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बाराही मेला-2026: लोकसंस्कृति, इतिहास, सामाजिक चेतना और जनभागीदारी का भव्य संगम बना सूरजपुर

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
सूरजपुर में आयोजित प्राचीन एवं ऐतिहासिक बाराही मेला-2026 इस वर्ष एक बहुआयामी आयोजन के रूप में सामने आया, जहां लोककला, आस्था, इतिहास और सामाजिक जागरूकता एक साथ देखने को मिली। 10 अप्रैल की सांस्कृतिक संध्या में कालू इंदौर व राधा चौधरी एंड पार्टी की प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं मंच से दिए गए सामाजिक संदेशों और बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह ने इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक उत्सव का रूप दे दिया।
रागनियों में दिखा लोकजीवन का रंग
कालू इंदौर और राधा चौधरी की जोड़ी ने ‘रूप बसंत’ और ‘रानी पद्मावती’ जैसे लोकप्रचलित किस्सों को जीवंत करते हुए रागनी की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ‘बागडो-बागडी’ की चटकीली प्रस्तुति ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से दर्शकों को बांधे रखा। वहीं पायल चौधरी और छाया चौधरी के नृत्य ने कार्यक्रम में जोश और ऊर्जा भर दी।
इतिहास और आस्था का जीवंत मंच
कार्यक्रम के दौरान शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी (प्रधान), महासचिव ओमवीर बैसला और कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल ने बाराही मेले की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। पुलस्त्य मुनि के तपोवन से लेकर विश्रवा ऋषि की तपस्थली, बिसरख को रावण की जन्मस्थली और चमत्कारिक सरोवर जैसी मान्यताओं ने इस आयोजन को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया।
सामाजिक संदेशों का प्रभाव
मुख्य अतिथि नीरज सरपंच (नवादा) ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल पर जोर दिया। वहीं मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने नशा मुक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि जो लोग नशा छोड़ने का संकल्प लेंगे, उन्हें अगले वर्ष विशेष सम्मान दिया जाएगा।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भागीदारी ने इन संदेशों को नई दिशा दी। अनिल भाटी की टीम से गौरव बैसला और निशांत सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से युवाओं को आकर्षित किया और समाज को सकारात्मक दिशा में प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथियों और समाज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में राष्ट्रीय वीर गुर्जर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनू गुर्जर सहित कई महिला पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सोनू गुर्जर ने गुर्जर समाज के ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान भूमिका पर प्रकाश डालते हुए समाज की एकता पर जोर दिया।
इसके अलावा कार्यक्रम में नीरज सरपंच (नवादा), राष्ट्रीय प्रवक्ता किसान यूनियन अजगर शक्ति, विवेक कसाना और धर्मी भाटी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान—संगठन की ताकत
शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा उन कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने मेले की व्यवस्थाओं में अहम भूमिका निभाई। इनमें धर्मवीर तंवर, भीम खारी, तोलाराम, राजपाल भडाना, दीपक भाटी एडवोकेट, सचिन भाटी, रविंद्र मास्टर, सुनील शर्मा, मूलचंद शर्मा, अजय शर्मा एडवोकेट, अवनीश सक्सेना, राजवीर शर्मा, हरीश नागर, हरिकिशन, राकेश भाटी और सुभाष शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके साथ ही समिति के अन्य पदाधिकारी—प्रचार मंत्री पवन जिंदल, उपकोषाध्यक्ष योगेश अग्रवाल, उप प्रचार मंत्री हरिकिशन, सह मीडिया प्रभारी सुभाष शर्मा (जींस वाले), सदस्य सुनील सैनिक—भी पूरे आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आए।
जनसैलाब ने बनाया आयोजन को जनउत्सव
मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की उपस्थिति ने इसे एक जनउत्सव का रूप दे दिया। आसपास के गांवों और क्षेत्रों से आए लोगों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि बाराही मेला आज भी जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
डिजिटल युग में लोक परंपरा का विस्तार
इस बार मेले में सोशल मीडिया की भूमिका भी विशेष रही। विभिन्न इन्फ्लुएंसर्स द्वारा लाइव प्रसारण और वीडियो साझा करने से यह आयोजन दूर-दराज के लोगों तक भी पहुंचा, जिससे लोककला को नई पहचान मिली।
आगे की झलक: परंपरा जारी
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा के अनुसार 12 अप्रैल को संतराज नागर, कुमारी सुक्कू राजस्थानी एंड पार्टी के कलाकार—मित्रपाल भड़ाना, मन्नू चौधरी, सपना स्वामी, मुस्कान बेबी, संतराज नागर एवं पप्पू—अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिससे मेले की सांस्कृतिक श्रृंखला और भी समृद्ध होगी।
विजन एंगल (विश्लेषण):
बाराही मेला-2026 यह दर्शाता है कि पारंपरिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और दिशा देने का सशक्त प्लेटफॉर्म भी बन सकते हैं।
यह आयोजन चार प्रमुख स्तंभों पर खड़ा नजर आता है—
लोकसंस्कृति का संरक्षण
इतिहास और आस्था का पुनर्स्मरण
सामाजिक सुधार (नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण)
सामूहिक भागीदारी और संगठन की शक्ति
सूरजपुर का बाराही मेला अब केवल एक क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए समाज को जोड़ने का कार्य कर रहा है।