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“कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है…”: कुमार विश्वास की गूंज से नोएडा में सजी समरसता की शाम

     मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ नोएडा
सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन द्वारा सेक्टर-91 स्थित पंचशील बालक इंटर कॉलेज में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक संध्या में देश के प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास की ओजपूर्ण प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रही, जिनकी चर्चित पंक्तियों— “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है…”—ने पूरे माहौल को भावनाओं से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के बजरंग लाल बांगड़, अभिनेता बिंदु दारा सिंह, एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के संस्थापक संदीप मारवाह, भाजपा नेता सुरेंद्र नागर तथा एम3एम नोएडा के मैनेजिंग डायरेक्टर यश गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर आयोजन को जनसमूह का रूप दिया।
दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के सामूहिक जाप ने आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया। इसके साथ ही योग और प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दिया गया।
कवि सम्मेलन में डॉ. कुमार विश्वास के साथ-साथ रमेश मुस्कान, सुदीप भोला, हेमंत पांडेय और अल्पना पांडेय ने भी अपनी रचनाओं से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, ओज और संवेदनशीलता से भरपूर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को बांधे रखा।
डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी प्रस्तुति के दौरान प्रेम, राष्ट्रभावना और सामाजिक सरोकारों पर आधारित कविताओं के माध्यम से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उनकी लोकप्रिय पंक्तियों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ प्रतिक्रिया दी, जिससे पूरा पंडाल गूंज उठा।
कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी समाज और वनवासी एवं वंचित समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता को मजबूत करना था।
कार्यक्रम के संयोजक एवं फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष मयूर कालरा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह आयोजन केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।