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बाराही मेला–2026: सूरजपुर में उमड़ा जनसैलाब, लोकसंस्कृति, रागनियों और नृत्य ने रची अविस्मरणीय सांझ


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा)
प्राचीन एवं ऐतिहासिक बाराही मेला–2026 इस वर्ष न केवल आस्था और परंपरा का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह क्षेत्रीय लोकसंस्कृति, कला और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव भी सिद्ध हो रहा है। रविवार, 12 अप्रैल की शाम इस भव्य मेले के नाम एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जब हजारों की संख्या में लोगों ने मेले में पहुंचकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया।
रविवार होने के कारण सुबह से ही मेला परिसर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। बच्चे झूलों और खिलौनों की दुकानों पर उत्साह से झूमते नजर आए, वहीं महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर खरीदारी में व्यस्त दिखीं। बुजुर्ग भी इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनते हुए पुराने दिनों की यादों में खोए नजर आए। पूरा वातावरण मानो एक जीवंत लोकचित्र की तरह प्रतीत हो रहा था, जिसमें हर रंग, हर भावना और हर वर्ग की सहभागिता स्पष्ट झलक रही थी।
सायंकालीन सांस्कृतिक मंच पर जैसे ही कार्यक्रमों का आगाज हुआ, पूरा पंडाल दर्शकों से खचाखच भर गया। हरियाणवी और राजस्थानी लोकधारा की मिठास से सराबोर इस संध्या में प्रसिद्ध रागनी गायक संतराज नागर ने अपनी दमदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महाभारत के द्रोपदी चीर हरण प्रसंग पर आधारित उनकी रागनी—
“दुर्योधन बढ़-बढ़ के बोले, सब खामोश पति जी…”
ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। उनकी आवाज की गूंज और भावाभिव्यक्ति ने दर्शकों को तालियों से स्वागत करने पर मजबूर कर दिया।
इस मंच पर उभरती प्रतिभाओं ने भी अपनी छाप छोड़ी। बाल कलाकार कुमारी खुशी ने अपनी मधुर और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति यह दर्शाने के लिए पर्याप्त थी कि हमारी लोकसंस्कृति की विरासत सुरक्षित हाथों में है।
लोकगायिका कुमारी सक्कू राजस्थानी ने कर्म और भाग्य जैसे गहन विषयों को अपनी रागनियों के माध्यम से सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नौरतन के किस्सों पर आधारित उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को लोककथाओं की दुनिया में पहुंचा दिया। उनकी प्रस्तुति में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।
कार्यक्रम में मित्रपाल भड़ाना और बेबी मुस्कान की जोड़ी ने नोकझोंक और सवाल-जवाब की शैली में रागनी प्रस्तुत कर माहौल को हल्का-फुल्का और हास्यपूर्ण बना दिया। दर्शकों की हंसी और तालियों ने इस प्रस्तुति को विशेष बना दिया। इसी क्रम में बेबी मुस्कान और मन्नू चौधरी ने अपने मनमोहक नृत्य से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। उनके ऊर्जावान नृत्य ने पूरे पंडाल को रोमांच और उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। मुख्य अतिथि के रूप में नवीन शर्मा (मसौता), नेहा नागर (असिस्टेंट कमिश्नर, GST), निधि नागर, जगबीर भाटी, सविंद्र भाटी, के.पी. कसाना, लाल बहार (DSP, NHRC – प्रेरक ग्राम पाठशाला), राजवीर पटवारी और मनोज बैसला उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक अनीश कॉमेडी टीम, नितिन शर्मा (मारकपुरिया) और संदीप मावी (मतनौरा) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अतिथियों ने अपने संबोधन में बाराही मेले को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे ग्रहण करता है वही जीवन में आगे बढ़ता है।” उनके विचारों ने विशेषकर युवाओं को प्रेरित किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में शिव मंदिर सेवा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी (प्रधान), महासचिव ओमवीर बैसला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल, मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा सहित विजेंद्र ठेकेदार, जगदीश भाटी (एडवोकेट), विनोद सिकंदराबादी, पवन जिंदल, योगेश अग्रवाल, सुभाष शर्मा, लीलू भगत जी, राजवीर शर्मा, हरिकिशन आदि पदाधिकारी पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय रूप से व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों एवं कलाकारों का माल्यार्पण कर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
बाराही मेला–2026 यह साबित कर रहा है कि यह केवल एक पारंपरिक मेला नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कृति को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम है। जिस प्रकार से रविवार को भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की, वह इस मेले की लोकप्रियता और सामाजिक महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।