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किसानों की अनदेखी पर गरजी भारतीय किसान यूनियन (कृषक), प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

📍 मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर
जनपद गौतमबुद्ध नगर में किसानों की लगातार उपेक्षा और बढ़ती समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (कृषक) अब मुखर होती नजर आ रही है। संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रशासनिक अधिकारियों से मिला और किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम (एलए) बच्चू सिंह एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पवार से मुलाकात कर जिला अधिकारी को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण नागर ने स्पष्ट कहा कि जिले के किसान लंबे समय से अपनी जमीन के सर्किल रेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने चेताया कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी जारी रही, तो यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
कृष्ण नागर ने बताया कि धान की फसल के लिए किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने निजी अस्पतालों और निजी स्कूलों पर मनमानी वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि इन संस्थानों ने आम जनता और किसानों का आर्थिक शोषण शुरू कर दिया है।
उन्होंने तहसील स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि बिना रिश्वत के किसानों के कार्य नहीं हो पा रहे हैं। वहीं भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति की अनियमितता ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है, जिससे सिंचाई कार्य बाधित हो रहे हैं।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र नागर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समस्याओं का समाधान तय समय सीमा में नहीं किया गया, तो भारतीय किसान यूनियन (कृषक) व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
हालांकि एडीएम (एलए) ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान किया जाएगा।
इस दौरान हरेंद्र नागर, एडवोकेट जीतू गुर्जर, कपिल कसाना, एडवोकेट रीना भाटी, देवेंद्र कसाना, योगेश अवाना, एडवोकेट अजय कुमार, ललित चौधरी, सुन्दर सिंह पायला सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यह मुलाकात एक बार फिर यह दर्शाती है कि जनपद में किसानों की समस्याएं अब केवल मांग तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे एक बड़े जनांदोलन का रूप लेने की ओर बढ़ रही हैं।
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