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पश्चिम उत्तर प्रदेश मठ के शुभारंभ पर ऐतिहासिक समागम, रुपेश चौधरी के नेतृत्व में गौतमबुद्धनगर से उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ बागपत/बड़ौत
श्री शिव गोरखनाथ आश्रम (खोखरा), भगवानपुर नंगला, बागपत (बड़ौत) में पश्चिम उत्तर प्रदेश मठ के श्री गणेश के शुभ अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम ने आध्यात्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक दृष्टि से एक नई मिसाल कायम की। इस ऐतिहासिक आयोजन में हिंदू युवा वाहिनी गौतमबुद्धनगर के जिला अध्यक्ष रुपेश चौधरी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं का विशाल काफिला प्रारंभ से ही चर्चा का केंद्र बना रहा। उनके नेतृत्व में पहुंचे युवाओं और कार्यकर्ताओं ने अनुशासन, संगठन शक्ति और आस्था का परिचय देते हुए पूरे वातावरण को “जय श्री राम” के नारों से गुंजायमान कर दिया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन से कार्यक्रम स्थल पर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं, संतों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने इस आयोजन को एक विशाल जनसमागम का रूप दे दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। योगी अर्जुन नाथ जी एवं गुरुजी महंत ब्रह्मनाथ जी के सान्निध्य में मठ स्थापना के इस पावन कार्य को संपन्न किया गया। संतों ने अपने उद्बोधन में मठों की परंपरा, उनके सामाजिक योगदान तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में महंत पीर बालक नाथ जी (विधायक, तिजारा) एवं महंत मठ अस्थल बोहर, रोहतक (हरियाणा) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। साथ ही गौसेवा, संस्कार और संगठन की मजबूती पर भी विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि गोरखनाथ परंपरा सदियों से समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक दिशा प्रदान करती रही है। उन्होंने कहा कि मठ एवं आश्रम केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं होते, बल्कि यह समाज में सेवा, संस्कार और राष्ट्र भावना के संवाहक होते हैं। उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश मठ की स्थापना को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रुपेश चौधरी ने महंत पीर बालक नाथ जी को गौ माता की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया, जो भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आशीर्वाद प्राप्त कर संगठन के कार्यों को और अधिक गति देने का संकल्प लिया। उनके नेतृत्व में आए कार्यकर्ताओं की सक्रियता, अनुशासन और जोश ने कार्यक्रम को एक अलग ही पहचान दी।
गौतमबुद्धनगर से पहुंचे कार्यकर्ताओं का काफिला न केवल संख्या में बड़ा था, बल्कि उनके समर्पण और ऊर्जा ने यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में भक्ति, उत्साह और संगठनात्मक शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस दौरान हिंदू युवा वाहिनी के पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अमित त्यागी, पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी रॉकी तोमर, राष्ट्रीय संयोजक शेखर त्रिपाठी, बागपत जिला अध्यक्ष भोपाल सिंह, गाजियाबाद जिला अध्यक्ष मोहित गुर्जर, गौतमबुद्धनगर के जिला उपाध्यक्ष निखिल गर्ग, नितिन चौधरी, सतीश नागर, कोषाध्यक्ष वैभव चौधरी, जिला मंत्री ऋषभ, जिला मीडिया प्रभारी वरुण उपाध्याय, सुनील भाटी (मथुरापुर, सदस्य) सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस बल, ट्रैफिक प्रबंधन एवं स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका के चलते कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण, पेयजल एवं बैठने की समुचित व्यवस्था ने आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाया।
विजन लाइव का विश्लेषण:
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में उभरती सामाजिक-सांस्कृतिक और संगठनात्मक शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया। विशेष रूप से रुपेश चौधरी के नेतृत्व में युवाओं की बड़ी भागीदारी यह संकेत देती है कि क्षेत्र में वैचारिक एवं संगठनात्मक सक्रियता तेजी से बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने इस आयोजन को राजनीतिक एवं प्रशासनिक महत्व भी प्रदान किया, जबकि संत समाज के मार्गदर्शन ने इसे आध्यात्मिक आधार दिया।
आने वाले समय में यह मठ न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा, बल्कि शिक्षा, सेवा, गौसंरक्षण, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में धर्म, समाज और संगठन का एक सशक्त समन्वय आकार ले रहा है, जिसका व्यापक प्रभाव भविष्य में देखने को मिलेगा।
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