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श्री राम कथा का सातवां दिन: राम वनवास प्रसंग ने भाव-विभोर किया, श्रोताओं की आँखें नम


      मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वाधान में रामलीला मैदान, ऐछर-बिरोड़ा सेक्टर पाई-1 में आयोजित भव्य श्री राम कथा के सातवें दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक परम पूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को भक्ति और भावनाओं के सागर में डुबो दिया। कथा के दौरान राम वनवास प्रसंग का मार्मिक वर्णन सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा और श्रोताओं की आँखें नम हो गईं।
कथा व्यास श्री भारद्वाज जी महाराज ने श्रीराम के आदर्श जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने पिता के वचन और कुल की मर्यादा की रक्षा हेतु राजपाट का त्याग कर वनगमन स्वीकार किया। यह प्रसंग हमें त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का सर्वोच्च संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो व्यक्ति को अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सर्वस्व त्याग करने का साहस रखना चाहिए।
महाराज जी ने राजा दशरथ के प्रसंग को वर्तमान समाज से जोड़ते हुए कहा कि बुजुर्गों को समय रहते अपनी जिम्मेदारियाँ अगली पीढ़ी को सौंपकर ईश्वर भक्ति में मन लगाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दिया कि शुभ कार्यों को टालना नहीं चाहिए, क्योंकि देरी के परिणाम अक्सर दुखद होते हैं।
माँ कौशल्या और माँ कैकेयी के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि जहाँ कौशल्या ने विषम परिस्थिति में भी धैर्य और मर्यादा का परिचय दिया, वहीं कैकेयी का कठोर निर्णय भी रामकथा को पूर्णता प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि यदि कैकेयी का वनवास प्रसंग न होता, तो रामराज्य की स्थापना और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का आदर्श स्वरूप संसार के सामने नहीं आ पाता।
कथा में लक्ष्मण जी के अद्वितीय भाई-प्रेम और समर्पण का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि भाई हो तो लक्ष्मण जैसा, जिन्होंने समस्त सुख-वैभव त्यागकर अपने बड़े भाई श्रीराम और माता सीता की सेवा को ही अपना जीवन बना लिया। वहीं माता सीता के त्याग और पतिव्रता धर्म की भी विस्तार से व्याख्या की गई।
हनुमान जी के चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसी प्रकार हमें भी समाज से भेदभाव, ऊँच-नीच और छुआछूत को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना ही सच्ची भक्ति है।
आज की कथा के मुख्य यजमान श्री हरवीर मावी रहे, जबकि सह-यजमान के रूप में शेर सिंह भाटी एवं धीरज शर्मा उपस्थित रहे। दैनिक यजमानों में विधायक नंद किशोर गुर्जर, सुरेंद्र शर्मा और अमित भाटी शामिल रहे।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल जी, स्वामी सुशील जी महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल जी, जिला प्रचारक नेमपाल जी, राजकुमार जी, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान, अजय कसाना, पवन भाटी, राजेश नंबरदार एवं राकेश नंबरदार सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कथा के अंत में समस्त श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया और वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।