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राम कथा के नवें दिन भक्ति और संदेश का संगम: “सत्य की विजय और सेवा ही सच्ची भक्ति”


   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा (ऐछर-बिरोड़ा)
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वाधान में रामलीला मैदान, ऐछर-बिरोड़ा सेक्टर पाई-1 में आयोजित श्रीराम कथा का नवां दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और जीवन मूल्यों के गूढ़ संदेशों के साथ संपन्न हुआ। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा के अंतिम चरण में पहुंचे इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जहां हर ओर भक्ति, आस्था और “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।
अधर्म पर धर्म की विजय”—जीवन का मूल संदेश
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने नवें दिन के प्रवचन में स्पष्ट कहा कि
“सदा अधर्म पर धर्म की विजय होती है और असत्य कभी स्थायी नहीं होता।”
उन्होंने श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि मर्यादा, त्याग, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति जीवन को सफल बना सकता है।
महाराज जी ने कहा कि दूसरों की संपत्ति पर कभी अधिकार नहीं जताना चाहिए, चाहे वह कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो—यही रामायण का मूल संदेश है।
रामायण के प्रसंगों से मिला जीवन दर्शन
कथा के दौरान सीताहरण, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और विभीषण के राज्याभिषेक जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।
महाराज जी ने बताया कि भगवान हर कण में विद्यमान हैं और यदि हम दीन-दुखियों की सेवा करते हैं, तो वही सच्ची भक्ति है। उन्होंने श्रीराम के वनवास काल का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान ने वनवासियों और आदिवासियों को संगठित कर समाज की बुराइयों का अंत किया—आज भी यही संदेश प्रासंगिक है।
संगठन में ही शक्ति”—समाज सुधार का मार्ग
प्रवचन में विशेष रूप से यह बात उभरकर सामने आई कि समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने के लिए अच्छे लोगों का संगठित होना आवश्यक है।
महाराज जी ने कहा कि जब समाज में सकारात्मक सोच रखने वाले लोग एकजुट होंगे, तो बुराइयां स्वतः समाप्त होने लगेंगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे राम के आदर्शों को अपनाकर समाज सेवा के कार्यों में भागीदारी निभाएं।
भक्ति और नामस्मरण का महत्व
हनुमान जी के उदाहरण देते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। यही मन को शुद्ध करता है और जीवन को सही दिशा देता है।
यजमानों की सहभागिता से सजी कथा
आज के मुख्य यजमान के रूप में हरवीर मावी उपस्थित रहे, जबकि सह-यजमान के रूप में शेर सिंह भाटी और धीरज शर्मा ने कथा में सहभागिता निभाई। दैनिक यजमान के रूप में पीपी शर्मा जी ने अपनी श्रद्धा अर्पित की।
गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
कथा में वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल, स्वामी सुशील जी महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल, जिला प्रचारक नेमपाल, राजकुमार, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा (बदौली), उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान, अजय कसाना, पवन भाटी, राजेश नंबरदार, राकेश नंबरदार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भक्ति के साथ मिला जीवन का मार्गदर्शन
कथा के समापन पर वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
विश्लेषण (Vision Live)
राम कथा का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों के पुनर्जागरण का माध्यम बन रहा है। अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज के प्रवचनों ने यह स्पष्ट किया कि यदि समाज राम के आदर्शों—सत्य, सेवा, मर्यादा और संगठन—को अपनाता है, तो वर्तमान समय की कई सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव है।
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