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डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: भारत के 'मिसाइल मैन' और युवाओं के प्रेरणास्रोत को 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि


चौधरी शौकत अली चेची

27 जुलाई 2026 | विशेष लेख

भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, प्रख्यात शिक्षाविद और करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि पर पूरा राष्ट्र उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। अपने सरल व्यक्तित्व, राष्ट्रभक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण वे आज भी देशवासियों के हृदय में अमर हैं। उनका जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सीमित संसाधनों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी अपनी मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।

साधारण परिवार से राष्ट्र के सर्वोच्च पद तक का सफर

डॉ. अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता जैनुलाब्दीन नाव के मालिक थे, जबकि माता आशिअम्मा गृहिणी थीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी शिक्षा का साथ नहीं छोड़ा। बचपन में वे समाचार पत्र वितरित कर परिवार की सहायता भी करते थे।

उन्होंने वर्ष 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और वैज्ञानिक जीवन की शुरुआत की।

भारत के मिसाइल एवं अंतरिक्ष कार्यक्रम के शिल्पकार

वर्ष 1958 में डॉ. कलाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े। बाद में 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में स्थानांतरित हुए, जहां उन्होंने एसएलवी-3 (Satellite Launch Vehicle-III) परियोजना के निदेशक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी परियोजना के माध्यम से भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान विकसित किया।

वर्ष 1982 में वे पुनः DRDO लौटे और देश के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी मिसाइलों का सफल विकास हुआ। इन्हीं ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण उन्हें पूरे देश में "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" के नाम से सम्मानित किया गया।

भारत को परमाणु शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान

वर्ष 1998 में राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों में डॉ. कलाम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इन सफल परीक्षणों ने भारत को विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की श्रेणी में स्थापित किया और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की।

वैज्ञानिक सलाहकार से राष्ट्रपति भवन तक

डॉ. कलाम वर्ष 1992 से 1997 तक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे। इसके बाद वे 1999 से 2001 तक भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्यरत रहे।

वर्ष 2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और 2007 तक इस पद की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्हें जनता का राष्ट्रपति (People's President) कहा जाता है क्योंकि वे सदैव आम नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों और युवाओं के बीच रहते थे।

'टेक्नोलॉजी विज़न 2020' का सपना

डॉ. कलाम ने वर्ष 1998 में "टेक्नोलॉजी विज़न 2020" का खाका प्रस्तुत किया। उनका सपना था कि विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और नवाचार के माध्यम से भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जाए। उनका मानना था कि यदि युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो सकता है।

शिक्षा और युवाओं के प्रति समर्पण

राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी डॉ. कलाम ने स्वयं को शिक्षा और युवाओं के मार्गदर्शन के लिए समर्पित रखा। उन्होंने देश के अनेक विश्वविद्यालयों और संस्थानों में व्याख्यान दिए तथा विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया।

उनका प्रसिद्ध कथन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है—

"सपने वो नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।"

साहित्य और सम्मान

डॉ. कलाम ने अनेक प्रेरणादायक पुस्तकें लिखीं, जिनमें 'विंग्स ऑफ फायर', 'इग्नाइटेड माइंड्स', 'इंडिया 2020' और 'माय जर्नी' प्रमुख हैं।

उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—

  • पद्म भूषण (1981)
  • पद्म विभूषण (1990)
  • भारत रत्न (1997)

उनके जन्म दिवस 15 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व छात्र दिवस (World Students' Day) के रूप में मान्यता दी गई, जो विद्यार्थियों के प्रति उनके योगदान का सम्मान है।

अंतिम क्षण भी विद्यार्थियों के बीच

27 जुलाई 2015 को डॉ. कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM शिलांग) में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान के दौरान उन्हें हृदयाघात हुआ और कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया। उन्होंने जीवन की अंतिम सांस भी विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए ली, जो उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है।

राष्ट्र सदैव रहेगा ऋणी

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत को वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रनिर्माण की नई दिशा दी। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनकी सादगी, ईमानदारी, देशभक्ति और कर्मनिष्ठा उन्हें भारत के महानतम व्यक्तित्वों में शामिल करती है।

27 जुलाई 2026 को उनकी 11वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र के इस महान सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

— चौधरी शौकत अली चेची
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (बलराज)
समाजसेवी, शिक्षाविद एवं लेखक
निवासी: गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश


कानूनी डिस्क्लेमर

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऐतिहासिक एवं तथ्यात्मक स्रोतों के आधार पर श्रद्धांजलि स्वरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का सम्मानपूर्वक स्मरण करना है। लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं। यदि किसी तथ्य में अनजाने में त्रुटि रह गई हो तो उसे सुधार योग्य माना जाए। किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय की भावनाओं को आहत करना अथवा किसी प्रकार का राजनीतिक, व्यावसायिक या वैचारिक लाभ प्राप्त करना इस लेख का उद्देश्य नहीं है।

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