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दनकौर के समर नागर का जलवा: अंडर-16 दिल्ली यूथ लीग में ‘गोल + असिस्ट’ से टीम को बनाया चैंपियन

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गुरुग्राम/नोएडा ( गौतमबुद्धनगर)
जहां एक ओर देश में युवा खेल प्रतिभाएं अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दनकौर क्षेत्र के छोटे से गांव जुनेदपुर का 15 वर्षीय खिलाड़ी समर नागर अपनी मेहनत, जुनून और प्रदर्शन के दम पर नई मिसाल कायम कर रहा है।
इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन के तत्वाधान में गुरुग्राम स्थित कॉन्शिएंट स्पोर्ट्स एरेना में आयोजित दिल्ली यूथ लीग (DPDL) अंडर-16 फुटबॉल के फाइनल मुकाबले में समर नागर ने ऐसा खेल दिखाया, जिसने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता बल्कि उनकी टीम ‘बीबीएफएस वाई किंग’ नोएडा को चैंपियन भी बना दिया।
फाइनल में समर का दमदार प्रदर्शन
फाइनल मुकाबले में ‘बीबीएफएस वाई किंग’ ने ‘एमआर फुटबॉल क्लब’ हरियाणा को 2-1 से हराया। इस जीत के हीरो रहे समर नागर—
एक शानदार गोल दागा
दूसरे गोल में सटीक असिस्ट दिया
यानी दोनों गोल में सीधा योगदान देकर समर ने टीम की जीत की पटकथा लिखी।
सेमीफाइनल से ही दिखा था ‘चैंपियन क्लास’
समर का यह प्रदर्शन कोई एक दिन की बात नहीं है। सेमीफाइनल में भी उनके बेहतरीन खेल के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया था। लगातार प्रदर्शन यह साबित करता है कि समर बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं।
🏆 लीग का सफर और कड़ी प्रतिस्पर्धा
कोच जतिन सिंह के अनुसार, इस यूथ लीग में दिल्ली-एनसीआर की पांच मजबूत टीमों ने हिस्सा लिया:
बीबीएफएस वाई किंग (नोएडा)
एमआरएफसी (गुरुग्राम)
कॉन्शिएंट स्पोर्ट्स
कॉन्शिएंट स्पोर्ट्स व्हाइट
यंग स्टिकर्स एफए
कड़े मुकाबलों के बीच बीबीएफएस वाई किंग ने शानदार तालमेल और रणनीति के दम पर खिताब अपने नाम किया।
🌟 “यह तो बस शुरुआत है” — कोच जतिन सिंह
समर की प्रतिभा पर गर्व जताते हुए कोच जतिन सिंह ने कहा,
“समर की उपलब्धियां, उसका जुनून और खेल के प्रति समर्पण बताता है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में वह और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा और देश का नाम रोशन करेगा।”
🇮🇳 पहले भी कर चुके हैं देश का प्रतिनिधित्व
महज 15 साल की उम्र में समर नागर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना दम दिखा चुके हैं। उनका आत्मविश्वास, फिटनेस और गेम रीडिंग उन्हें अपने साथियों से अलग बनाती है।
📍 गांव से ग्राउंड तक: प्रेरणा बन रहा समर
दनकौर के जुनेदपुर गांव से निकलकर बड़े मंच पर पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन समर ने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून सच्चा हो, तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं। आज वह क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभर रहे हैं।

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