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ग्रेटर नोएडा के उद्योगों में ‘हेल्थ सिक्योरिटी मॉडल’ की शुरुआत: IBA–यथार्थ अस्पताल के MoU से बदलेगी श्रमिकों की ज़िंदगी

   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
औद्योगिक विकास की रफ्तार के बीच अक्सर एक महत्वपूर्ण पहलू पीछे छूट जाता है—श्रमिकों और कर्मचारियों का स्वास्थ्य। लेकिन अब ग्रेटर नोएडा में एक ऐसा मॉडल सामने आया है, जो विकास और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) और यथार्थ अस्पताल के बीच हुआ यह एमओयू (MoU) केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि “हेल्थ सिक्योरिटी मॉडल” की ठोस शुरुआत है।
“स्वस्थ तन ही सबसे बड़ा धन है” की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए IBA ने यह पहल की है, जिसका सीधा लाभ औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हजारों श्रमिकों, कर्मचारियों और उद्यमियों को मिलेगा।
औद्योगिक विकास के साथ ‘हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर’ की जरूरत
ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के क्षेत्र तेजी से इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां, MSME यूनिट्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर यहां सक्रिय हैं। ऐसे में लाखों की संख्या में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं एक बड़ी चुनौती रही हैं।
IBA और यथार्थ अस्पताल सेक्टर ओमेगा- 1, ग्रेटर नोएडा का यह MoU इसी चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है। इस पहल के तहत न केवल अस्पताल में रियायती इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।
MoU के प्रमुख आयाम: इलाज से आगे बढ़कर ‘रोकथाम’ पर फोकस
इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि यह केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रिवेंटिव हेल्थ केयर यानी बीमारी को पहले ही रोकने पर जोर देता है।
औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित फ्री हेल्थ चेकअप कैंप
श्रमिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्ड/रियायत योजनाएं
जागरूकता अभियान—डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, प्रोफेशनल हज़ार्ड्स पर
महिला श्रमिकों के लिए विशेष हेल्थ प्रोग्राम
आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं तक त्वरित पहुंच
इससे न केवल बीमारियों का समय रहते पता चलेगा, बल्कि इलाज का खर्च भी कम होगा और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।
1 मई का मेगा हेल्थ कैंप: प्रशासन और उद्योग साथ-साथ
इस पहल को और व्यापक बनाने के लिए 1 मई 2026 को जिला प्रशासन द्वारा एक वृहद स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर खासतौर पर उन क्षेत्रों में लगाया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक और लेबर वर्ग निवास करता है।
यहां स्वास्थ्य जांच, परामर्श और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए हजारों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। IBA और यथार्थ अस्पताल इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।
सरकार के विज़न से जुड़ी पहल
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विज़न के अनुरूप है, जिसमें औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यवस्थित रूप से लागू किया गया, तो यह पूरे प्रदेश के लिए एक “रेप्लिकेबल मॉडल” बन सकता है।
उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का महत्व
इस महत्वपूर्ण अवसर पर इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित उपाध्याय, महासचिव सुनील दत्त शर्मा सहित संस्था के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
यथार्थ अस्पताल की ओर से वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम और उनकी मार्केटिंग टीम ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की।
IBA की सामाजिक भूमिका: उद्योग से आगे समाज तक
IBA केवल औद्योगिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारियों को भी सक्रिय रूप से निभा रहा है। यह MoU इस बात का प्रमाण है कि संगठन अब “इंडस्ट्री ग्रोथ” के साथ “ह्यूमन वेलफेयर” को भी प्राथमिकता दे रहा है।
निष्कर्ष: ग्रेटर नोएडा बना मॉडल, अब नजर पूरे प्रदेश पर
IBA और यथार्थ अस्पताल की यह पहल एक नई सोच को दर्शाती है—जहां उद्योगों की तरक्की के साथ-साथ वहां काम करने वाले लोगों की सेहत को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी तरह के हेल्थ पार्टनरशिप मॉडल लागू किए जा सकते हैं।
अब सवाल सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि ‘स्वस्थ विकास’ का है—और ग्रेटर नोएडा ने इसकी दिशा तय कर दी है।