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निर्जला एकादशी पर आस्था और सेवा का अद्भुत संगम: श्री बालाजी मानव सेवा समिति ने 200 लीटर ठंडाई वितरित कर दिया मानवता का संदेश

"समर्पण, सेवा और संस्कार" के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं, राहगीरों और आमजन को बांटी गई शीतल ठंडाई
भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जनसेवा को समर्पित आयोजन में उमड़ी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी
   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
भारतीय सनातन परंपरा में धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज सेवा, परोपकार और मानव कल्याण का संदेश भी देते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री बालाजी मानव सेवा समिति ने ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी के अवसर पर ग्रेटर नोएडा के गामा-2 स्थित एच-ब्लॉक, एवरग्रीन स्वीट्स के समीप विशाल ठंडाई वितरण सेवा शिविर का आयोजन किया।
भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम के बीच आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में लगभग 200 लीटर दूध, मेवा, बादाम, केसर और गुलाब से तैयार विशेष शीतल ठंडाई श्रद्धालुओं, राहगीरों, स्थानीय नागरिकों और जरूरतमंद लोगों को वितरित की गई। सुबह से शुरू हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद स्वरूप ठंडाई ग्रहण की और समिति के इस जनहितकारी प्रयास की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान धार्मिक आस्था, सामाजिक सेवा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का अनूठा संगम देखने को मिला। समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्वयं लोगों को ठंडाई वितरित कर सेवा भावना का परिचय दिया।
निर्जला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व
इस अवसर पर समिति के संस्थापक एवं प्रबंधक सतेन्द्र राघव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में एकादशी का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोपरि माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकमात्र ऐसा व्रत है जिसका विधिवत पालन करने पर वर्षभर की समस्त एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अधिक मास का संयोग भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, जिससे निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में व्रत, उपवास और सेवा को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। केवल व्यक्तिगत साधना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व निभाना भी धर्म का अभिन्न अंग है।
सतेन्द्र राघव ने कहा—
"मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है। यदि हम किसी प्यासे को पानी, किसी जरूरतमंद को भोजन और किसी दुखी व्यक्ति को सहारा दे सकें, तो वही सच्चे अर्थों में धर्म का पालन है। हमारी संस्था समर्पण, सेवा और संस्कार को अपना मूल आधार मानकर कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर करती रहेगी।"
भारतीय संस्कृति का मूल है सेवा और परोपकार
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से सेवा, त्याग और परोपकार के सिद्धांतों पर आधारित रही है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हमेशा समाज हित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखा। इसी कारण भारत को विश्वगुरु कहा गया।
उनके अनुसार आज के समय में जब समाज तेजी से भौतिकवाद की ओर बढ़ रहा है, तब ऐसे आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। सेवा कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ते हैं।
वसुधैव कुटुंबकम की भावना को मजबूत करता है सेवा कार्य
समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश यादव ने कहा कि निर्जला एकादशी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और मानव सेवा का महापर्व है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों और सनातन जीवन दर्शन का सार यही है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार का हिस्सा समझा जाए।
उन्होंने कहा—
"वसुधैव कुटुंबकम की भावना हमें सिखाती है कि पूरा विश्व एक परिवार है। जब हम निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं तो हम वास्तव में भारतीय संस्कृति के मूल संदेश को जीवंत करते हैं।"
उन्होंने कहा कि सेवा कार्य करने से मन को शांति, आत्मसंतोष और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही कारण है कि सनातन संस्कृति में दान, सेवा और परोपकार को विशेष महत्व दिया गया है।
गर्मी में राहत, सेवा से मिला सुकून
गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में राह चलते लोगों, दुकानदारों, रिक्शा चालकों, श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों ने भी ठंडाई ग्रहण की। भीषण गर्मी के बीच शीतल ठंडाई ने लोगों को राहत पहुंचाई। कई लोगों ने समिति के इस प्रयास को सामाजिक सरोकार और जनकल्याण की दिशा में प्रेरणादायी कदम बताया।
कार्यक्रम स्थल पर सेवा भाव और धार्मिक वातावरण का विशेष प्रभाव दिखाई दिया। समिति के कार्यकर्ता लगातार लोगों का स्वागत कर रहे थे और उन्हें ठंडाई उपलब्ध करा रहे थे।
समाज जागरण और संस्कार निर्माण की दिशा में सक्रिय है समिति
श्री बालाजी मानव सेवा समिति लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। संस्था समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर, धार्मिक आयोजन, संस्कार शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है।
समिति का मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सेवा कार्यों में योगदान दे, तो सामाजिक समस्याओं का समाधान काफी हद तक संभव है।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस सेवा आयोजन में संस्था के संस्थापक प्रबंधक सतेन्द्र राघव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश यादव, प्रमोद चौहान, जयप्रकाश सिंह, आशीष बंसल, प्रवीण अरोड़ा, मोहन कुमार, पवन कुमार मित्तल, आशुतोष जैना, मुकेश सोनी, एडवोकेट मुकेश शर्मा, संस्कार पाठशाला संयोजिका बीना अरोड़ा, नवनीता महेश, महिमा पांडे, पिंकी त्रिपाठी सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विजन लाइव विश्लेषण
धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सेवा से जोड़ने की परंपरा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। निर्जला एकादशी जैसे पर्व पर आयोजित यह ठंडाई वितरण कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का एक सशक्त उदाहरण भी है।
तेज गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच लोगों को शीतल पेय उपलब्ध कराना एक मानवीय पहल है, वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजन समाज में सहयोग, सह-अस्तित्व और सेवा की भावना को भी मजबूत करते हैं। श्री बालाजी मानव सेवा समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि धार्मिक आस्था के साथ जनकल्याण की भावना जुड़ जाए तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सामाजिक एकता का माध्यम बन सकती है।
आज जब समाज को सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब इस प्रकार के सेवा कार्यक्रम न केवल प्रेरणादायक हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक संदेश भी प्रस्तुत करते हैं।
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