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ताइक्वांडो में गाडे जीत के झंडे:--- “मोबाइल से दूरी, मैट पर मेहनत—अनुशासन और जुनून से गढ़ी सफलता की कहानी”

ग्रेटर नोएडा के वेदांत शर्मा ने ताइक्वांडो में फिर गाड़ा जीत का झंडा, स्वर्ण पदक के साथ बने नई पीढ़ी के रोल मॉडल
    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
आज के दौर में जहां अधिकांश बच्चे स्क्रीन और सोशल मीडिया में व्यस्त हैं, वहीं ग्रेटर नोएडा के युवा खिलाड़ी वेदांत शर्मा ने खेल के मैदान को अपना लक्ष्य बनाकर एक नई मिसाल पेश की है। सेक्टर-21A स्थित नोएडा इंडोर स्टेडियम में आयोजित वेस्टर्न उत्तर प्रदेश इंटर स्कूल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में कक्षा 9 के इस होनहार खिलाड़ी ने क्योरुगी स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास की उस यात्रा का परिणाम है, जिसे वेदांत ने कम उम्र में ही अपना जीवन बना लिया है।
मैट पर रणनीति, दिमाग और दम का अनोखा संगम
प्रतियोगिता के दौरान वेदांत का खेल पूरी तरह संतुलित और रणनीतिक नजर आया। उन्होंने हर मुकाबले में प्रतिद्वंद्वियों की कमजोरी को पहचानकर उसी के अनुसार अपने अटैक प्लान किए।
उनके तेज़ किक, सटीक टाइमिंग और मजबूत डिफेंस ने दर्शकों और निर्णायकों को प्रभावित किया।
खास बात यह रही कि दबाव के क्षणों में भी वेदांत ने संयम नहीं खोया, जो एक परिपक्व खिलाड़ी की पहचान है।
सुबह की कड़ी ट्रेनिंग से बनता है चैंपियन
वेदांत की दिनचर्या किसी प्रोफेशनल खिलाड़ी से कम नहीं है।
सुबह जल्दी उठकर फिटनेस ट्रेनिंग, उसके बाद स्कूल और शाम को घंटों तक ताइक्वांडो अभ्यास—यह उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा है।
डाइट, स्टैमिना और तकनीकी अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है।
जिले से अंतरराष्ट्रीय मंच तक—लगातार बढ़ते कदम
वेदांत शर्मा ने बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है।
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
पिछले वर्ष थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में दो पदक जीतना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
यह उपलब्धि न सिर्फ उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली रही, बल्कि क्षेत्र के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनी।
कोच की नजर में ‘फोकस्ड और डिसिप्लिन्ड खिलाड़ी’
वेदांत के कोच समरेंद्र ठाकुर ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका अनुशासन और सीखने की भूख है।
उन्होंने कहा,
“वेदांत हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। वह सिर्फ जीतने के लिए नहीं, बल्कि अपने खेल को समझने और सुधारने के लिए मेहनत करता है। यही सोच उसे आगे ले जाएगी।”
परिवार का मजबूत साथ—सफलता की नींव
किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके परिवार का बड़ा योगदान होता है।
वेदांत के माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखने में उसका साथ दिया और हर प्रतियोगिता में उसका हौसला बढ़ाया।
उनका मानना है कि बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
युवा पीढ़ी के लिए बड़ा संदेश
वेदांत की सफलता यह साबित करती है कि अगर सही दिशा, अनुशासन और समर्पण हो तो छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेल को करियर के रूप में अपनाना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों या आत्मविश्वास की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं।
ग्रेटर नोएडा—उभरता खेल हब
वेदांत जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि ग्रेटर नोएडा अब केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं का भी उभरता हब बन रहा है।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के अवसर यहां के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भविष्य का लक्ष्य—देश के लिए मेडल
वेदांत का अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
उनकी नजर अब एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर है।