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“कक्षा से मंच तक: मंजू शर्मा की विदाई नहीं, एक युग का सम्मान”

    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी (गौतमबुद्धनगर)
वैदिक कन्या इंटर कॉलेज, दादरी में बुधवार को एक भावुक, गरिमामय और सांस्कृतिक रंगों से सजी संध्या उस समय इतिहास का हिस्सा बन गई, जब शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ शिक्षिका और लोकसंस्कृति की सशक्त हस्ताक्षर मंजू शर्मा के सेवानिवृत्ति अवसर पर भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिक्षा और लोककला के अद्वितीय संगम को नमन करने का अवसर बन गया।
कार्यक्रम का विशेष एंगल यह रहा कि मंजू शर्मा को सिर्फ एक शिक्षिका के रूप में नहीं, बल्कि “कक्षा से मंच तक समाज को गढ़ने वाली शख्सियत” के रूप में प्रस्तुत किया गया—जहाँ शिक्षा, संस्कृति और संवेदनाओं का त्रिवेणी रूप स्पष्ट दिखाई दिया।
🌺 विदाई में झलका सम्मान और भावनाओं का सागर
विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में छात्राओं, सहकर्मियों, स्थानीय गणमान्य नागरिकों और सांस्कृतिक प्रेमियों की उपस्थिति ने माहौल को अत्यंत भावुक बना दिया। जैसे ही मंच से मंजू शर्मा के योगदानों का उल्लेख हुआ, सभागार तालियों से गूंज उठा। कई छात्राएं भावुक होकर अपने अनुभव साझा करती नजर आईं—किसी ने उन्हें “मां समान मार्गदर्शक” बताया तो किसी ने “जीवन को दिशा देने वाली गुरु”।
🎭 रागिनी और शिक्षा—दो धाराओं को जोड़ा
मंजू शर्मा की पहचान केवल एक शिक्षिका तक सीमित नहीं रही। उन्होंने हरियाणवी रागिनी परंपरा को जिस समर्पण और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया, वह अपने आप में मिसाल है। उनके द्वारा प्रस्तुत रागिनियाँ सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन की संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक चेतना का सशक्त प्रतिबिंब रहीं।
विशेष बात यह रही कि उन्होंने इन लोककलाओं को विद्यालयी वातावरण में भी स्थान दिया, जिससे छात्राओं में न केवल शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ी, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी मजबूत हुआ।
📚 शिक्षा को बनाया जीवन निर्माण का माध्यम
अपने लंबे शिक्षकीय कार्यकाल में मंजू शर्मा ने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास को प्राथमिकता दी। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाली अनेक छात्राएं आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रही हैं।
सहकर्मियों ने बताया कि वे हमेशा नवाचार, अनुशासन और संवेदनशीलता का अद्भुत संतुलन बनाए रखती थीं। उनकी कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा मिलती थी।
🌿 लोकसंस्कृति के संरक्षण में अहम भूमिका
लोक-रंगमंच और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने क्षेत्र में लोकपरंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा दी। उनके अभिनय और गायन में जो सहजता और गहराई थी, उसने हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मंजू शर्मा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षा और संस्कृति साथ चलते हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आता है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक दीपक की तरह रहेगा।
🔍 विजन लाइव का विश्लेषण
विजन लाइव के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मंजू शर्मा की सेवानिवृत्ति केवल एक व्यक्तिगत या संस्थागत घटना नहीं, बल्कि स्थानीय समाज में शिक्षा और लोकसंस्कृति के समन्वय की एक सशक्त मिसाल है। आज के दौर में जहाँ आधुनिकता के प्रभाव में पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे हाशिए पर जा रही हैं, वहीं मंजू शर्मा जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध करते हैं कि यदि शिक्षा के साथ संस्कृति को जोड़ा जाए, तो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखना संभव है।
यह आयोजन इस बात का भी संकेत देता है कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान देने के केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के महत्वपूर्ण मंच भी बन सकते हैं। 
विजन लाइव मानता है कि यदि ऐसे शिक्षकों के अनुभव और दृष्टि का उपयोग सेवानिवृत्ति के बाद भी नीति-निर्माण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षिक मार्गदर्शन में किया जाए, तो यह समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।