मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
दनकौर की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध दरगाह हजरत बाबा शाह फिरोज चिश्ती रहमतुल्लाह आलैहि पर आयोजित तीन दिवसीय उर्स मुकद्दस इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, अनुशासन और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। 449वें कुल शरीफ के अवसर पर दरगाह शरीफ में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां दूर-दराज़ से आए हजारों जायरीन ने हाजिरी देकर अपने दिली अरमानों के साथ दुआएं मांगीं।
उर्स के दौरान दरगाह परिसर को आकर्षक रोशनी, फूलों और सजावट से सुसज्जित किया गया था, जो रात के समय एक अद्भुत आध्यात्मिक नज़ारा पेश कर रहा था। जायरीनों के लिए साफ-सफाई, पेयजल, ठहरने और लंगर जैसी व्यवस्थाएं भी व्यापक स्तर पर की गई थीं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
तीन दिवसीय इस आयोजन में महफिल-ए-समा खास आकर्षण का केंद्र रही। देश के विभिन्न हिस्सों से आए मशहूर कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। इश्क-ए-इलाही और औलिया-ए-किराम की शान में पेश की गई कव्वालियों ने पूरे माहौल को रूहानियत से सराबोर कर दिया। देर रात तक चलने वाली इन महफिलों में बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे और सूफी संगीत की मिठास में डूबे नजर आए।
चिश्तिया लुत्फिया दरगाह के सज्जादानसीन सूफी फजलुर रहमान लुत्फी हमीदी चिश्ती निजामी दनकौरी ने जानकारी देते हुए बताया कि
ख्वाजा लुत्फुल्लाह शाह चिश्ती निजामी रहमतुल्लाह अलैह के 82वें सालाना उर्स के अंतर्गत दो दिनों तक लगातार महफिल-ए-समा (कव्वालियां) आयोजित की गईं, जिनमें दूर-दूर से आए नामचीन कव्वालों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए।
उन्होंने बताया कि 3 जून 2026 को दिन में 11:00 बजे 82वां कुल शरीफ अदा किया गया, जिसमें भारी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर दुआएं मांगीं। इसके अतिरिक्त 3 जून की रात्रि को बाबा शाह फिरोज चिश्ती की शान में भव्य महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ, जो पूरी रात जारी रही। इसके पश्चात सुबह 4:00 बजे कुल शरीफ अदा किया गया, जिसमें देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, तरक्की और खैर-ओ-बरकत के लिए विशेष दुआएं की गईं।
उर्स के दौरान चादरपोशी, फातिहा, कुरानखानी और लंगर की विशेष व्यवस्थाएं की गईं। लंगर में हजारों लोगों ने शिरकत कर इंसानियत और बराबरी के संदेश को मजबूती दी। दरगाह से जुड़ी यह परंपरा आज भी लोगों को जोड़ने और समाज में प्रेम व सौहार्द का संदेश देने का काम कर रही है।
उर्स मुकद्दस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान,
दनकौर नगर चेयरमैन प्रतिनिधि दीपक सिंह उर्फ ‘दीपक भैया’,
तथा गौतम बुद्ध नगर दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष उमेश भाटी एडवोकेट सहित अन्य गणमान्य अतिथिगणों ने शिरकत की। सभी अतिथियों ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर देश की खुशहाली, अमन-चैन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दुआएं मांगीं।
इस अवसर पर दरगाह के सज्जादानशीन सूफी फजलुर रहमान लुत्फी द्वारा सभी अतिथियों का दस्तारबंदी कर सम्मानपूर्वक इस्तकबाल किया गया, जो उर्स की पारंपरिक गरिमा और सम्मान की प्रतीक रहा।
449वें कुल शरीफ के मौके पर आयोजित मुख्य दुआ में देश की खुशहाली, सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं। इस दौरान जायरीनों ने अपने-अपने परिवारों की सलामती और कामयाबी के लिए भी दुआएं मांगीं।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
📌 खास झलकियां:
तीन दिवसीय उर्स मुकद्दस में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब
दो दिनों तक चली रूहानी महफिल-ए-समा, मशहूर कव्वालों ने बांधा समां
3 जून सुबह 11 बजे 82वां कुल शरीफ अदा
रातभर चली कव्वालियां, सुबह 4 बजे विशेष दुआ
मुख्य अतिथियों की मौजूदगी और दस्तारबंदी से बढ़ी शान
449वें कुल शरीफ पर अमन-चैन और भाईचारे की दुआ
लंगर, सेवा और व्यवस्थाओं ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
🔍 विजन लाइव का विश्लेषण:
दनकौर में आयोजित यह उर्स मुकद्दस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। जिस तरह से अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों से आए लोगों ने एक साथ इस आयोजन में भाग लिया, वह गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल पेश करता है।
महफिल-ए-समा, लंगर और सामूहिक दुआ जैसे आयोजनों ने न केवल आध्यात्मिक वातावरण को सशक्त किया, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को भी मजबूती दी। साथ ही, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और स्थानीय सहयोग ने यह साबित किया कि बड़े धार्मिक आयोजनों को भी अनुशासन और शांति के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है।
विजन लाइव का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।