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टॉर्च की रोशनी से टॉप रैंक तक: अस्तौली की ‘गीत’ बनी मिसाल

यूपी बोर्ड 10वीं में 92.17% अंक, डॉक्टर बनने का सपना
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा 
दनकौर क्षेत्र के ग्राम अस्तौली की होनहार छात्रा गीत, पुत्री लेखराज सिंह, ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में 92.17% अंक प्राप्त कर जिले में सातवां स्थान हासिल किया है। 19 मार्च 2012 को जन्मी गीत की यह सफलता सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और पारिवारिक संस्कारों की एक प्रेरक कहानी है।
गीत की शुरुआती पढ़ाई बसंती देवी पब्लिक स्कूल, अस्तौली में नर्सरी से कक्षा 8 तक हुई—यह वही स्कूल है, जिसे उनके माता-पिता स्वयं संचालित करते हैं। इसके बाद उन्होंने इंडो पब्लिक स्कूल, मंडी श्यामनगर (दनकौर) से हाईस्कूल की परीक्षा दी और बिना किसी ट्यूशन के यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।
गीत के पिता लेखराज सिंह, जो स्वयं एम.ए., बी.एड. शिक्षाविद हैं, मानते हैं कि “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता—नियमितता, आत्मअनुशासन और सही दिशा ही असली कुंजी है।” उन्होंने बताया कि गीत ने शुरू से ही पढ़ाई को प्राथमिकता दी और हर दिन एक तय लक्ष्य के साथ पढ़ाई की।
माता अनीता सिंह ने Vision Live News से बातचीत में गीत की दिनचर्या और समर्पण को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि गीत रात 10 बजे सो जाती है और सुबह 5 बजे उठकर पढ़ाई शुरू कर देती है।
सबसे खास किस्सा उन्होंने जयपुर का बताया—जब वह बड़ी बेटी जाह्नवी (जो एमबीबीएस कर रही हैं) के पास गई थीं, तब एक सुबह उन्होंने देखा कि गीत किचन में टॉर्च की रोशनी में पढ़ाई कर रही थी। यह दृश्य सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उसके लक्ष्य के प्रति जुनून को दर्शाता है। अनीता सिंह मुस्कुराते हुए कहती हैं, “जाह्नवी और गीत हमारे दो अनमोल रत्न हैं।”
परिवार में शिक्षा की मजबूत परंपरा भी गीत की सफलता का बड़ा आधार है। दादा नेपाल सिंह भाटी ने गर्व से बताया कि उनकी बड़ी पोती जाह्नवी सिंह ने वर्ष 2020 में 87% अंक लाकर जिले में नवां स्थान प्राप्त किया था और आज वह जयपुर से एमबीबीएस कर रही हैं। अब गीत ने भी उसी राह पर एक और मजबूत कदम बढ़ाया है।
गीत का सपना है—डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना। वह अपनी बड़ी बहन को प्रेरणा मानती हैं और उसी समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं।
अस्तौली गांव की यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं—अगर मेहनत सच्ची हो और इरादे मजबूत।