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सूरजपुर बाराही मेला-2026: जहां सुर, शब्द, चौपाल और दंगल ने मिलकर रची जीवंत भारतीय संस्कृति की अनोखी तस्वीर

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा )
तेजी से बदलती दुनिया और डिजिटल जीवनशैली के बीच यदि कहीं परंपरा, अपनापन और सांस्कृतिक जीवंतता एक साथ देखने को मिलती है, तो वह है—सूरजपुर का प्राचीन एवं ऐतिहासिक बाराही मेला-2026। शनिवार की शाम यहां केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, लोक परंपराओं और आधुनिक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जब गीतों ने बांध दिया समां
शाम का सबसे खास और भावनात्मक क्षण तब आया, जब हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार ‘गीत ऋषि’ संतोष आनंद मंच पर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने “एक प्यार का नगमा है...” की मधुर प्रस्तुति दी, पूरा मेला प्रांगण एक सुर में गूंज उठा। ऐसा लगा मानो समय ठहर गया हो और हर व्यक्ति अपने अतीत की सुनहरी यादों में खो गया हो।
संतोष आनंद की सादगी, उनकी आवाज का जादू और गीतों की गहराई ने हर वर्ग के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक जीवंत प्रवाह थी।
कविता के रंग: हंसी, व्यंग्य और संवेदना
इस सांस्कृतिक संध्या में काव्य का रंग भी उतना ही गहरा रहा। कवि अक्षय शर्मा ने जीवन के उतार-चढ़ाव को शब्दों में पिरोते हुए “पाकर खोना है…” जैसी पंक्तियों से दर्शकों के दिलों को छू लिया।
मुकेश शर्मा ने अपने अनोखे अंदाज में क्रिकेट और जीवन की समानताओं को प्रस्तुत कर दर्शकों को हंसाया भी और सोचने पर भी मजबूर किया। दिल्ली से आए कवि दीपक सैनी ने राजनीतिक हस्तियों की सटीक मिमिक्री के साथ काव्य पाठ कर ऐसा माहौल बनाया कि पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
कवि वैभव शर्मा और भगवत शर्मा ने भी अपनी चुटीली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं अमित शर्मा के ओजपूर्ण काव्य ने वीर रस का संचार किया और वातावरण में जोश भर दिया। कवयित्री शिखा दीप्ति की ग़ज़लों ने इस रंगीन शाम को भावनात्मक गहराई दी—उनकी पंक्तियां लंबे समय तक श्रोताओं के मन में गूंजती रहीं।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अन्नू पहलवान (गौ सेवक) उपस्थित रहे। उनके साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एवं कलाकार मोनिका नागर, पूजा भाटी, गायक अमित गुर्जर और कलाकार मुस्कान की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा सभी अतिथियों का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। साथ ही मंच पर पधारे संतोष आनंद सहित सभी कवियों को भी सम्मानित किया गया, जो कला और साहित्य के प्रति समिति की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सफल आयोजन के पीछे सक्रिय टीम
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में शिव मंदिर सेवा समिति के अनेक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर सचिन भाटी, अवनीश अवस्थी, रविंद्र मास्टर, अवनेंद्र यादव, राकेश भाटी, राहुल कपासिया, अरविंद भाटी, मदन शर्मा और भगत सिंह आर्य सहित अन्य कार्यकर्ता गण उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में योगदान दिया।
चौपाल: जहां गांव की आत्मा आज भी सांस लेती है
मेले का सबसे अनूठा और चर्चित आकर्षण रहा—पारंपरिक ‘चौपाल’। फूंस के छप्पर के नीचे बनी यह चौपाल मानो पुराने गांव की जीवंत झलक प्रस्तुत कर रही हो।
लगभग 20×30 फीट में फैली इस चौपाल में 200 फूंस के पूले, 20 बींड, मूंज की रस्सियों और 23 बांसों का उपयोग कर इसे पारंपरिक शैली में तैयार किया गया है। यहां रखी विश्व की सबसे बड़ी खाट, विशाल हुक्का, बैलगाड़ी, पीढ़े और अन्य ग्रामीण उपकरण लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
चौपाल के सामने स्थित पीपल का पेड़ और पास का प्राचीन कुआं इस स्थान को और अधिक आकर्षक और ऐतिहासिक बनाते हैं। यहां बैठकर बुजुर्ग अपने बीते दिनों को याद करते नजर आए, तो युवा पहली बार उस जीवनशैली को महसूस करते दिखे, जो अब धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है।
दंगल: परंपरा और शक्ति का प्रदर्शन
मेले का अगला प्रमुख आकर्षण 13 अप्रैल (सोमवार) को आयोजित होने वाला विशाल इनामी कुश्ती दंगल है। ₹101 से ₹1,51,000 तक की इनामी कुश्तियों के साथ यह दंगल खेल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहेगा।
गुरु जसराम अखाड़ा, गुरु हनुमान अखाड़ा (दिल्ली), जमालपुर और नलगड़ा अखाड़ा के पहलवानों के साथ-साथ कलुआ जमालपुर, जोंटी पहलवान एवं पलवल, आगरा (फतेहाबाद), गाजियाबाद सहित कई क्षेत्रों के नामी पहलवान इसमें भाग लेंगे।
बाबा मोहन राम ट्रस्ट, दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस दंगल में भीम पंडित पहलवान एवं उनकी टीम द्वारा विशेष ‘मुकदड़’ का प्रदर्शन भी दर्शकों को रोमांचित करेगा।
एक मेला, एक संदेश
बाराही मेला-2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन बनता जा रहा है—जहां हर आयु वर्ग, हर सोच और हर भावना को एक मंच मिलता है।
यह मेला हमें याद दिलाता है कि हमारी असली पहचान हमारी संस्कृति, परंपरा और सामूहिक जीवन में बसती है। यहां की हर धुन, हर शब्द और हर दृश्य एक संदेश देता है—कि आधुनिकता के बीच भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।