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आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज में IPR कार्यशाला का आयोजन किया


स्टार्ट-अप्स के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों पर विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
      मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा स्थित आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा “Protecting Intellectual Property Rights (IPR) and IP Management for Start-ups” विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों और संकाय सदस्यों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व तथा उनके प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज निदेशक एवं IIC अध्यक्ष डॉ. मयंक गर्ग के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल नवाचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा और सही प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को अपने विचारों को व्यवहारिक रूप देकर उन्हें सुरक्षित करने और स्टार्ट-अप के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला की मुख्य वक्ता सुश्री ईशा शर्मा, संस्थापक Trayambak Pvt. Ltd., ने स्टार्ट-अप्स के लिए IPR की रणनीतिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और ट्रेड सीक्रेट्स जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार न केवल नवाचारों की सुरक्षा करते हैं, बल्कि बाजार में विश्वसनीयता स्थापित करने और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विभिन्न वास्तविक उदाहरणों और केस स्टडीज़ के माध्यम से यह समझाया कि किस प्रकार स्टार्ट-अप्स अपने उत्पादों और सेवाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान कर उन्हें व्यावसायिक सफलता में परिवर्तित कर सकते हैं। उनके व्याख्यान ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया और उन्हें IPR के प्रति गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया।
सत्र के दौरान बी.टेक एवं एम.बी.ए. के छात्रों तथा संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और अनेक प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। संवादात्मक शैली में आयोजित इस सत्र ने कार्यशाला को और अधिक प्रभावी एवं ज्ञानवर्धक बना दिया।
कार्यक्रम का समापन IIC संयोजक डॉ. राजीव रंजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य वक्ता, आयोजन टीम और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह कार्यशाला न केवल छात्रों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की गहन समझ प्रदान करने में सफल रही, बल्कि उन्हें अपने नवाचारों को सुरक्षित कर उन्हें सफल स्टार्ट-अप में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच भी सिद्ध हुई।