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लिवर हेल्थ का ABCD फॉर्मूला अपनाएं: स्वस्थ जीवन की आसान और असरदार कुंजी

साइड इफेक्ट: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ‘साइलेंट लिवर क्राइसिस’
  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ नोएडा एक्सटेंशन
तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और असंतुलित खानपान अब युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं। इसी कड़ी में लिवर से जुड़ी बीमारियां एक “साइलेंट लिवर क्राइसिस” के रूप में उभर रही हैं। यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी विभाग के निदेशक डॉ. राकेश कुमार जगदीश ने वर्ल्ड लीवर डे के अवसर पर इस बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
डॉ. जगदीश के अनुसार, आज के समय में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) सबसे तेजी से फैलने वाली लिवर बीमारी बन चुकी है। यह समस्या मुख्य रूप से मोटापा, डायबिटीज, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खानपान से जुड़ी हुई है। इसके अलावा अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरल संक्रमण, तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सेवन भी लिवर के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले लिवर संबंधी बीमारियां आमतौर पर 40–50 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 20–30 वर्ष के युवा और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। “यह बदलाव हमारी दैनिक आदतों का सीधा परिणाम है, जिसे समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।
‘साइलेंट डिजीज’ जो देर से पकड़ में आती है
लिवर रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इनके शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। यही कारण है कि इन्हें “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है। लगातार थकान, भूख में कमी, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द, मतली और अचानक वजन में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। उन्नत अवस्था में पीलिया, गहरे रंग का पेशाब और पेट में सूजन जैसे लक्षण सामने आते हैं।
युवाओं में तेजी से बढ़ते मामले
यथार्थ हॉस्पिटल के ओपीडी आंकड़ों के अनुसार, आने वाले कुल मरीजों में लगभग 20–30% लोग किसी न किसी लिवर समस्या से ग्रसित पाए जाते हैं। इनमें से 40–50% मरीज 40 वर्ष से कम आयु के हैं, जो इस समस्या के तेजी से युवा वर्ग में फैलने की ओर संकेत करता है। अधिकांश मामलों में फैटी लिवर प्रमुख कारण होता है, जिसे शुरुआती स्तर पर रोका और ठीक किया जा सकता है।
खानपान और जीवनशैली की अहम भूमिका
डॉ. जगदीश ने स्पष्ट किया कि प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक चीनी, जंक फूड और अनहेल्दी फैट्स लिवर में वसा जमा करते हैं, जिससे फैटी लिवर की समस्या बढ़ती है। इसके विपरीत संतुलित आहार—जिसमें फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों—लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि लिवर की बीमारियों से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं। नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, शराब से दूरी, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों से परहेज और हेपेटाइटिस B का टीकाकरण बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
लिवर हेल्थ का ABCD फॉर्मूला
डॉ. राकेश कुमार जगदीश ने स्वस्थ लिवर के लिए एक सरल और प्रभावी “ABCD फॉर्मूला” अपनाने की सलाह दी—
A – एक्टिव रहें: रोजाना कम से कम 30–45 मिनट व्यायाम करें
B – बैलेंस्ड डाइट लें: प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन और कम प्रोसेस्ड फूड
C – चेकअप कराएं: नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज न करें
D – ड्रिंक पर्याप्त तरल: दिनभर में कम से कम 2.5–3 लीटर पानी पिएं
इसके अलावा प्रतिदिन 7 घंटे की पर्याप्त नींद लेना, मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाना और शराब के सेवन से बचना भी लिवर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।
समय रहते सावधानी ही सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो लिवर से जुड़ी अधिकांश समस्याओं को रोका जा सकता है। “लिवर हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो बिना शिकायत के लगातार काम करता रहता है—इसलिए इसकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है,” डॉ. जगदीश ने कहा।
यह चेतावनी स्पष्ट है—अगर आज नहीं संभले, तो ‘साइलेंट लिवर क्राइसिस’ आने वाले समय में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।