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वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर यथार्थ हॉस्पिटल की बड़ी सफलता: जटिल ब्रेन ट्यूमर का सफल उपचार

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा ने एक दुर्लभ और जटिल ब्रेन ट्यूमर के सफल उपचार की प्रेरणादायक कहानी साझा की है। अस्पताल की विशेषज्ञ न्यूरोसाइंसेज टीम ने 37 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी देने में अहम भूमिका निभाई।
मरीज पिछले एक वर्ष से लगातार चक्कर आने, स्मरण शक्ति में कमी, बोलने में दिक्कत और हाल ही में दौरे (सीजर) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था। स्थिति बिगड़ने पर वह इलाज के लिए यथार्थ हॉस्पिटल पहुंचा, जहां विशेषज्ञों ने विस्तृत न्यूरोलॉजिकल जांच की।
जांच के दौरान मरीज के मस्तिष्क में लेफ्ट मेडियल स्फेनॉइड विंग मेनिंजियोमा नामक दुर्लभ और जटिल स्कल-बेस ट्यूमर का पता चला। यह ट्यूमर मस्तिष्क की संवेदनशील संरचनाओं और महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब स्थित था, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण बन गया।
न्यूरोसाइंसेज टीम ने उन्नत इमेजिंग तकनीकों और सेरेब्रल डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की मदद से ट्यूमर की रक्त आपूर्ति का गहन अध्ययन किया। जांच में सामने आया कि ट्यूमर अत्यधिक रक्तवाहिकीय (हाइपरवैस्कुलर) था और कई महत्वपूर्ण धमनियों से जुड़ा हुआ था, जिससे एम्बोलाइजेशन प्रक्रिया जोखिमभरी हो सकती थी।
मरीज की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञों ने एम्बोलाइजेशन न करने का निर्णय लिया और एक विशेष सर्जिकल रणनीति अपनाई। इसके बाद अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीक के माध्यम से सफल ऑपरेशन कर ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब उसे न तो चक्कर आते हैं, न ही दौरे पड़ते हैं। उसकी स्मरण शक्ति और मानसिक क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वह सामान्य जीवन में लौट चुका है।
इस अवसर पर यथार्थ हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं एचओडी (न्यूरोसर्जरी) और ग्रुप डायरेक्टर (न्यूरोइंटरवेंशन) डॉ. सुमित गोयल ने कहा,
"ब्रेन ट्यूमर का निदान जीवन का अंत नहीं, बल्कि सही समय पर इलाज का अवसर है। अक्सर लोग सिरदर्द, चक्कर, याददाश्त में कमी, दौरे या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर जांच और सही उपचार से जटिल से जटिल ट्यूमर का भी सफल इलाज संभव है।"
उन्होंने बताया कि यथार्थ हॉस्पिटल में इससे पहले भी कई जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा चुका है, जिनमें ओल्फैक्टरी ग्रूव मेनिंजियोमा से पीड़ित 40 वर्षीय मरीज और पिट्यूटरी ट्यूमर व हाइड्रोसेफेलस से ग्रस्त 76 वर्षीय मरीज शामिल हैं, जिनका नाक के रास्ते सफल ऑपरेशन किया गया।
यह सफलता न केवल अस्पताल की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि इस बात को भी मजबूती देती है कि जागरूकता, समय पर निदान और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी पर भी विजय पाई जा सकती है।
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