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ग्राउंड रिपोर्ट: जेवर की ग्राम चौपाल—महिला आरक्षण से लेकर जमीन के सवाल तक, कांग्रेस ने साधा बहुस्तरीय सियासी निशाना

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/गौतमबुद्धनगर
तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजनाओं के बीच जेवर क्षेत्र आज विकास और विस्थापन, दोनों के द्वंद्व से गुजर रहा है। ऐसे माहौल में ग्राम चांचली में आयोजित कांग्रेस की ग्राम चौपाल केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जमीनी असंतोष और राष्ट्रीय मुद्दों को जोड़ने की एक रणनीतिक राजनीतिक पहल के रूप में उभरी।
जेवर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस चौपाल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक अध्यक्ष सूबेदार सतपाल सिंह ने किया, जबकि जिला संगठन प्रभारी मुकेश शर्मा सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार घिरी
चौपाल में महिला आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। दीपक भाटी चोटीवाला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा इस संवेदनशील विषय को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि “महिला सशक्तिकरण केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि उसके ईमानदार क्रियान्वयन और सामाजिक स्तर पर अवसर सुनिश्चित करने से संभव है।”
उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
जेवर का ‘डेवलपमेंट बनाम डिस्प्लेसमेंट’ सवाल
चौपाल में सबसे ज्यादा गूंज स्थानीय मुद्दों की रही। एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित किसानों का पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण में मुआवजा, रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी।
ब्लॉक अध्यक्ष सूबेदार सतपाल सिंह ने कहा कि “सरकार बड़े-बड़े उद्घाटन और घोषणाओं में व्यस्त है, जबकि जमीन पर लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस इन मुद्दों को मजबूती से उठाएगी।
संगठन को ‘ग्राउंड मोड’ में लाने की कोशिश
जिला संगठन प्रभारी मुकेश शर्मा ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस की असली ताकत उसका कार्यकर्ता है, और जब तक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों से नहीं जुड़ेगा, तब तक राजनीतिक लड़ाई मजबूत नहीं होगी।”
यह बयान संगठन के अंदरूनी फोकस—कैडर एक्टिवेशन—को भी रेखांकित करता है।
ग्रामीणों की आवाज: मंच से ज्यादा संवाद
इस चौपाल की खासियत यह रही कि यह एकतरफा भाषणों तक सीमित नहीं रही। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं सीधे नेताओं के सामने रखीं—कहीं मुआवजे की देरी, कहीं रोजगार का अभाव, तो कहीं स्वास्थ्य और शिक्षा की कमी।
कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ऐसे मंच उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, जो आमतौर पर नहीं मिल पाता।
पॉलिटिकल मैसेज: लोकल + नेशनल का संगम
राजनीतिक विश्लेषण के नजरिए से देखें तो यह चौपाल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नजर आती है—जहां कांग्रेस ने महिला आरक्षण जैसे राष्ट्रीय मुद्दे को स्थानीय असंतोष के साथ जोड़कर एक व्यापक नैरेटिव बनाने की कोशिश की।
जेवर, जो भविष्य में एक बड़े आर्थिक हब के रूप में उभर रहा है, वहां इस तरह की सक्रियता आगामी चुनावी समीकरणों के संकेत भी देती है।
उपस्थित प्रमुख लोग:
सूबेदार सतपाल सिंह (ब्लॉक अध्यक्ष), मुकेश शर्मा (जिला संगठन प्रभारी), हरेन्द्र शर्मा, सुरेंद्र प्रताप सिंह, धर्म सिंह, श्रुति कुमारी, बिन्नू भाटी, नीरज लोहिया, सतीश शर्मा, रघुराज शर्मा, नरेश शर्मा, रामकिशन एडवोकेट, सुनील प्रधान, अजय अत्तरी, बिजेन्द्र छोंकर, बृजेश छोंकर, रंजीत सिंह, जादूगर खान, पंकज छोंकर, हनी सोम, ऐरन कुमार, दुष्यंत, अजीत चौहान, नरेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष (ग्राउंड संकेत):
ग्राम चांचली की यह चौपाल साफ संकेत देती है कि जेवर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गांवों में भी मुद्दों और संवाद के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज हो गई है। आने वाले समय में यह सक्रियता किस दिशा में जाती है, यह क्षेत्र की सियासत के लिए अहम होगा।