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17 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसान महापंचायत का ऐलान, 10% प्लॉट और नए भूमि अधिग्रहण कानून पर आर-पार की लड़ाई


किसान संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन की दी चेतावनी, 10 हजार से अधिक किसानों के जुटने का दावा

रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा

 किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किसान सभा, किसान एकता संघ और किसान परिषद ने 17 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर विशाल किसान महापंचायत और आंदोलन का ऐलान किया है। मंगलवार को स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन, वार्ता और सरकारी आश्वासनों के बावजूद किसानों की प्रमुख मांगें अब भी अधूरी हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस बार भी सरकार ने मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान किसान लगातार आंदोलन करते रहे, जेल गए और प्रशासनिक कार्रवाई का सामना किया, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कई दौर की वार्ताओं में प्रशासन और प्राधिकरण ने लिखित एवं मौखिक आश्वासन दिए। राजस्व परिषद के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी तथा प्रमुख सचिव (औद्योगिक विकास) की अध्यक्षता में एक अन्य समिति भी गठित की गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने 6 जनवरी 2025 को किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान सर्किल रेट संशोधन और आबादी प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

854 आबादी प्रकरण लंबित, लाखों किसान प्रभावित होने का दावा

डॉ. वर्मा ने दावा किया कि केवल ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में 854 आबादी प्रकरण, नोएडा में लगभग 3800 और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में करीब 800 आबादी संबंधी मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि एक लाख से अधिक किसान 10 प्रतिशत विकसित भूखंड के अधिकार से वंचित हैं। कई मामलों में एक ही खसरे के एक हिस्सेदार को विकसित भूखंड का लाभ मिला, जबकि दूसरे हिस्सेदार को इससे वंचित रखा गया, जिससे किसानों में भारी असंतोष है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 के किसान आंदोलन के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक में 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। इसी प्रकार नोएडा और यमुना प्राधिकरण ने भी अपने प्रस्ताव शासन को भेज दिए हैं। अब सरकार को तत्काल इन्हें मंजूरी देकर किसानों को उनका अधिकार देना चाहिए।

'किसानों को दबाने की कोशिश हो रही'

किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, पुलिस के माध्यम से उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और आंदोलन को बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "पूरा शहर किसानों की जमीन पर खड़ा है, लेकिन किसान ही अपने अधिकारों से वंचित हैं। यह अन्याय अब और स्वीकार नहीं किया जाएगा।"

जनप्रतिनिधियों पर भी लगाए गंभीर आरोप

किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर किसानों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट और सर्किल रेट बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से नहीं उठाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गौतमबुद्ध नगर में जमीन का बाजार मूल्य बहुत अधिक होने के बावजूद किसानों से अपेक्षाकृत कम दरों पर भूमि अधिग्रहित की गई। उनके अनुसार प्रदेश के अन्य हिस्सों में एक्सप्रेसवे और विकास परियोजनाओं के लिए अधिक दरों पर भूमि खरीदी जा रही है, जबकि गौतमबुद्ध नगर के किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा।

17 जुलाई से निर्णायक आंदोलन की चेतावनी

किसान एकता संघ के प्रदेश प्रवक्ता उम्मेद एडवोकेट ने कहा कि 17 जुलाई से किसान संघर्ष मोर्चा निर्णायक आंदोलन की शुरुआत करेगा। उन्होंने दावा किया कि महापंचायत में 10 हजार से अधिक किसानों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि विभिन्न किसान संगठनों के साथ-साथ विपक्षी दलों और उनके नेताओं को भी महापंचायत में आमंत्रित किया गया है।

किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा वर्ष 2023 से नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने, आबादी प्रकरणों के निस्तारण और 10 प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दबाव में ही विकसित भूखंड का प्रस्ताव प्राधिकरण बोर्ड से पारित होकर शासन तक पहुंचा है और अब सरकार को इस पर अंतिम निर्णय लेना चाहिए।

ये हैं किसान संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें

  • 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट का प्रस्ताव तत्काल मंजूर किया जाए।
  • नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू किया जाए।
  • लंबित आबादी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
  • सर्किल रेट का वास्तविक बाजार मूल्य के अनुसार पुनरीक्षण किया जाए।
  • किसानों के साथ किए गए सभी सरकारी वादों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

प्रेस वार्ता में दुर्गेश शर्मा, प्रमोद शर्मा, राज्यपाल भाटी, बुधपाल यादव, भोजराज रावल, अशोक भाटी सहित किसान संघर्ष मोर्चा से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



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