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स्पेशल रिपोर्ट | हाईकोर्ट के आदेश और CEO के निर्देश भी बेअसर, 8 साल से प्लॉट के लिए भटक रहा किसान


📍 मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/  ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। तुगलपुर गांव के किसान देवदत्त शर्मा पिछले करीब 8 वर्षों से अपने ही आवंटित प्लॉट के कब्जे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
📄 2017 में हुआ था प्लॉट आवंटन, आज तक नहीं मिला कब्जा
वर्ष 2017 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कासना गांव में 170 वर्ग मीटर का प्लॉट देवदत्त शर्मा के नाम आवंटित किया था। किसान ने डेवलपमेंट चार्ज भी समय पर जमा कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया।
⚖️ हाईकोर्ट के आदेश भी पड़े फीके
लंबे समय तक भटकने के बाद किसान ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को तत्काल प्लॉट का कब्जा दिलाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
इतना ही नहीं, कोर्ट के आदेश के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रवि कुमार एन. जी. ने भी अधीनस्थ अधिकारियों को तुरंत प्लॉट देने के निर्देश जारी किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🏛️ मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत
निराश किसान ने इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी कई बार की।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर प्राधिकरण की ओर से जवाब दिया गया कि— 👉 “प्राधिकरण इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है और अवैध कब्जा हटाकर प्लॉट दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस बल की मांग की गई है।”
🚧 अवैध कब्जा बना बड़ी वजह
प्राधिकरण का कहना है कि जिस भूमि पर प्लॉट आवंटित है, वहां अवैध कब्जा है, जिसके चलते कब्जा दिलाने में देरी हो रही है। अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल मांगा गया है, लेकिन कार्रवाई अब तक अधूरी है।
⚠️ किसान के गंभीर आरोप—भ्रष्टाचार और दबाव
पीड़ित किसान देवदत्त शर्मा ने प्राधिकरण के निचले स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि—
अधिकारी जानबूझकर अवैध कब्जा नहीं हटा रहे
उन्हें कासना की बजाय दूसरी जगह प्लॉट शिफ्ट करने का दबाव बनाया जा रहा है
वर्षों से उन्हें दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं
किसान ने साफ कहा कि— 👉 “हमें प्लॉट कासना में ही दिया जाए, या फिर हमारे गांव तुगलपुर में दिया जाए।”
10 साल का संघर्ष, फिर भी खाली हाथ
किसान का कहना है कि कासना की जिस जमीन पर उनका प्लॉट आवंटित हुआ था, उसे करीब 10 साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक न तो कब्जा मिला और न ही समस्या का समाधान हुआ।
वे लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई ठप है।
🚨 अब लखनऊ जाने की चेतावनी
हताश किसान ने अब सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि— 👉 अगर जल्द प्लॉट का कब्जा नहीं मिला, तो वे लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचकर प्राधिकरण के निचले स्तर के अधिकारियों की पोल खोलेंगे।
🔍 Vision Live News विश्लेषण
यह मामला केवल एक किसान की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।
जब प्लॉट आवंटित किया गया और पैसा भी ले लिया गया, तो जमीन को पहले से अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं कराया गया?
हाईकोर्ट और CEO के आदेश के बाद भी कार्रवाई न होना सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है।
यदि किसान के आरोप सही हैं, तो यह मामला भ्रष्टाचार और मनमानी की ओर इशारा करता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और क्या किसान को उसका हक मिल पाता है या नहीं।

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