BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

“गांव-गांव में जागी अंबेडकर चेतना” — जेवर क्षेत्र में 135वीं जयंती बनी सामाजिक बदलाव का अभियान


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर जेवर विधानसभा क्षेत्र के चचूरा और डाढ़ा गांवों में आयोजित कार्यक्रम इस बार केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह आयोजन ग्रामीण सामाजिक चेतना, शिक्षा के प्रसार और समानता के संकल्प का सशक्त जनअभियान बनकर सामने आया।
1 अप्रैल से देशभर में चल रही अंबेडकर जयंती की तैयारियों के बीच 14 अप्रैल को इन गांवों में ऐसा माहौल देखने को मिला, जहां हर वर्ग—युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और सामाजिक कार्यकर्ता—बाबा साहेब के विचारों से जुड़ते नजर आए।
श्रद्धांजलि से शुरुआत, विचार क्रांति की ओर बढ़ता कदम
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इस दौरान पूरे वातावरण में “जय भीम” और “जय संविधान” के नारों की गूंज सुनाई दी।
इसके बाद सभा का आयोजन किया गया, जहां वक्ताओं ने बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, सामाजिक अन्याय के खिलाफ उनके आंदोलन और संविधान निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि का संदेश—शिक्षा ही असली शक्ति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे एड. नरेंद्र भाटी (डाढ़ा), भाजपा नेता एवं जेवर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी, ने अपने संबोधन में कहा:
“डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। उन्होंने जिस संघर्ष के बल पर समाज को समानता और अधिकार दिलाए, वह आज भी हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा है।”
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि
“‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’—यह केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग है। जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज जरूरत है कि हम बाबा साहेब के विचारों को केवल भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवन में उतारें।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी—बदलाव का संकेत
इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता रही महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी। गांव की महिलाओं ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शिक्षा व समानता पर अपने विचार रखे।
युवाओं ने भी बाबा साहेब के विचारों को अपनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया। कई युवाओं ने शिक्षा को प्राथमिकता देने और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही।
गांवों में बदलता सामाजिक परिवेश
चचूरा और डाढ़ा जैसे गांवों में इस प्रकार के आयोजनों का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहले सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा कम होती थी, वहीं अब लोग शिक्षा, अधिकार और समानता जैसे विषयों पर खुलकर संवाद कर रहे हैं।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बाबा साहेब के विचार धीरे-धीरे समाज की जड़ों तक पहुंच रहे हैं।
वक्ताओं ने साझा किए प्रेरणादायक प्रसंग
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए—कैसे उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त की, कैसे उन्होंने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया, और कैसे उन्होंने देश को एक मजबूत संविधान दिया।
इन प्रसंगों ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया और उनमें आत्मविश्वास और जागरूकता का संचार किया।
संकल्प: विचारों को जीवन में उतारने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाएंगे और समाज में समानता, शिक्षा और भाईचारे को बढ़ावा देंगे।
विशेष रूप से यह बात सामने आई कि गांवों में बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
सामाजिक एकता का उदाहरण बना आयोजन
इस आयोजन ने यह भी साबित किया कि जब समाज एकजुट होकर किसी महान व्यक्तित्व के विचारों को अपनाता है, तो वह केवल कार्यक्रम नहीं रहता, बल्कि एक आंदोलन का रूप ले लेता है।
विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों की एक साथ भागीदारी ने सामाजिक एकता और सौहार्द का मजबूत संदेश दिया।
विश्लेषण (Vision Live)
जेवर क्षेत्र के चचूरा और डाढ़ा गांवों में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब ग्रामीण भारत में सामाजिक बदलाव की बुनियाद मजबूत हो रही है। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि विचारों को जमीन पर उतारने का प्रयास था।
यदि ऐसे कार्यक्रम निरंतर इसी उद्देश्य के साथ आयोजित होते रहे, तो यह न केवल सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने में सहायक होंगे, बल्कि एक शिक्षित, जागरूक और समतामूलक भारत के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।