BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

“सेवा से सम्मान तक: दनकौर वृद्धाश्रम में ‘सुविधा’ नहीं, ‘सम्मान’ पहुंचाने की पहल”


मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/  गौतमबुद्धनगर 
अक्सर समाज में बुजुर्गों की सेवा को केवल जिम्मेदारी माना जाता है, लेकिन कुछ संगठन इसे अपना धर्म मानकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी सोच को साकार करते हुए रोटरी क्लब ग्रेटर नोएडा और भारत विकास परिषद, गौतमबुद्धनगर शाखा ने दनकौर स्थित जन कल्याण वृद्धाश्रम में एक सराहनीय पहल की, जहां उन्होंने बुजुर्गों के जीवन को थोड़ा और सहज बनाने के उद्देश्य से 1 वॉशिंग मशीन और 6 कूलर भेंट किए।
यह पहल केवल वस्तुओं के वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके पीछे एक संवेदनशील सोच छिपी है—“बुजुर्गों को सुविधा नहीं, सम्मान देना।” वृद्धाश्रम में रह रहे करीब 75 पुरुष और महिलाएं लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे थे। गर्मी के बढ़ते प्रकोप और दैनिक जीवन की कठिनाइयों को देखते हुए यह सहयोग उनके लिए किसी राहत से कम नहीं।
कार्यक्रम के दौरान एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जब कई बुजुर्गों की आंखों में खुशी और कृतज्ञता के आंसू झलक उठे। उन्होंने न केवल इस सहयोग के लिए आशीर्वाद दिया, बल्कि यह भी कहा कि समाज का यह साथ उन्हें यह एहसास कराता है कि वे आज भी अकेले नहीं हैं।
इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों—मुकुल गोयल, शुभम सिंघल, आलोक गोयल, कपिल गर्ग, मनु जिंदल, अनूप वर्मा, पदमा वर्मा, कपिल शर्मा, तरंग तायल, शुभम गोयल, राकेश शर्मा, नरेश मित्तल, नवीन चिकारा आदि—ने व्यक्तिगत रूप से बुजुर्गों से संवाद किया और उनकी जरूरतों को समझने का प्रयास भी किया।
सामाजिक संदेश का मजबूत एंगल
आज जब परिवारों का ढांचा तेजी से बदल रहा है और बुजुर्ग अक्सर उपेक्षा का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह पहल समाज के लिए एक मजबूत संदेश देती है—“बुजुर्ग बोझ नहीं, हमारी जड़ों की पहचान हैं।”
यह आयोजन न केवल सेवा का उदाहरण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाने का प्रयास भी है कि असली प्रगति वही है, जिसमें समाज के हर वर्ग का सम्मान सुनिश्चित हो।
कार्यक्रम के अंत में भारत विकास परिषद के अध्यक्ष मुकुल गोयल ने कहा कि संस्था आगे भी ऐसे कार्यों को निरंतर जारी रखेगी, ताकि जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके और समाज में सेवा की भावना को और मजबूत किया जा सके।
"विजन लाइव" का विश्लेषण
दनकौर के इस छोटे से वृद्धाश्रम में हुई यह पहल एक बड़ी सोच का प्रतीक बन गई है—जहां सेवा के माध्यम से न केवल जीवन आसान किया गया, बल्कि बुजुर्गों के चेहरे पर सम्मान और अपनत्व की मुस्कान भी लौटाई गई।