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AKMUN 2026: एक्यूरेट इंस्टीट्यूट में ‘यंग डिप्लोमेसी’ का महाकुंभ, पहले दिन बहस, रणनीति और नेतृत्व का दिखा दम


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
एक्यूरेट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित AKMUN 2026 का पहला दिन सिर्फ एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं की बौद्धिक ऊर्जा, कूटनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रदर्शन बनकर सामने आया। जैसे ही सम्मेलन का आगाज हुआ, कैंपस एक मिनी-यूनाइटेड नेशंस में तब्दील हो गया, जहां हर प्रतिभागी एक देश, एक विचारधारा और एक जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करता नजर आया।
शुरुआत से ही हाई-एनर्जी: रजिस्ट्रेशन से कमेटी सेशन तक
सुबह से ही प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था। रजिस्ट्रेशन डेस्क पर पहुंचते ही छात्रों में एक अलग तरह की ऊर्जा दिखाई दी।
उद्घाटन सत्र में आयोजन के उद्देश्यों, नियमों और वैश्विक मुद्दों की गंभीरता पर प्रकाश डाला गया, जिसके बाद प्रतिभागी अपनी-अपनी समितियों में पहुंचे और असली ‘डिप्लोमेसी गेम’ की शुरुआत हुई।
तीन समितियां, तीन अलग दृष्टिकोण—एक ही लक्ष्य: समाधान
AKMUN 2026 में तीन प्रमुख समितियों का गठन किया गया, जिनमें हर एक का अपना अलग स्वर और विषय रहा:
1. लोकसभा (Lok Sabha):
यहां भारतीय लोकतंत्र की झलक देखने को मिली। प्रतिभागियों ने सत्ता और विपक्ष की भूमिका निभाते हुए नीतियों, विकास और सामाजिक मुद्दों पर जोरदार बहस की। सवाल-जवाब, तर्क-वितर्क और संसदीय भाषा का अनुशासन—सब कुछ एक वास्तविक संसद जैसा महसूस हुआ।
2. UNCSW (महिला स्थिति आयोग):
इस समिति में महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने डेटा, उदाहरण और वैश्विक रिपोर्ट्स के आधार पर अपने पक्ष रखे, जिससे बहस का स्तर काफी उच्च रहा।
3. UNHRC (मानवाधिकार परिषद):
मानवाधिकार उल्लंघन, शरणार्थी संकट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। यहां प्रतिभागियों ने कूटनीतिक भाषा और संतुलित दृष्टिकोण का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
डेलीगेट’ नहीं, भविष्य के नीति-निर्माता नजर आए छात्र
पहले दिन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रतिभागी केवल औपचारिकता निभाते नहीं दिखे, बल्कि उन्होंने अपने रोल को पूरी गंभीरता से जिया।
किसी ने अपने देश के हितों की रक्षा के लिए लॉबिंग की, तो किसी ने गठबंधन बनाकर प्रस्ताव को मजबूत किया।
रिजोल्यूशन ड्राफ्टिंग, मॉडरेटेड और अनमॉडरेटेड कॉकस, पॉइंट्स ऑफ इंफॉर्मेशन जैसे MUN के सभी पहलुओं को छात्रों ने बखूबी अपनाया।
एक्यूरेट के छात्रों के लिए ‘रियल-टाइम लर्निंग लैब’
एक्यूरेट इंस्टीट्यूट के छात्रों के लिए यह आयोजन किसी ‘लाइव क्लासरूम’ से कम नहीं रहा।
उन्होंने न केवल भागीदारी की, बल्कि आयोजन प्रबंधन, समन्वय और तकनीकी संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
इससे उन्हें
इवेंट मैनेजमेंट की समझ
टीम कोऑर्डिनेशन
निर्णय लेने की क्षमता
दबाव में काम करने का अनुभव
जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने का मौका मिला।
आयोजन टीम की मजबूत पकड़—पहले ही प्रयास में शानदार सफलता
AKMUN 2026 का यह पहला संस्करण होने के बावजूद इसकी गुणवत्ता और अनुशासन ने सभी को प्रभावित किया।
इसका श्रेय जाता है आयोजक आन्या कपूर (फाउंडर एवं सेक्रेटरी जनरल) को, जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक प्रोफेशनल और प्रभावशाली मंच तैयार किया।
समय प्रबंधन, कमेटी फ्लो, डेलीगेट एंगेजमेंट और कंटेंट क्वालिटी—हर पहलू पर आयोजन टीम की पकड़ साफ नजर आई।
संस्थान का विज़न: किताबों से आगे ‘ग्लोबल एक्सपोजर’
चेयरपर्सन पूनम शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों को सिर्फ अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर सोचने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का अवसर देते हैं।
उन्होंने आयोजक टीम की सराहना करते हुए कहा कि AKMUN जैसे प्लेटफॉर्म भविष्य के लीडर्स तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
नेटवर्किंग, कॉन्फिडेंस और एक्सपोजर—तीनों का संगम
AKMUN 2026 केवल बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नेटवर्किंग और एक्सपोजर का भी बड़ा मंच बना।
विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों से आए छात्रों ने एक-दूसरे के साथ विचार साझा किए, नए कनेक्शन बनाए और अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाया।
दूसरे दिन पर टिकी नजरें
पहले दिन की शानदार सफलता के बाद अब सभी की निगाहें दूसरे दिन पर हैं, जहां
अंतिम बहसें
रिजोल्यूशन पासिंग
अवॉर्ड सेरेमनी
का आयोजन होगा।
प्रतिभागियों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा।
"विजन लाइव" का विश्लेषण: ग्रेटर नोएडा में उभरती ‘डिप्लोमेसी कल्चर’
AKMUN 2026 ने यह साबित कर दिया है कि ग्रेटर नोएडा के शैक्षणिक संस्थान अब केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छात्रों को वैश्विक नागरिक बनाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास कर रहे हैं।
यह आयोजन आने वाले समय में एक परंपरा बन सकता है, जो हर साल युवाओं को एक ऐसा मंच देगा, जहां वे न केवल बोलेंगे, बल्कि सोचेंगे, समझेंगे और समाधान भी निकालेंगे।
AKMUN 2026 का पहला दिन एक संदेश दे गया—अगर मंच सही हो, तो युवा सिर्फ भाग लेते नहीं, इतिहास भी लिखते हैं।