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शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी का एजेंडा: साकीपुर की चौपाल से गुर्जर महासभा का बड़ा संदेश

        मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के साकीपुर गांव की चौपाल पर आयोजित अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का स्वागत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच बनकर उभरा। इस आयोजन ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब गुर्जर समाज शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के त्रिस्तरीय एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं शिक्षाविद् बृजपाल भाटी एडवोकेट ने जहां समाज को एकजुट करने की भूमिका निभाई, वहीं मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आने वाला समय “शिक्षित बनो, संगठित रहो और शासक बनो” की विचारधारा का होगा।
उन्होंने कहा कि महासभा का मूल उद्देश्य समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, क्योंकि बिना शिक्षा के न तो संगठन मजबूत हो सकता है और न ही राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है। यही कारण है कि अब महासभा गांव-गांव तक इस संदेश को पहुंचाने का अभियान चला रही है।
कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश विकल, सविंद्र भाटी, राष्ट्रीय महासचिव रामकेश चपराना, उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष मनवीर नागर, योगाचार्य प्रेम सिंह योगी (तिलपता) और वरिष्ठ भाजपा नेता बिजेंद्र भाटी (साकीपुर) ने भी अपने विचार रखते हुए समाज में एकता और जागरूकता को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र चौधरी ने किया। इस अवसर पर श्यामवीर भाटी, दीपक भाटी (चीरसी) सहित कई गणमान्य लोगों ने महासभा की भूमिका और उसके बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने आने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। उन्होंने बताया कि 9 और 10 मई को नोएडा में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से लगभग 200 प्रतिनिधि शामिल होकर भविष्य की रणनीति तय करेंगे। इसके अलावा मई के अंतिम सप्ताह में लखनऊ में एक विशाल स्वाभिमान रैली आयोजित करने की योजना है।
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा 31 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित महा-सम्मेलन को लेकर की गई, जहां सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर करीब एक लाख लोगों के जुटने का लक्ष्य रखा गया है। इस मंच से समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं, जिसमें एक नए राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
साकीपुर की चौपाल से उठी यह आवाज अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत दे रही है कि गुर्जर समाज अब अपने अधिकार, पहचान और हिस्सेदारी के लिए संगठित रूप से राष्ट्रीय स्तर पर नई रणनीति बनाने की दिशा में बढ़ चुका है।