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दादरी में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई अमर शहीद राजा राव उमराव सिंह गुर्जर की 195वीं जयंती


📍मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी (गौतमबुद्धनगर)
महान क्रांतिकारी, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी एवं दादरी रियासत के गौरव अमर शहीद राजा राव उमराव सिंह गुर्जर की 195वीं जयंती शनिवार को दादरी में बड़े ही श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने एकत्रित होकर उनके अद्वितीय बलिदान और देशभक्ति को नमन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दादरी स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। गुर्जर विद्या सभा के सचिव एडवोकेट राम शरण नागर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वक्ताओं ने अपने संबोधन में राजा राव उमराव सिंह गुर्जर के जीवन, संघर्ष और देश के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि राजा राव उमराव सिंह गुर्जर केवल एक क्षेत्रीय शासक ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी योद्धा थे। वर्ष 1857 में जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़की, तब उन्होंने अपने परिवार और हजारों क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत को कड़ी चुनौती दी। उनके नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए और दिल्ली पहुंचकर लाल किले पर झंडा फहराते हुए बहादुर शाह जफर द्वितीय को पुनः भारत का बादशाह घोषित किया। यह घटना उनके साहस और संगठन क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि राजा राव उमराव सिंह गुर्जर का जन्म 30 मई 1832 को दादरी रियासत के गांव कठैड़ा में हुआ था। उनका जीवन त्याग, वीरता और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है, जिससे आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
जयंती समारोह के अंतर्गत गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज सार्वजनिक पुस्तकालय परिसर स्थित मिहिर भोज इंटर कॉलेज, दादरी में भी एक विशेष आयोजन किया गया। यहां छात्र-छात्राओं ने भाषण, देशभक्ति गीत और विचार प्रस्तुत कर शहीद के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। शिक्षकों ने छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उसमें स्थानीय वीरों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर गुर्जर विद्या सभा के अध्यक्ष कार्यालय कोऑर्डिनेटर उदय पाल तौंगड़, पुस्तकालय अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नागर, रोहित कुमार, मास्टर ब्रह्मपाल नागर, बेग राज सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों की गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और विरासत पर गर्व कर सके।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने अमर शहीद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और देशहित में कार्य करने का संकल्प लिया।

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