस चांसलर डॉ. निहार अमोनकर ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उनके पास कितने समृद्ध और अद्यतन ज्ञान संसाधन उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि नॉलेज रिसोर्स सेंटर की यह पहल शोध संस्कृति को मजबूत बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक स्तर की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लगाए स्टॉल
प्रदर्शनी में देश के कई अग्रणी प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं ने अपने नवीनतम प्रकाशनों का प्रदर्शन किया। इनमें टाटा मैकग्रा हिल, पियर्सन, टैक्समैन, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, एस. चंद, हिमालया पब्लिशिंग हाउस, द हिंदू, लेक्सिसनेक्सिस, मेट्रो बुक्स, अटलांटिक पब्लिशर्स सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान शामिल रहे।
इन स्टॉलों पर इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विधि, कंप्यूटर विज्ञान, वाणिज्य, मानविकी, सामाजिक विज्ञान तथा अन्य उभरते और अंतर्विषयी विषयों से संबंधित नवीनतम पुस्तकें, शोध सामग्री और संदर्भ ग्रंथ प्रदर्शित किए गए।
शोध और शिक्षा की जरूरतों के अनुसार हुआ पुस्तकों का चयन
प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और कर्मचारियों ने पुस्तकों का विस्तार से अवलोकन किया तथा विश्वविद्यालय पुस्तकालय के लिए आवश्यक पुस्तकों और संदर्भ ग्रंथों का चयन एवं अनुशंसा की।
इस दौरान प्रकाशकों के प्रतिनिधियों के साथ पाठ्यक्रम, नई शोध प्रवृत्तियों, वैश्विक अकादमिक मानकों और विषयानुसार आवश्यक पुस्तकों पर भी विस्तृत चर्चा हुई, जिससे भविष्य में पुस्तकालय संग्रह को और अधिक उपयोगी एवं समकालीन बनाने में सहायता मिलेगी।
डिजिटल दौर में भी पुस्तकें बनी हुई हैं ज्ञान का सबसे विश्वसनीय आधार
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन संसाधनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के बावजूद पुस्तकों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। उच्च गुणवत्ता वाले शोध, गंभीर अध्ययन और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए प्रमाणिक पुस्तकें आज भी सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती हैं।
इसी कारण विश्वविद्यालयों में समय-समय पर आयोजित होने वाली पुस्तक प्रदर्शनियां शिक्षकों और विद्यार्थियों को नवीनतम शोध साहित्य से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नॉलेज रिसोर्स सेंटर की सराहनीय पहल
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय नॉलेज रिसोर्स सेंटर (KRC) की टीम द्वारा किया गया। पूरे आयोजन में उत्कृष्ट व्यवस्थाएं, प्रकाशकों की व्यापक भागीदारी और शिक्षकों-शोधार्थियों की सक्रिय उपस्थिति देखने को मिली।
ज्ञान आधारित भविष्य की ओर एक मजबूत कदम
आईआईएलएम विश्वविद्यालय की "वार्षिक पुस्तक प्रदर्शनी–2026–27" केवल पुस्तकों का प्रदर्शन भर नहीं रही, बल्कि यह ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बदलते समय में भी गुणवत्तापूर्ण पुस्तकालय और समृद्ध ज्ञान संसाधन ही किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक बौद्धिक शक्ति होते हैं।

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