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ग्रेटर नोएडा में MSME उद्यमियों की संयुक्त प्रेस वार्ता: वेतन वृद्धि के बाद उद्योगों की ‘वायबिलिटी’ पर संकट, सरकार से राहत पैकेज की मांग

    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में हालिया घटनाओं और श्रमिक वेतन वृद्धि के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में MSME उद्यमियों ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी चिंताएं सार्वजनिक रूप से रखीं। शुक्रवार को आयोजित इस प्रेस वार्ता में क्षेत्र के विभिन्न औद्योगिक संगठनों से जुड़े 40 से अधिक उद्यमियों ने भाग लिया और सरकार के समक्ष उद्योगों की वर्तमान स्थिति को विस्तार से रखा।
वेतन वृद्धि के बाद बढ़ा आर्थिक दबाव
उद्यमियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और अन्य लाभों में की गई वृद्धि का वे समर्थन करते हैं और इसे लागू भी कर रहे हैं, लेकिन इसके कारण MSME सेक्टर पर अचानक और भारी आर्थिक बोझ पड़ गया है।
उनका कहना है कि इस अतिरिक्त भार के चलते कई इकाइयों की आर्थिक व्यवहार्यता (Viability) पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है और यदि स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो छोटे और मध्यम उद्योगों के संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
औद्योगिक माहौल पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में उद्यमियों ने हाल के दिनों में औद्योगिक क्षेत्रों में हुई आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा श्रमिकों के बीच असंतोष फैलाकर औद्योगिक वातावरण को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे उद्योगों में अस्थिरता और असुरक्षा का माहौल बना।
उद्यमियों के अनुसार, यदि ऐसी प्रवृत्तियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह क्षेत्र की औद्योगिक प्रगति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
सरकार से राहत और सहयोग की मांग
उद्यमियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे सरकार के निर्णयों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि सरकार भी उद्योगों के साथ समान रूप से खड़ी नजर आए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि—
बढ़े हुए आर्थिक बोझ को संतुलित करने के लिए टैक्स में छूट (Tax राहत) दी जाए,
सब्सिडी या प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराया जाए,
और यह सुनिश्चित किया जाए कि निकट भविष्य में उद्योगों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार न डाला जाए।
उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो MSME सेक्टर, जो रोजगार का एक बड़ा स्रोत है, उसकी स्थिरता और विकास दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
निरीक्षण प्रक्रिया पर भी जताई आपत्ति
उद्यमियों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में सरकारी तंत्र द्वारा नए नियमों के अनुपालन के नाम पर लगातार निरीक्षण (Inspections) किए जा रहे हैं, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
उन्होंने मांग की कि कम से कम अगले दो महीनों तक निरीक्षण प्रक्रिया को स्थगित किया जाए, ताकि उद्यमी नई वेतन संरचना और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को व्यवस्थित कर सकें।
विभिन्न औद्योगिक संगठनों की भागीदारी
इस प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से—
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA), ग्रेटर नोएडा चैप्टर से चेयरमैन सरबजीत सिंह, जे.एस. राणा, अमित शर्मा
इंडियन इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन से संजीव शर्मा, पुष्पेंद्र तिवारी
इंडियन बिजनेस एसोसिएशन से डॉ. खुशबू सिंह
लघु उद्योग भारती से नरेश गुप्ता, संजय बत्रा
इकोटेक-12 एसोसिएशन से साहिल
सहित अन्य उद्यमियों ने अपने विचार रखे।
संवाद और समाधान पर जोर
प्रेस वार्ता के अंत में उद्यमियों ने मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सरकार के साथ संवाद के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका उद्देश्य किसी टकराव की स्थिति पैदा करना नहीं, बल्कि उद्योग और श्रमिक—दोनों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
विजन लाइव का विश्लेषण
विजन लाइव के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के MSME उद्यमियों की यह संयुक्त प्रेस वार्ता प्रदेश के औद्योगिक ढांचे में उभर रही दोहरी चुनौती को स्पष्ट रूप से सामने लाती है—एक ओर श्रमिकों के हितों की सुरक्षा और दूसरी ओर उद्योगों की आर्थिक स्थिरता।
जहां सरकार द्वारा वेतन वृद्धि का निर्णय सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, वहीं MSME सेक्टर की सीमित वित्तीय क्षमता इसे तुरंत वहन करने में कठिनाई महसूस कर रही है।
उद्यमियों द्वारा टैक्स राहत, सब्सिडी और निरीक्षण में अस्थायी छूट की मांग यह दर्शाती है कि उद्योग वर्तमान में समायोजन (Adjustment Phase) से गुजर रहा है।
विजन लाइव मानता है कि यदि सरकार इस स्थिति में संतुलित नीति अपनाते हुए उद्योगों को आंशिक राहत प्रदान करती है, तो यह न केवल MSME सेक्टर को स्थिरता देगा, बल्कि रोजगार और औद्योगिक विकास की गति भी बनाए रखेगा।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में नीतिगत संतुलन, संवाद और सहयोग ही औद्योगिक शांति और प्रगति की कुंजी होंगे।