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अमृतमयी रामकथा में भक्ति का सागर उमड़ा, “दीन-दुखियों की सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा” — अतुल कृष्ण भारद्वाज


    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा (ऐछर-बिरोड़ा)
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में रामलीला मैदान, ऐछर बिरोड़ा (सेक्टर पाई-1) में आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज की अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को भक्ति और भावनाओं के सागर में डुबो दिया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजते रहे।
कथाव्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं श्रीराम विवाह जैसे प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण और रोचक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को जनकपुरी लेकर पहुंचे, तब सीता स्वयंवर में कोई भी राजा शिव धनुष को नहीं तोड़ सका। ऐसे में गुरु की आज्ञा लेकर श्रीराम ने धनुष भंग किया, जो इस बात का प्रतीक था कि अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित है।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रसंग केवल संवाद नहीं, बल्कि धर्म और मर्यादा की स्थापना का संदेश है। अंततः परशुराम जी ने श्रीराम की दिव्यता को स्वीकार कर समाज की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी और स्वयं तप एवं भक्ति में लीन हो गए।
“सेवा ही सच्ची भक्ति” का संदेश
कथा के दौरान अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि भगवान कण-कण में विद्यमान हैं और उनकी सच्ची पूजा दीन-दुखियों, वनवासियों एवं वंचित वर्ग की सेवा में निहित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में फैली बुराइयों को केवल संगठित शक्ति के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि लोकनायक और भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीहनुमान जी की भक्ति, नाम स्मरण और कीर्तन को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा समाज से भेदभाव, ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प लें।
राम-विवाह प्रसंग ने बांधा समां
कथा को आगे बढ़ाते हुए व्यास जी ने श्रीराम विवाह का मनमोहक वर्णन किया। राजा जनक द्वारा भेजे गए निमंत्रण पर अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुरी पहुंचे, जहां पूरे हर्षोल्लास के साथ नृत्य-गायन हुआ। इस प्रसंग ने पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
यजमानों एवं श्रद्धालुओं की सहभागिता
आज की कथा के मुख्य यजमान हरवीर मावी तथा सह-यजमान शेर सिंह भाटी एवं धीरज शर्मा रहे। दैनिक यजमान के रूप में प्रमोद चौहान और चरणजीत नागर ने अपनी सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल, स्वामी सुशील महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल, जिला प्रचारक नेम पाल, राजकुमार, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान, अजय कसाना, पवन भाटी, राजेश नंबरदार एवं राकेश नंबरदार सहित अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विजन लाइव विश्लेषण
ऐछर-बिरोड़ा में आयोजित श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और एकता का सशक्त माध्यम बनती नजर आ रही है। अतुल कृष्ण भारद्वाज द्वारा दिए गए “सेवा ही भक्ति” के संदेश ने यह स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकजुटता को भी नई दिशा मिलती है।
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