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विश्व पुस्तक दिवस पर श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में साहित्यिक उत्सव, छात्रों ने दिखाया ज्ञान और अभिव्यक्ति का उत्साह

 मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन कॉलेज सचिव श्री रजनीकान्त अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करना और साहित्य के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में ज्ञान और संस्कृति की गरिमा का संचार हुआ। इसके बाद विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
इस अवसर पर छात्रों ने अपनी पसंदीदा पुस्तकों से पाठ एवं कविता वाचन प्रस्तुत कर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों पर चर्चा भी हुई, जिससे छात्रों को नए विचारों और दृष्टिकोणों से अवगत होने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने साहित्य के माध्यम से समाज, संस्कृति और जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अपने संबोधन में कहा कि “पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली सच्ची मार्गदर्शक होती हैं। विश्व पुस्तक दिवस हमें साहित्य के महत्व को समझने और पढ़ने की आदत को अपनाने का संदेश देता है।” उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेज भविष्य में भी इस प्रकार की साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देता रहेगा, ताकि छात्र ज्ञान और विचारों के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिखा रानी ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि “पुस्तकें केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण, विचारों की मशाल और संवेदनाओं की आवाज होती हैं। एक पुस्तक हमें दूसरों के अनुभवों से जोड़ती है और हमें बेहतर इंसान बनाती है।”
इस दौरान उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता, विभागाध्यक्ष डॉ. देवानन्द सिंह, डॉ. प्रीति रानी सेन, श्री अमित नागर, श्रीमती शशी नागर, डॉ. रश्मि जहाँ, डॉ. प्रशांत कन्नौजिया, डॉ. अज़मत आरा, डॉ. संगीता रावल, डॉ. राजीव (पिंटू), डॉ. सूर्यप्रताप राघव, कु. काजल कपासिया, डॉ. नीतू, डॉ. रेशा, श्रीमती सुनीता शर्मा, श्री इन्द्रजीत सिंह, कु. चारू सिंह, श्री अखिल कुमार, श्री प्रिंस त्यागी, श्री अजय कुमार, श्री करन नागर, श्री पुनीत कुमार गुप्ता, श्री मुकुल कुमार शर्मा, श्री रामकिशन, श्री विनीत कुमार, श्री अंकित कुमार, श्री ज्ञानप्रकाश सहित अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि उन्हें साहित्य के प्रति गहरी रुचि विकसित करने और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करने वाला भी रहा।