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चैनपाल प्रधान की पहल बनी प्रेरणा: सँविलय विद्यालय बिरौडा में मेधावी व अनुशासित छात्रों का सम्मान

  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा के सँविलय विद्यालय बिरौडा में आयोजित वार्षिक परीक्षाफल वितरण समारोह इस बार एक विशेष संदेश के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और नियमितता को भी समान महत्व दिया गया। इस सराहनीय पहल के केंद्र में रहे चैनपाल प्रधान, जिनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से कार्यक्रम को एक अलग पहचान मिली।
समारोह में उन छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने पूरे वर्ष बिना किसी अवकाश के विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई, नियमित रूप से स्कूल ड्रेस में आए और साथ ही परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। ऐसे विद्यार्थियों को निःशुल्क कॉपी-किताबें एवं अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर चैनपाल प्रधान ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि “सफलता केवल अच्छे अंकों से नहीं, बल्कि अनुशासन और निरंतरता से प्राप्त होती है। जो छात्र पूरे वर्ष नियमित रूप से विद्यालय आते हैं, वही जीवन में आगे बढ़ने की असली क्षमता रखते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी यह पहल बच्चों में जिम्मेदारी और शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने के उद्देश्य से की गई है।
विद्यालय की प्रधानाचार्य सावित्री गुप्ता ने चैनपाल प्रधान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सोच के कारण ही विद्यालय में इस प्रकार के सकारात्मक बदलाव संभव हो पा रहे हैं। उन्होंने छात्रों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
समारोह में उपस्थित शिक्षकगण एवं अभिभावकों ने भी चैनपाल प्रधान की इस पहल को सराहा और इसे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। अभिभावकों का मानना है कि इस प्रकार की पहल से बच्चों में अनुशासन, नियमितता और प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है।
विजन लाइव का विश्लेषण:
सँविलय विद्यालय बिरौडा में आयोजित यह कार्यक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जब समाज के जिम्मेदार प्रतिनिधि, जैसे चैनपाल प्रधान, शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो सकारात्मक बदलाव स्वतः दिखाई देने लगते हैं।
चैनपाल प्रधान द्वारा अनुशासन और नियमितता को प्रोत्साहित करने की यह पहल शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करती है। यह न केवल छात्रों को प्रेरित करती है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश देती है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अंक नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का निर्माण है।